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  जनता से मिले बगैर चैन कहां : मुख्यमंत्री श्री चौहान
दो दिवसीय जैत यात्रा
Sehore:Monday, October 19, 2009: मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कल रविवार और आज सोमवार का पूरा दिन अपने गृह ग्राम जैत में बिताया। वे अपनी पत्नी श्रीमती साधना सिंह, पुत्र कुणाल और कार्तिकेय के साथ जैत पहुंचे। उन्होंने यहां आज भाई दूज पर सपरिवार कुलदेवता की पूजा अर्चना की और ग्रामीणों से मिलकर उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दी। उन्होंने ग्रामीणों से जन समस्याओं के आवेदन भी प्राप्त किए। बिना किसी लावलश्कर के अपनी निजी यात्रा पर जैत पहुंचे मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जनता से मिले बगैर मुझे चैन कहां। उन्होंने जैत में ही रात्रि विश्राम किया।
बचपन में बिताए दिनों का स्मरण
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रविवार को ग्राम जैत पहुंचकर सपरिवार कुल देवता की पूजा अर्चना की। वे सपरिवार अपने खेत पर गए जहां उन्होंने बचपन में बिताए दिनों को याद किया। उन्होंने खेत में लगी धान की फसल को देखा। मुख्यमंत्री ने जैत में ठेकेदार की उस टपरिया को भी देखा जहां वे बचपन में धमा-चौकड़ी मचाया करते थे। बटाईदार श्री कंछेदी लाल केवट के साथ मुख्यमंत्री ने करीब एक घन्टे का समय बिताया और बचपन में बीते पलों को याद किया। उन्होंने श्री कंछेदी लाल की मां श्रीमती मीराबाई केवट से मिलकर उनकी कुशलक्षेम पूछी।
आनंद की अनुभूति
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा तट पर पक्षियों के कलरव के बीच शान्त वातावरण में कुछ समय बिताया। उन्होंने शांत भाव से काफी देर तक प्रकृति के इस अनूठे सौन्दर्य को निहारते हुए कहा कि प्रकृति के अनोखे सौन्दर्य और मां नर्मदा के सानिघ्य से मुझे सुखद आनंद की अनुभूति होती है। मुख्यमंत्री ने यहां से लौटकर ग्रामीणों से उनकी कुशलक्षेम पूछी। वे स्व. श्रीमती सुन्दर देवी चौहान की स्मृति में निर्मित मंदिर में चल रही संध्या आरती में शामिल हुए।
आज सुबह की शुरूआत मुख्यमंत्री ने सपरिवार नर्मदा की पूजा अर्चना कर की। नर्मदा तट पर उन्होंने ग्रामीणों के साथ अपना फोटो भी खिचवाया।
जनता के दु:ख दर्द जाने
मुख्यमंत्री के जैत में निवास पर उनसे मिलने पहुंचे ग्रामीणों से उन्होंने आत्मीयता से भेंट की और उनकी समस्याओं पर चर्चा की। ग्रामीणों द्वारा अपनी विभिन्न समस्याओं के आवेदन पत्र सौंपे जाने पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जन कल्याण मेरा लक्ष्य है। उन्होंने प्राप्त आवेदनों को मौके पर मौजूद अधिकारियों को सौंपते हुए सभी का निराकरण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सरदार नगर निवासी यादराम आत्मज जीवनलाल के पुत्र के पैर के ऑपरेशन के लिए दस हजार रूपये की आर्थिक सहायता मंजूर की। उन्होंने कैंसर पीड़ित महिला श्रीमती गनेशी बाई पत्नी श्री छोटेलाल कहार को बेहतर उपचार के लिए तत्काल भोपाल भेजने के निर्देश दिए। इसी तरह उन्होंने श्रीमती कमलाबाई के भी समुचित उपचार के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की बागडोर संभाले एक लम्बा अर्सा गुजर जाने के बाद यह पहला मौका था जब मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दो दिन अपने गृह ग्राम जैत में अपनों के बीच बिताए।
अतीत का दोहराव
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अठारह और उन्नीस अक्टूबर को अलग मायने दिए। इन दो दिनों को इसलिए भी याद किया जायगा जब वे मुख्यमंत्री बनने के बाद लगातार दो दिन अपने गांव जैत में रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन पलों को जी भर जिया जो अतीत बन चुके थे। गांव की गलियां हों, खेत की मेड़ हो या पुण्य सलिला नर्मदा का पावन तट। श्री चौहान सभी दूर बड़े सहज और सरल अंदाज में गए। अपनों से मिले और अपने अतीत को याद किया। वे अपने खेत पर पहुंचे। धान और तुअर के पौधों को अपनत्व भाव से छुआ और दुलारा। यह मिलन अपने आप में अनोखा था। जो कदम कभी जैत की धूल भरी गलियों में विचरते थे, आज उन कदमों की आहट विकास का पर्याय मानी जाती है। कहने का तात्पर्य यह कि वे जहां भी जाते हैं वहां क्षेत्र के विकास को लेकर विचार जरूर करते हैं।

  ईसाई धार्मिकसंपत्तियों के नियंत्रण का प्रस्ताव
भोपाल। मध्यप्रदेश में ईसाई धार्मिक संपत्तियों के नियंत्रण, देखरेख एवं रखरखाव के लिए मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों के लिए बने वक्फ बोर्ड की तर्ज पर एक पृथक बोर्ड गठित करने को लेकर राज्य अल्पसंख्यक आयोग सरकार से सिफारिश करने की योजना पर काम कर रहा है।
एमपीएसएमसी में ईसाई समुदाय के प्रतिनिधि सदस्य आनंद बर्नाड ने कहा, ''राज्य सरकार को भेजी जाने वाली सिफारिश का प्रस्तावित मसौदा तैयार करने के लिए हम मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी.एस. कोकजे की मदद ले रहे हैं''।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके न्यायमूर्ति कोकजे यह काम अगले माह तक पूरा कर लेंगे। इस प्रस्तावित सिफारिश में हम राज्य सरकार से एक विधेयक तैयार करने का आग्रह करने वाले हैं, जिसमें वक्फ बोर्ड के समान ईसाई धार्मिक संपत्तियों के नियंत्रण, देखरेख एवं रखरखाव के लिए भी एक बोर्ड गठित करने का सुझाव होगा।
एक सवाल के जवाब में बर्नाड ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि प्रदेश भर से इन संपत्तियों को भू-माफिया को औने-पौने दाम पर बेचने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। एमपीएसएमसी में ईसाई प्रतिनिधि सदस्य ने कहा कि हमारे इस प्रस्ताव में सरकार से खुद इन धार्मिक संपत्तियों का नियंत्रण, देखरेख एवं रखरखाव करने के सुझाव के बजाए यह सिफारिश की जाएगी कि वह एक कानून बनाकर एक ऐसा बोर्ड गठित करे, जिसमें समुदाय के चयनित सदस्य प्रतिनिधि ही यह काम करें।
ऐसे किसी बोर्ड के गठन संबंधी कथित प्रस्ताव का ईसाई समुदाय में सख्त विरोध को लेकर पूछने पर बर्नाड ने कहा कि अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी तो धार्मिक संपत्ति के नियंत्रण, देखरेख एवं रखरखाव के लिए कानून बने हैं और उन पर अमल भी हो रहा है।
यह पूछने पर कि क्या ईसाई समुदाय में आयोग के इस कदम के सख्त विरोध को देखते हुए राज्य सरकार के हस्तक्षेप पर कुछ माह पहले इस काम को क्या रोक दिया गया है, उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है।
बर्नाड ने कहा कि वह इस विरोध को लेकर अचंभित हैं, क्योंकि भारतीय चर्च अधिनियम 1927 इस देश में आजादी के पहले लागू था।

  बड़े तालाब में क्रूज का संचालन 15 दिसम्बर से
Bhopal:Monday, October 19, 2009: मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा निर्णय लिया गया है कि बड़े तालाब भोपाल में 15 दिसम्बर, 2009 से क्रूज का चालन प्रारम्भ कर दिया जायेगा। विभिन्न आपत्तियों एवं बड़े तालाब में पानी की कमी के कारण भोपाल में क्रूज का चालन दिनांक 26 सितम्बर, 2008 से बंद कर दिया गया था।
नगर निगम भोपाल ने 14 अक्टूबर, 2009 को अवगत कराया है कि बड़े तालाब भोपाल में क्रूज चलाने की अनुमति पूर्व में जारी की गई थी, वह वर्तमान में भी प्रभावशील है।
पर्यटकों की मांग को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन निगम के अध्यक्ष श्री ध्रुव नारायण सिंह द्वारा क्रज के चालन हेतु विशेष प्रयास किये गये। नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री बाबूलाल गौर द्वारा क्रूज के संचालन में रुचि दिखाई गई एवं पहल की गई। इसके परिणामस्वरूप नगर निगम भोपाल द्वारा 14 अक्टूबर, 2009 को पुन: अनुमति की पुष्टि की गई है।

  विवाह पंजीयन के लिए सिर्फ तीस दिन
भोपाल। विवाह के बाद 30 दिन की अवधि में ही इसका पंजीयन कराने के लिए आवेदन देना होगा। इसके बाद आवेदन देने पर कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। पंजीयन के लिए नगर निगम ने विवाह पंजीयन अधिकारी नियुक्त किए हैं।
जहां विवाह होगा उसका पंजीयन वहीं के रजिस्ट्रार के कार्यालय में होगा। विवाह के पक्षकार निर्धारित प्रपत्र में पंजीयन के लिए आवेदन पत्र दो प्रतियों में व्यक्तिगत अथवा रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेज सकते हैं। यदि तीस दिन के अंदर आवेदन नहीं भेज पाए तो पंजीयन कराने के लिए उचित कारण बताना होगा। विवाह पंजीयन आवेदन का निराकरण के लिए विभाग को दो माह का समय दिया गया है। विवाह पंजीयन अस्वीकृत करने की स्थिति में पक्षकार जिला न्यायाधीश को 30 दिन की अवधि में अपील कर सकते हैं। जिला न्यायाधीश का आदेश अंतिम होगा। नगर निगम भोपाल में कमिश्नर मनीष सिंह ने आदेश जारी कर दो अधिकारियों को विवाह पंजीयन अधिकारी नियुक्त किया है। जोन 1 से 7 के क्षेत्रों के लिए विवाह पंजीयन अधिकारी नगर निगम परिषद सचिव जीसी भावसार और जोन 8 से 14 के क्षेत्रों के लिए विवाह पंजीयन अधिकारी उपायुक्त राजीव निगम को नियुक्त किया है। विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र देने के लिए निर्धारित शुल्क 30 रुपए के अतिरिक्त नगर निगम ने इस काम के लिए प्रशासकीय व्यय 20 रुपए वसूलने का प्रस्ताव तैयार किया है। विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के लिए कुल 50 रुपए शुल्क लेने का प्रस्ताव नगर निगम प्रशासन ने मंजूरी के लिए परिषद में भेज दिया है। इस प्रस्ताव को एमआईसी ने मंजूरी दे दी है।

पंजीयन के लिए जरूरी दस्तावेज
-जन्म प्रमाण पत्र या आयु संबंधी अन्य मान्य साक्ष्य।
- वर-वधु के पासपोर्ट साइज के फोटो की 3 प्रति।
-पक्षकारों के मध्य विवाह संपन्न होने का प्रमाण, विवाह पत्रिका, विवाह संपन्न कराने वाली संस्था का प्रमाण पत्र।

पंजीयन के फायदे
-विवाह संबंधी प्रमाणिक दस्तावेज।
-बाल विवाह पर रोक लगेगी।
- विदेश यात्रा के लिए विवाह प्रमाण पत्र उपयोगी होगा।
-सरकारी अथवा अ‌र्द्ध सरकारी कर्मचारियों की कार्यालय अभिलेखों में वैवाहिक स्थिति में परिवर्तन हेतु अनिवार्य दस्तावेज होगा।

  राज्य में 80 हजार मछुओं को वैयक्तिक दुर्घटना बीमा का लाभ देने की योजना
प्रदेश में मछुआरों को आर्थिक रूप से सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से वैयक्तिक दुर्घटना बीमा किया जा रहा है। पिछले वर्ष 72 हजार 954 मछुआरों को बीमा सुरक्षा का लाभ दिया गया।
मछली पालन विभाग द्वारा इस वर्ष 80 हजार मछुआरों को दुर्घटना बीमा का लाभ दिये जाने के लिये विभागीय अधिकारी प्रयास कर रहे हैं। मछुआरों को मछली पालन में आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों के तहत प्रशिक्षण दिया जा जा रहा है। प्रशिक्षण देने पर इस वर्ष 40 लाख रूपये की राशि व्यय की जायेगी। राज्य के 100 मत्स्य पालकों को अध्ययन भ्रमण हेतु प्रदेश के बाहर भेजे जाने का भी कार्यक्रम तैयार किया गया है।

  शक्कर लायसेंस और व्यापार नियंत्रण आदेश संशोधित
थोक व्यापारियों की स्टॉक सीमा दो हजार क्विंटल, 45 दिन से ज्यादा भण्डारण नहीं होगा, थोक उपभोक्ताओं के लिए भण्डारण अवधि 15 दिन, परिवहन भण्डारण की अवधि सात दिन
राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर मध्यप्रदेश शक्कर व्यापारी आदेश 2009 में संशोधन किया है। पिछले दिनों प्रदेश के शक्कर व्यापारियों ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारसचंद्र जैन से मिल कर उनके समक्ष अपनी कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हल करने की मांग की थी। इन्हें सरकार ने यथोचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। अलबत्ता सरकार ने यह भी साफ कर दिया था कि प्रदेश में शक्कर लायसेंस और नियंत्रण आदेश जारी रहेगा। व्यापारियों को बेवजह परेशान करने की उसकी मंशा नहीं है लेकिन ज़माखोरी, कालाबाजारी और मुनाफाखोरी के खिलाफ उसकी मुहिम लगातार चलती रहेगी।
ताज़ा संशोधन के मुताबिक थोक उपभोक्ता को नए सिरे से परिभाषित किया गया है। इसका मतलब उस व्यक्ति, स्थापना या औद्योगिक इकाई से होगा जो हर महीने कच्चे माल के बतौर किसी भी तरह से 10 क्विंटल से ज्यादा शक्कर का इस्तेमाल या खपत करता है। इन लोगों पर शक्कर नियंत्रण और लायसेंस आर्डर लागू होगा। अलबत्ता यह भी साफ किया गया है यह आदेश केन्द्र, राज्य, संघ राज्य, स्थानीय निकाय और रजिस्ट्रीकृत पूर्व न्यास द्वारा चलाई जा रही किसी संस्था, अस्पताल, कामकाजी पुरूष-महिला हॉस्टल और शैक्षणिक संस्था के छात्रावास पर लागू नहीं होगा। इसी तरह फुटकर व्यापारी को यह परिभाषित किया गया है कि ऐसा कोई व्यक्ति, भागीदार फर्म, सोसायटी, निगम और पंजीकृत निकाय जो एक वक्त में 20 क्विंटल से कम शक्कर की खरीदी, बिक्री या बिक्री के लिए इसके भण्डारण के कारोबार में लगा है।
ताज़ा संशोधन के तहत लायसेंसी थोक व्यापरी 45 दिन से ज्यादा के लिए शक्कर का भण्डारण नहीं कर सकेंगे। इसी तरह वे एक वक्त में 2000 क्विंटल से ज्यादा शक्कर का स्टॉक जमा नहीं करेंगे। यह भी साफ कर दिया गया है कि ये लोग भी शक्कर का स्टॉक सिर्फ लायसेंसी परिसर में ही करेंगे। ऐसी जगह को बदलने के पहले प्राधिकृत अधिकारी से इजाजत लेनी होगा। इन्हें शक्कर के रोजमर्रा के स्टॉक, खरीदी और बिक्री का हिसाब बताने वाला रजिस्टर अपने पास रखना होगा।
ट्रांजिट (परिवहन) की अवधि
संशोधन के तहत शक्कर के परिवहन की सुविधा की दृष्टि से किसी स्थान पर भण्डारित करने की अधिकतम अवधि 7 दिन की गई है। हालांकि जिस स्थान पर यह भण्डारण होगा वहाँ परिवहनकर्ता को एक रजिस्टर रखना होगा जिसमें शक्कर के स्टॉक की आवाजाही का पूरा ब्यौरा और संबंधित व्यापारी का लायसेंस नंबर दर्ज होगा। लायसेंसी व्यापारी का यह फर्ज होगा कि वह जिस जिले से लायसेंस लिया है उसके कलेक्टर और उपरोक्त शक्कर जिस जगह भेजी जा रही उसके जिला कलेक्टर को शक्कर के भण्डारण के पहले सूचना दे दे। यदि वह ऐसा सूचना नहीं देता है तो भण्डारित शक्कर को अवैध माना जा सकेगा और इस स्टॉक की तयशुदा अधिकतम स्टॉक सीमा में शामिल मान लिया जाएगा। इसी तरह थोक उपभोक्ताओं को अपने उपयोग के लिए एक वक्त में 15 दिन से ज्यादा का शक्कर स्टॉक जमा नहीं करना है।
सारे जिला कलेक्टरों को इस संशोधन की जानकारी तत्काल दे दी गई है।

  मण्डला में परमाणु बिजलीघर पर केन्द्र का आभार
भोपाल, 19 अक्टूबर। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री केप्टन जयपाल सिंह ने प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले के चुटका ग्राम में परमाणु बिजली घर की स्थापना के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये केन्द्र सरकार का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि 14 सौ मेगावाट की इस परियोजना  से प्रदेश का विद्युत संकट लगभग समाप्त हो जाएगा तथा विकास के नये रास्ते खुलेंगे। केप्टन सिंह ने राज्य सरकार से अपेक्षा की है कि वह प्रदेश हित में भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड से पूर्ण सहयोग कर अपनी ओर से हरसंभव आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाएगी।

  कांग्रेस की दो महत्वपूर्ण बैठकें 20 अक्टूबर को
भोपाल, 19 अक्टूबर। आगामी नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में कल मंगलवार 20 अक्टूबर को यहां भोपाल दक्षिण-पश्चिम एवं भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की दो महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गई हैं। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री श्री राजीव सिंह के अनुसार भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 26 से 35, 47, 48 एवं 49 के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक प्रात: 30 बजे रोशनपुरा चौराहा स्थित जवाहर भवन के प्रथम तल पर रखी गई है। इसी प्रकार भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 22 से 31, 45, 46 एवं 47 के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक अन्य बैठक अपरान्ह 300 बजगिन्नौरी (हाथी खाना) स्थित रकीब लेकव्यू शादी हाल में आयोजित की गई है।
उन्होंने बताया कि उक्त दोनों बैठकों को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री सुरेश पचौरी के अतिरिक्त दोनों विधानसभा क्षेत्रों के वरिष्ठ कांग्रेसजन सम्बोधित करेंगे। बैठक में आगामी नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों का जायजा लिया जाएगा तथा रणनीति तय की जाएगी।

  

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