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सभ्यताओं के बीच उदार और खुले मन से ही संवाद हो सकता है
(स्व. माणिकचन्द्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार
2008)
उद्धाटन सत्र में विश्व सभ्यताओं के अंतस्संबंध पर विमर्श
सभ्यताओं के बीच संघर्ष नहीं संवाद होना चाहिये। लेकिन इस
संबंध के लिये अपनी पहचान को नकार कर संवाद नहीं होना
चाहिये। आज सुपर
एडवांस सिविलाइजेशन के आदर्श के नाम पर
हमारे ऊपर विचार
परिभाषाएं लादी जा रही हैं। उससे मार्ग
नहीं निकलेगा । सभ्यताओं के बीच उदार और खुलेमन से ही संवाद
हो सकता है। यह बिना किसी पूर्वाग्रह के,
दूसरों की पहचान एवं उनके विचारों को
स्वीकार करने से ही संभव होगा।
यह विचार स्व. माणिकचन्द्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता
पुरस्कार
2008
के लिये जनसंपर्क संचालनालय द्वारा
आयोजित कार्यक्रम के उद्धाटन सत्र में विध्दान वक्ताओं ने
अपने संबोधन में व्यक्त किये।
इस सत्र में विश्व सभ्यताओं के अंतस्संबंध पर हुए विमर्श में
गांधी विद्या संस्थान,
वाराणसी की प्रो. कुसुमलता केडिया ने बीज
वक्तव्य दिया। प्रो. केडिया ने अपने संबोधन में प्रामाणिक
उध्दरण देते हुए कहा कि हमारी पृथवी पर प्राचीन समय से ही
उन्नत सभ्यताओं का अस्तित्व रहा है। इनमें अन्तर संबंध भी
रहा है। इन सभ्यताओं के समय गुफा मानव नहीं बल्कि सभ्य मानव
रहा करता था। हमारा जिस इतिहास से परिचय कराया जाता है वह
पृथ्वी के एक छोटे से हिस्से और आज से थोड़े ही पहले के समय
का इतिहास है। यह पूरी पृथ्वी का इतिहास नहीं है। आज
लाखों-करोड़ों वर्ष पहले के तथ्य सामने आ रहे हैं। लेकिन
वैज्ञानिक समाज इसे समझ नहीं पा रहा है। उन्होंने युवा पीढ़ी
का अध्ययन के लिये आव्हान करते हुए कहा कि तभी भविष्य में
ज्ञान के इस आलोक से परिचित भारत विश्व का नेतृत्व करने में
समर्थ होगा।
विमर्श में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
के स्वयंसेवक श्री राम माधव ने बोलते हुए कहा कि अपनी ही
सभ्यता को श्रेष्ठ मानने से सोच से ऊपर उठना होगा। कोई धर्म
या संस्कृति युध्द नहीं करते हैं। यह बात कहने में आदर्श लग
सकती है। लेकिन सच नहीं हो सकती। धर्म व संस्कृति इतिहास में
अनेक युध्दों के होने के एक कारक रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष
करते हुए कहा कि हमारे देश में पहचान की बात करने को राजनीति
मान लिया जाता है। लेकिन यह समझना होगा कि सभ्यताओं को पूरी
तरह नष्ट नहीं किया जा सकता है। अत: किसी को भी अपनी सभ्यता
और संस्कृति को आक्रामक तरीके से स्थापित करने के प्रयास
नहीं करना चाहिये। उदारता के साथ संवाद के बजाय आज
ग्लोबलाइजेशन,
साइंस एण्ड टेक्नालॉजी,
ह्यूमन राईट्स की आड़ में सुपर
एडवांस सिविलाइजेशन को स्थापित
करने की कोशिश हो रही है।
उद्धाटन सत्र के मुख्य अतिथि और अ.भा. साहित्य परिषद के
सह-संगठन मंत्री श्री श्रीधर पराड़कर ने अपने संबोधन में कहा
कि हमारे ऊपर विचार और परिभाषाएं लाद दी गयी हैं। उससे संवाद
और संबंध बनाने का मार्ग नहीं निकलेगा। संवाद के लिये हमें
अपनी पहचान को नहीं नकार देना चाहिये। अपने विचारों को
स्थापित करने के लिये दुनियाभर में हो रही कोशिशों की ओर
इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि लाशों पर सभ्यताएं नहीं बना
करती हैं। उन्होंने कहा कि निहित स्वार्थ नहीं बल्कि
मनुष्यत्व के भाव से ही सभ्यताएं बनती और पनपती हैं। दूसरों
के अस्तित्व और विचारों को मानने और सम्मान देने से ही संवाद
और संबंध बनते और विकसित हो सकते हैं।
जनसंपर्क एवं संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार युवा पीढ़ी को
अध्ययन की ओर प्रवृत्त करने के लिये हर जिले में अध्ययन
केन्द्र स्थापित करने के प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि स्व.
माणिकचंद्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार के इस दो
दिवसीय आयोजन में वक्ताओं के विद्वतापूर्ण संबोधन को पुस्तक
के रूप में प्रकाशित किया जायेगा।
प्रारंभ में जनसंपर्क एवं संस्कृति सचिव श्री मनोज
श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण देते हुए आयोजन की विचारभूमि पर
सारगर्भित वक्तव्य देते हुए आज उपस्थित सांस्कृतिक संकट को
रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज धर्म और धन की विकृत
मनोवृत्तियों के बीच सिविलाइजेशन की बात हो रही है।
सांस्कृतिक संघर्ष के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने
विमर्श के संदर्भ में संस्कृति की भारतीय अवधारणा की ओर
संकेत किया।
सत्र का शुभारंभ सभी अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
अपर संचालक (जनसंपर्क) श्री रज्जू राय ने अतिथियों का पुष्प
गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उद्धाटन सत्र का समापन अपर
संचालक (जनसंपर्क) श्री के.ए. कबीर के कृतज्ञता ज्ञापन के
साथ हुआ।
जमाखोरी-मुनाफाखोरी के विरूध्द मध्यप्रदेश में अभियान जारी
रहेगा
ईमानदार व्यापारियों को परेशानी नहीं हो: लायसेंस निर्धारित
समय सीमा में दें,
मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा अभियान की
समीक्षा
शक्कर की जमाखोरी एवं मुनाफाखोरी के विरूध्द अभियान जारी रखा
जाए तथा व्यापारियों को शक्कर व्यापार के लायसेंस देने में
विलंब नहीं हो। यह निर्देश मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह
चौहान ने आज मंत्रालय में अभियान की समीक्षा के दौरान दिए।
बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री श्री
पारसचन्द्र जैन,
खाद्य सचिव श्री ए.के. दास तथा अन्य
अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक
425
स्थानों पर की गई जांच में 43
हजार 184
क्विंटल शक्कर जब्त की गई है तथा सात प्रकरणों में प्रकरण
दर्ज किए गए हैं। इस कार्रवाई से प्रदेश में शक्कर के फुटकर
भाव में प्रति किलो तीन रूपए तक की कमी आई है।
बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कीमतों पर
नियंत्रण के लिये शुरू किए गए अभियान के अच्छे परिणाम आए
हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य व्यापारियों को परेशानी नहीं
हों,
लायसेंस 15
दिन की निर्धारित समय सीमा में शीघ्रता से जारी हों तथा
निर्धारित नियमों के अनुसार दो प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा
नहीं लिया जाए, यह प्रशासन को
सुनिश्चित करना है। कई स्थानों पर व्यापारियों द्वारा शुरू
की गई उचित मूल्य पर शक्कर वितरण की व्यवस्था को प्रोत्साहित
करने के साथ ही उन्हें सम्मानित करने की भी कार्रवाई की
जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान स्वयं भी इस संबंध में
व्यापारी संगठनों से चर्चा करेंगे।
श्री शरद पवार से फोन पर चर्चा
बैठक में केंद्र द्वारा मध्यप्रदेश को पिछले सात माहों में
2.5
लाख टन लेव्ही की शक्कर कम दिए जाने की
जानकारी दिए जाने पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने तत्काल
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार से टेलीफोन पर चर्चा कर
उनमे यह शक्कर शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया। श्री चौहान
ने केन्द्रीय कृषि मंत्री से महाराष्ट्र की शक्कर मिलो से
मध्यप्रदेश के व्यापारियों को बाजिव मूल्य पर शक्कर दिए जाने
के लिये आवश्यक सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि
वर्तमान परिस्थितियों में शक्कर मिलों द्वारा शक्कर के थोक
व्यापार में एक प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा नही लिया जाय।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री पवार ने इन दोनों मामलों में
आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन मुख्यमंत्री को दिया।
श्री राममाधव द्वारा संगोष्ठी की सराहना
स्व.माणिकचंद्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार
समारोह के अंतर्गत भारत भवन में जनसम्पर्क विभाग द्वारा
आयोजित संगोष्ठी के आयोजन की श्री राममाधव तथा अन्य विद्वान
वक्ताओं ने सराहना की।
श्री राममाधव ने स्व. श्री माणिकचंद्र वाजपेयी के सादगीपूर्ण
और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन को याद करते हुए उनकी
स्मृति में इस आयोजन को सर्वथा सराहनीय बताया। उन्होंने कहा
कि ऐसा कहा जाता है कि भाजपा शासित राज्यों में विचारधारा को
पीछे धकेला जाता है,
लेकिन मध्यप्रदेश सरकार के इस आयोजन से
यह आश्वस्ति हुयी है कि यह बात गलत है।
श्री राममाधव ने इस सार्थक आयोजन के लिए जनसम्पर्क मंत्री
श्री लक्ष्मीकांत शर्मा और सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव को
बधायी दी।
प्रथम सत्र के एक अन्य विद्वान वक्ता श्री श्रीधर पराड़कर ने
भी कहा कि स्व. माणिकचंद्र वाजपेयी की स्मृति में मध्यप्रदेश
सरकार द्वारा इस गोष्ठी का आयोजन एक सराहनीय और अनुकरणीय
प्रयास है। उन्होंने भी जनसम्पर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत
शर्मा और सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव को बधायी दी।
अश्लील विज्ञापनों के प्रकाशन पर रोक की मांग
भोपाल,
अगस्त 2009। समाचार पत्रों में
लगातार प्रकाशित हो रहे अश्लील विज्ञापनों पर रोक लगाने एवं विज्ञापन अधिनियम के
उल्लंघन करने वालों समाचार पत्रों पर दण्डात्मक प्रकरण दर्ज करने की मांग मध्य
प्रदेश के पत्रकार संगठन वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ने की है।
इस संबंध में
वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने पुलिस महानिदेशक भोपाल
एवं मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन को दिये पत्र में मांग की है कि राजधानी में कई
समाचार पत्र लगातार अश्लील विज्ञापन प्रकाशित कर रहें है। समाचार पत्रों का यह
कृत्य समाज की मर्यादा के विरूध है,
समाचार पत्रों के पाठक वर्ग में महिलाएं एवं बच्चे भी शामिल
होते है जिन पर इस प्रकार के विज्ञापन का विपरीत असर पड़ता है। समाचार पत्रों
द्वारा अश्लील विज्ञापनों का प्रकाशन आपत्तिजनक विज्ञापन अधिनियम (ड्रग्स एवं
मैजिक एक्ट) 1954 का उल्लंघन है। इसके दण्डात्मक
प्रावधानों में कहा गया है कि पहली बार ऐसे अपराध के लिए दोषी को 6
माह की कैद और जुर्माने की सजा दी जा सकेगी वही दूसरी बार इस
अपराध के होने पर एक साल की कैद और जुर्माने की सजा दी जा सकती है। ऐसे
विज्ञापनों को अपराधिक कृत्य मानकर इनके विरूध ड्रग्स एवं मैजिक एक्ट 1954
के तहत कार्यवाही का अधिकार जिलों के कलेक्टर पुलिस अधीक्षक
के साथ ही अनुविभागीय दण्डाधिकारी और उप पुलिस अधीक्षकों को दिये गये हैं। ऐसे
विज्ञापनों को प्रकाशित करने वाले समाचार पत्रों के मालिकों के विरूध दण्डात्मक
प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।
sharda_rv43@yahoo.com
तीन आईएएस अधिकारियों की नवीन पदस्थापना
राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन अधिकारियों की
नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किये हैं।
श्रीमती वीरा राणा को प्रबंध संचालक,
मध्यप्रदेश वित्त निगम,
इंदौर बनाये जाने के साथ ही श्रमायुक्त,
मध्यप्रदेश इंदौर का अतिरिक्त प्रभार भी
सौंपा गया है। श्रीमती राणा वर्तमान में सचिव,
सामान्य प्रशासन हैं।
श्रीमती अलका उपाध्याय को सचिव,
वित्त विभाग के पद से स्थानान्तरित करते
हुए सचिव, सामान्य प्रशासन के पद
पर पदस्थ किया गया है। इसी प्रकार श्रमायुक्त,
मध्यप्रदेश श्री अश्विनी कुमार राय को
सचिव, वित्त के पद पर पदस्थ किया
गया है।
श्रीमती वीरा राणा द्वारा प्रबंध संचालक,
मध्यप्रदेश वित्त निगम इंदौर का कार्यभार
ग्रहण करने पर श्री नीरज मंडलोई,
प्रबंध संचालक, म.प्र. वित्त निगम
इंदौर तथा प्रबंध संचालक औद्योगिक केन्द्र विकास निगम,
इंदौर केवल प्रबंध संचालक,
मध्यप्रदेश वित्त निगम इंदौर के प्रभार
से मुक्त होंगे।
''माता
की रसोई''
-
बेसहारा गरीबों के भोजन की अनूठी पहल
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बेसहारा गरीब परिवारों को
समुदाय की ओर से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में शहडोल जिले
के कुदराटोला गांव ने
''माता
की रसोई'' कार्यक्रम की शुरूआत कर
एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। यहां की ग्राम सभा ने ऐसे
बेसहारा और नि:शक्त लोगों की पहचान की है जो अपने भोजन का
इंतजाम नहीं कर पाते। वे सुबह 10
बजे और शाम छह बजे ''माता की रसोई''
में उपस्थित होकर भोजन कर सकते हैं।
उन्हें दो वक्त के खाने की कोई चिंता रही। समुदाय द्वारा
संचालित ''माता की रसोई''
में खाना बनाने के लिये गांव की ही एक
महिला रामवती बाई की सेवाएं ली गई हैं। उसे ग्राम कोष द्वारा
पारिश्रमिक के रूप में 300 रूपये
प्रतिमाह मिलेंगे।
कुदराटोला शहडोल जिला मुख्यालय से
110
किलोमीटर और विकास खण्ड जयसिंहनगर से
करीब 90 किमी दूर स्थित
264 घरों वाला यहा गांव पूरी तरह जनजातीय
बहुल गांव है। यहां गोंड जनजाति के लोग रहते हैं। इस गांव
में मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका परियोजना की गतिविधियां
संचालित हैं। परियोजना के संकुल समन्वयक प्रमोद श्रीवास्तव
ने बताया कि ग्राम सभा ने सबकी सहमति से जगोतिया बाई,
मुगिया बाई,
देवन दास, नान बाई अगरिया और
बूंदी बाई की पहचान की। ये सभी 60
वर्ष आयु से उपर हैं, असहाय हैं
और शारीरिक रूप से अत्यंत कमजोर हैं। अब उन्हें ''माता
की रसोई'' से दोनों समय भोजन
मिलेगा।
''माता
की रसोई''
के संचालन के लिये गांव के दधिवल सिंह गोंड ने अपने निवास से
लगा अपने स्वामित्व वाला एक कमरा दे दिया है। उसका कहना है
कि
''पुण्य
काम में देरी नहीं होना चाहिये।''
स्थानीय विधायक ब्यौहारी श्री बाली सिंह ने इस प्रयास की
सराहना करते हुए इसे आगे बढाने में पूरा सहयोग देने का
आश्वासन दिया है। जयसिंहनगर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन
अधिकारी श्री ओम प्रकाश द्विवेदी का मानना है कि
''अत्यंत
गरीब और बेसहारा परिवारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने
का यह बेहद प्रभावी तरीका है।''
छपरा टोला ग्राम पंचायत के सचिव अवधेश प्रसाद मिश्रा ने
बताया कि
''माता
की रसोई'' नाम से 15
किमी दूर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया की सीधी
शाखा में खाता भी खुलवाया गया है। कोई भी व्यक्ति इस प्रयास
के लिये अनुदान दे सकता है। अब तक 2000
रूपये जमा हो चुके हैं।''
सरपंच कमलेश सिंह मार्को इस प्रयास से सबसे ज्यादा प्रसन्न
हैं। ग्रामीण आजीविका परियोजना के सहयोग की सराहना करते हुए
उनका कहना है कि
''ऐसी
व्यवस्था जो गांव के लोग खुद बनाये और आपस में मिलकर उसे
चलाने के आगे आये तो वह टिकाउ होती है। ''माता
की रसोई'' इसी का परिणाम है। अब
गांव में कोई भूखा नहीं रहेगा।''
परियोजना के जिला परियोजना अधिकारी श्री धनंजय बारलिंगे का
कहना है कि -''यह एक अत्यंत
व्यावहारिक तरीका है जो स्थानीय समुदाय की गरीब परिवारों के
प्रति संवेदनशीलता का परिचय देता है।''
''माता
की रसोई''
कैसे अस्तित्व में आई इस संबंध में उप सरपंच नान बाई ने
बताया कि ग्राम सभा ने मिलकर यह निर्णय लिया कि हमारे गांव
में कोई भी भूखा नहीं रहेगा। आखिरकार यह रास्ता मिला।
परियोजना की मदद से रसोई के बर्तन मिल गये। रसोई के लिये एक
साफ -सुथरा घर मिल गया। सभी ने अनाज दिया। करीब दो क्विंटल
अनाज हो गया। सब्जी,
नमक-तेल का इंतजाम भी हो गया है। जनपद पंचायत से एक हजार
रूपये हर महीने मिल जायेंगे। सभी का साथ है। सब मिलकर
चलायेंगे। बालकरण और कमलभान जैसे युवा भी रसोई के संचालन में
अपनी सेवाएं देने के लिये आगे आये हैं।
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