भोपाल में सात दिवसीय मध्यप्रदेश उत्सव की रंगारंग शुरूआत
मैहर वाद्य वृंद की प्रस्तुति से अभिभूत हुये श्रोता
मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना के 52वीं वर्षगांठ के मौके पर
आज भोपाल के रवीन्द्र भवन में मध्यप्रदेश उत्सव की रंगारंग
शरूआत हुई। कार्यक्रम के प्रारंभ में कनाडा की प्रख्यात
चित्रकार सुश्री जो.एन. लेनवेल, चित्रकार अमिताब दास, सुश्री
सोमा घोष, श्री सुरेशचंद्र चतुर्वेदी, संस्कृति सचिव श्री
मनोज श्रीवास्तव, संस्कृति संचालक श्री पवन श्रीवास्तव ने
दीप प्रज्जवलित कर सात दिवसीय मध्यप्रदेश उत्सव का शुभारंभ
किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सुप्रसिध्द कथक नृत्यांगना सुश्री
सुचित्रा हरमलकर की शिष्याओं ने समूह नृत्य में 'जय-जय
मध्यप्रदेश' की प्रस्तुति दी। मध्यप्रदेश के इस वंदना गीत
में प्रदेश की गौरवशाली संस्कृति एवं पुरासंपदा का बखान था।
श्री पुरूषोत्तम चक्रवर्ती द्वारा लिखित गीत में श्री प्रमोद
भट्ट ने मधुर संगीत दिया है। इस गीत में भारत के हृदय प्रदेश
मध्यप्रदेश में महाकाल, ओंकारेश्वर, चित्रकूट धार्मिक स्थलों
का भी वर्णन था। मध्यप्रदेश के वंदनगीत के बाद विश्व
प्रसिध्द मैहर वाद्य वृंद की प्रस्तुति हुई। मैहर वाद्य वृंद
(मैहर बैंड) की स्थापना वर्ष 1918 में महान संगीतज्ञ स्व.
उस्ताद अलाउद्दीन खाँ ने की थी। मैहर वाद्य वृंद में दुर्लभ
वाद्ययंत्रों के साथ श्री सुरेशचंद्र चतुर्वेदी के संगीत
निर्देशन में कलाकारों ने राग यमन में विलंबित द्रुत तीन ताल
में प्रस्तुति दी, बाद में कलाकारों ने गांधी जी के प्रिय
भजन 'वैष्णव जन ...........' की भी प्रस्तुति दी। मैहर वाद्य
वृंद की प्रस्तुति से सभागार में उपस्थित श्रोता अभिभूत हो
गये। मैहर वाद्य वृंद के कलाकारों ने बाद में विभिन्न रागों
में अन्य प्रस्तुतियां भी दी।
मध्यप्रदेश उत्सव के पहले दिन अंतिम प्रस्तुति प्रख्यात
शहनाई वादक मरहूम उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की शिष्या मुंबई की
डॉ. सोमा घोष के शास्त्रीय गायन से हुई। बनारस घराने से
तालुक रखने वाली डॉ सोमा घोष ने विभिन्न रागों में अपने मुधर
गायन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।