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सौर उर्जा से रोशन होगा महाकाल गर्भगृह
उज्जैन,
05 जून, डॉ अरूण जैन। महाकाल मंदिर
प्रबंध समिति ने विकास और व्यवस्थाओं के उन्नयन की दिशा में कदम उठाए हैं। इस कड़ी
में मंदिर में विद्युत खर्च को कम करने के लिए सौर उर्जा का उपयोग किया जाएगा।
गर्भगृह में हमेश
रोशनी
रहे इसलिए सौर उपकरण लगाए जाएंगे। इसके लिए बजट में
20 लाख
रू क़ा प्रावधान किया गया है। महाकाल मंदिर में सौर उर्जा से रोशनी के लिए मप्र
उर्जा विकस निगम ने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया था। मदिर समिति ने वर्ष
2009-10 के बजट मे इसके लिए राशि मंजूर की थी। समिति ने हाल
ही में इसे मंजूरी दी है। उर्जा विकास निगम के माध्यम से सौर उपकरण लगाए जाएंगे।
निगम ने स्ट्रीट लाइट और सोलहर पॉवर पैके के प्रोजेक्ट दिए है। स्ट्रीट
लाइटप्रोजेक्ट में 20 टयूबलाइट तथा पॉवर पैक से
70 टयूब लाइट और 10 पंखेचलाए जा
सकते है। इससे 48 महीने में 10
लाख रू क़ी बचत होगी।
भादौ के बाद क्वार भी बरसा
उज्जैन,
05 जून, डॉ अरूण जैन। इस साल सावन
की तरह ही भादौ मं भी अच्छी बरसात हुई और क्वार की शुरूआत भी झमाझम बारि6ा
से हुई। इस बरसात से गंभीर डेम भी लबालब हो गया और इसका एक गेट खोलना पड़ा। इस बार
की बारिश ने पिछले साल का आंकड़ा भी क्रास कर दिया। पिछले साल उज्जैन जिले में कुल
2369 ऌंच औसत बारिश हुई थी। जो कि सामान्य बारिश से
121 ऌंच कम थी। लेकिन इस बार अभी तक जिले में
245 ऌंच से जयादा बारिश हो चुकी है। मानसून की सक्रियता को
देखते हुए अनुमान है कि इस बार बारिश का आंकड़ा सामान्य बारिश के आसपास पहुंच सकता
है। जिले में पिदले कुछ दिनों से हो रही अच्छी बारिश से शिप्रा नदी उफान पर है।
शुक्रवार को शिप्रा के छोटे पुल पर 3 फीट पानी था जो
रात 12 बजे बढ़कर 5 फीट तक
पहुंच गया। रात एक बजे तक गंभीर डेम का जल स्तर 2232400
एमसीएफटी तक पहुंच गया; डेम से
पानी निकालने के लिए तीन नंबर गेट एक मीटर खोला गया।
कपास
खरीदी में मंडी टैक्स यथावत रहेगा
उद्योगों के प्रति सरकार संवेदनशील - राघवजी भाई
वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री श्री राघवजी ने कहा है कि सरकार
द्वारा खण्डवा ही नहीं अपितु प्रदेशभर में उन उद्योगों को पुनर्जीवित करने के
प्रयास किये जा रहे हैं जो मरणासन्न अवस्था में चले गए हैं। उनके पीछे केवल
उद्योगपति नही नहीं बल्कि हजारों ऐसे श्रमिक परिवार भी हैं जिनकी जीविका का वे एक
मात्र साधन है। कपास से जुड़े मामलों में तो हमारी संवेदनशीलता और अधिक है, क्योंकि
इससे किसानों का हित जुड़ा है। श्री राघवजी ने यह बात कल यहां मप्र कॉटन एसोसिएशन
द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में कही। सम्मेलन की अध्यक्षता मप्र कॉटन
एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री कैलाश अग्रवाल ने की। पूर्व सांसद श्री कृष्णमुरारी मोघे
और खंडवा विधायक श्री देवेन्द्र वर्मा बतौर विशेष अतिथि उपस्थित थे।
वित्त मंत्री श्री राघवजी ने यहां मध्यप्रदेश के कपास व्यवसाय से जुड़े
उद्योगपतियों से मुलाकात की और कॉटन उद्योग से जुड़ी समस्याओं के निराकरण का
आश्वासन दिया। उन्होंने कपास मण्डियों में कपास खरीदी में एक प्रतिशत मण्डी टैक्स
यथावत रखने का भरोसा दिलाया। वित्त मंत्री ने खंडवा में लगने वाले डायवर्सन टैक्स
पर भी चिंता जताई। इस अवसर पर वित्त मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने विभिन्न
प्रकार के टैक्स को कम नहीं किया है। केन्द्र की नोडल एजेंसियां नुकसान पहुंचा रही
हैं। निर्यात में 5 प्रतिशत इंसेन्टिव नहीं मिल पा रहा है। टैक्सटाइल मिलों को
सबसिडी नहीं मिल रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यही कारण है कि राज्य सरकार को उद्योगों के उन्नयन में
परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। श्री राघवजी ने कहा कि हमने अन्य राज्यों की
तुलना में करीब एक साल बाद वेट लगाया। वित्त मंत्री ने उद्योगपतियों को संबोधित
करते हुए कहा कि सरकार जब मप्र में आई तो बहुत कम टैक्स मिल पाता था। हम लोग अधिक
ब्याज जमा कर रहे थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। सरकार ने जो टैक्स लगाए हैं वो
प्रदेश के हित में है। उसी टैक्स से सड़कें बन रही हैं। हमारे उद्योगपतियों को
ट्रांसपोटेशन में दिक्कत नही होती। मप्र एसोसिएशन ऑफ कॉटन प्रोसेसर्स एण्ड ट्रेडर्स
के राज्य स्तरीय सम्मेलन में प्रदेश के खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, सेंधवा, धामनोद,
ओझर, बड़वाह, सनावद, हरदा सहित खंडवा के कपास उद्यमियों ने शिरकत की। स्वागत
उद्बोधन श्री कैलाशचंद्र अग्रवाल व श्री राजनारायण पोरवाल ने दिया। अधिवेशन की
जानकारी कार्यक्रम संयोजक श्री राजेन्द्र चांदमल जैन ने दी, आभार श्री सुनील गुप्ता
ने माना।
शासन की वित्तीय सुदृढता के लिये कार्य करें अधिकारी– वित्त मंत्री
राज्य के स्वयं के वित्तीय स्त्रोतों पर अब सरकार की निर्भरता अधिक है। अत:
वाणिज्यिक विभाग के सभी अधिकारी शासन की वित्तीय सुदृढता के लिये सचेष्ट होकर कार्य
करे। वित्त मंत्री श्री राघवजी ने कल खंडवा में यह बात संभागीय समीक्षा बैठक में
कही। बैठक में प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर ए.पी. श्रीवास्तव, महानिरीक्षक पंजीयन
विनोद सेमवाल, अपर आयुक्त वाणिज्यिक कर इन्दौर सूरज डामोर, सोनाली वायंगाकर, एम.एल.
वर्मा, संभागीय आयुक्त खंडवा एन.के. जैन एवं खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी और
सेधवा के विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में विभागीय उपलब्धियों और कार्यों की समीक्षा की गई। बेहतर कार्य निष्पादन के
लिए अधिकारियों से सुझाव लिए गए। अपर आयुक्त श्रीमती सूरज डामोर ने कहा कि प्रदेश
में पहली बार माननीय मंत्री जी द्वारा संभाग स्तर की समीक्षा जिलों में जाकर की जा
रही है। इससे कार्यों में कसावट आयेगी और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति का संवाहक बनायें- राज्यपाल श्री ठाकुर
शिक्षकों के हित संरक्षण हेतु सभी संभव प्रयास किये जायेंगे-
शिक्षा मंत्री श्रीमती चिटनिस, चौबीस शिक्षक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मान से
अलंकृत
Bhopal:Saturday, September 5, 2009
राज्यपाल श्री रामेश्वर ठाकुर ने आज यहां रवीन्द्र भवन में आयोजित 48 वें राज्य
स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में तेरह शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान 2008 और ग्यारह
शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान वर्ष 2009 से अलंकृत किया। श्री ठाकुर ने इस अवसर
पर शिक्षकों का आव्हान किया कि विद्यार्थियों को केवल आधुनिक शिक्षा का ज्ञान ही
नहीं दें बल्कि भारतीय संस्कृति का संवाहक बनायें और स्वयं अपने आचरण के प्रति भी
संवेदनशील रहें। सम्मान अलंकरण समारोह की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना
चिटनिस ने की।
राज्यपाल श्री ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षक दिवस का दिन शिक्षा और शिक्षक के
महत्व को भारतीय संस्कृति में सम्मानजनक स्थान प्रदान करता है। भारतीय दर्शन के
मर्मज्ञ सर्वपल्ली डा. राधाकृषण के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा
कि शिक्षक देश के भविष्य के निर्माता हैं इसलिए उन्हें अपने लक्ष्य और कर्तव्य में
अधिक अंतर नहीं रखना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में भारतवर्ष को प्राप्त विश्व गुरू
के खिताब का जिक्र करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि शिक्षा जगत से जुड़े सभी लोगों को
गुरू-शिष्य परम्परा को समाज में उचित स्थान दिलाने के लिए प्रयास करते रहना होगा।
राज्यपाल ने ग्रामीण और शहरी अंचलों में समान रूप से बेहतर शिक्षा व्यवस्था की
आवश्यकता प्रतिपादित की।
शिक्षा मंत्री श्रीमती चिटनिस ने शिक्षा के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा
कि शिक्षक समाज के लिए पूजनीय हैं। शिक्षकों के हित संरक्षण के लिए राज्य शासन
द्वारा सभी संभव प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि रचनात्मक
सामाजिक परिवर्तन के लिए बच्चों में चरित्र निर्माण पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित
करें। बच्चों को समाज,परिवार और देश को जोड़ना सिखाएं। देश की गौरवमयी संस्कृति और
इतिहास से बच्चों को अवगत करायें।
राज्यपाल श्री ठाकुर ने इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग की ऑन लाईन इ-सेवा पुस्तिका
प्रणाली तथा शिकायत पंजीयन एवं निवारण प्रणाली का शुभारम्भ किया और आठ प्राचार्यों
को शोध पत्र प्रस्तुत करने पर सम्मानित किया। राज्यपाल एवं शिक्षा मंत्री द्वारा
मां सरस्वती और देश के महान शिक्षक तथा दार्शनिक डा.राधाकृष्ण के चित्रों पर
पुष्पांजलि अर्पित करते हुए अलंकरण समारोह का शुभारम्भ किया गया। राज्यपाल ने
शिक्षा विभाग की स्मारिका का विमोचन भी किया। समारोह में शिक्षकों एवं गणमान्य
नागरिकों के अतिरिक्त प्रमुख सचिव श्रीमती स्नेहलता श्रीवास्तव, माध्यमिक शिक्षा
मंडल के अध्यक्ष श्री राकेश बंसल, आयुक्त स्कूल शिक्षा, श्री बी.आर. नायडू और राज्य
शिक्षा केन्द्र के आयुक्त श्री मनोज झालानी भी उपस्थित थे।
प्रदेश
की प्राकृतिक सुंदरता की मार्केटिंग अब गाइड करेंगे
पांच
प्रसिद्ध नेशनल पार्कों के गाइडों को दिया गया प्रशिक्षण
Bhopal:Saturday, September 5, 2009 मध्यप्रदेश ईको
पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रदेश के पांच प्रसिद्घ नेशनल पार्क-बाघ रिजर्व, कान्हा,
बांधवगढ़, पन्ना, पेंच एवं सतपुड़ा में गाइडों के लिये विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया
गया। यह प्रशिक्षण प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता की मार्केटिंग करने के उद्देश्य से
आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में गाइडों को संवाद कौशल, अभिवादन कला, विशेष रूप से
अंग्रेजी भाषा के प्रचलित वाक्य बताये गये। साथ ही भाषा का संयम, ज्ञान, बोलचाल में
विनम्रता बताई गई ताकि प्रकृति की इस अनुपम भेंट को प्रदशिर्त करते हुए गाइड
ग्राहकों का मन मोह सकें। गाइडों द्वारा न केवल वन्यप्राणी, बल्कि वनस्पति, कीट,
पतंगोंे, तितलियों और सांस्कृतिक धरोहर की भी व्याख्या भविष्य में की जा सकेगी। यह
आयोजन प्रमुख रूप से गाइड की भूमिका को रोचक एवं रोमांचक बनाने का प्रयास करने के
लिये था।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के नैसगिर्क सौन्दर्य को निहारने के लिये प्रतिवर्ष
अनेक पर्यटक सैर के लिये आते है। प्रदेश के 5 प्रसिद्घ बाघ रिजर्व, कान्हा,
बांधवगढ़, पन्ना, पेंच एवं सतपुड़ा में 342 गाइड यह कार्य संपन्न कर रहे हैं।
प्रकृति की सही व्याख्या, जिसमें संवादपटुता और व्यवहारिक कला हो, आगंतुक को समझाने
के लिये आवश्यक है। गाइड ही प्रकृति और पर्यटक के मध्य महत्वपूर्ण कड़ी है। यह
पंजीकृत गाइड पर्यटक को प्रकृति के उन अनन्य अवयवों के बारे में बताते है जिससे
उनकी जिज्ञासा और कौतूहल को विश्राम मिलता है। ईको पर्यटन को सफल बनाने के लिये
प्रकृति की इस व्याख्या का परिमार्जन अत्यन्त आवश्यक है। इसी उद्देश्य से बोर्ड
द्वारा विगत दो वर्षों से गाइड को आकर्षक वदीर्, जूते, पिठ्ठू बैग जिसमें वन के
अवयवों की प्राथमिक जानकारी वाले ब्रोशर और पुस्तकें होती हैं, दिया जाता है।
इस वर्ष बोर्ड द्वारा वर्षा ऋतु में पार्क बंद होने के समय सभी गाइडों के लिये
विशिष्ट प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह आयोजन दो चरणों में किया गया। प्रथम चरण में
सतपुड़ा, कान्हा और बांधवगढ़ में गाइडों को प्रशिक्षित किया गया। द्वितीय चरण में
सितम्बर माह में चार दिवसीय आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में सतपुड़ा में 73,
कान्हा में पेंच सहित कुल 154 और बांधवगढ़ में पन्ना सहित 88 गाइडों ने प्रशिक्षण
प्राप्त किया।
प्रशिक्षण कार्य में गाइडों के लिये एक सचित्र रंगीन किताब तैयार की गई है जिसमें
श्री एप़ी ़द्विवेदी द्वारा 89 वृक्ष, औषधीय पौधे, वन्य प्राणी और पक्षियों का
वर्णन दिया गया है। एक सरल गाइड मैनुअल 'जंगल की कहानी, गाइड की जुबानी' मुख्य वन
संरक्षक, श्री सुहास कुमार के सहयोग से तैयार किया गया है जिसमें गाइड द्वारा
प्रकृति के सभी घटकों का वर्णन कैसे किया जायेगा, यह दर्शाया गया है। भूमि पर बाघ
के पंजों के निशान या वृक्ष की छाल पर खरोंच के निशान द्वारा वन्य प्राणी की
उपस्थिति कैसे पहचान की जाये, इसका वर्णन गाइड द्वारा रोचक ढंग से पर्यटक को किया
जायेगा।
प्रशिक्षण के लिये सभी गाइडों में काफ़ी उत्साह देखा गया। गाइडों द्वारा
प्रशिक्षकों से जंगल कैसे जीता है, इसका विवरण पूछ-पूछ कर याद किया गया ताकि पर्यटक
को मात्रा बाघ, चीतल और गौर के अतिरिक्त वन संपदा की प्रचुरता और भव्यता का परिचय
पर्यटकों को दे सकें। कान्हा एवं बाधंवगढ़ में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में
क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
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