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  सतना जिले के नौ अधिकारी निर्माण कार्यों में अनियमितता के कारण निलम्बित
Rewa:Monday, September 7, 2009: रीवा संभाग के आयुक्त डॉ. रीवन्द्र पस्तोर ने सतना जिले के नौ अधिकारियों को निर्माण कार्यों में अनियमितता के कारण निलंबित करने के आदेश दिये हैं। इनमें नागौंद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के अलावा जिले के दो सहायक यंत्री और 6 उप यंत्री शामिल हैं।
नागौद जनपद पंचायत के सी.ई.ओ. श्री ओ.पी. अस्थाना, सहायक यंत्री श्री टी.एन पाण्डे, उपयंत्री श्री ए.के. गुप्ता और श्री बी.के. रिछारिया को त्रिमूर्ति जलद महाविद्यालय नागौद के खेल मैदान के निर्माण में भारी अनियमितता बरतने के कारण तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है।
इसी तरह रामपुर बघेलान के सहायक यंत्री श्री आर.ए सिंह, उप यंत्री श्री के.के. मिश्रा, उप यंत्री श्री ओ.पी. मिश्रा, तत्कालीन सहायक यंत्री एवं वर्तमान में जनपद पंचायत मझगवां में उपयंत्री श्री विनोद कुमार शुक्ला और रामपुर बघेलान में उपयंत्री श्री वी.एल. गुप्ता को हिनौती-पीथेपुर मार्ग निर्माण की गड़बड़ी पाये जाने के कारण तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है।

  प्रदेश में किसानों के हाल बेहाल, हर साढ़े तीन घंटे में एक किसान करता है आत्महत्या किसान हितैषी सरकार सिर्फ कागजों पर- केक़े मिश्रा
भोपाल, 7 सितम्बर। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता केक़े मिश्रा ने प्रदेश में किसानों की दुर्दशा के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मुख्यमंत्री द्वारा मंच से किसानों के हित में की गई घोषणाओं को राजनैतिक ठगी बताया है। 
आज यहां जारी अपने बयान में मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में किसानों को 50 हजार रूपयाें की कर्ज माफी सहित मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में जो घोषणाएं अब तक की हैं, उन पर जरा भी अमल नहीं हो सका है। मध्यप्रदेश में किसानों ने कर्ज, सूखा और फसल नष्ट हो जाने की वजह से सबसे ज्यादा आत्महत्या की हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अब तक 29302 क़िसानों ने आत्महत्याएं की हैं। आत्महत्या की स्थिति यह है कि वर्ष 2005 में 334 घंटे में, वर्ष 2006 में 331 घंटे में और 2007 में 329 घंटे में एक किसान ने आत्महत्या की है। इन आंकड़ों को लेकर सरकार के मुखिया, जिम्मेदार मंत्री और असफर खामोश क्यों हैं ?
उन्होंने कहा कि विडम्बना तो यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किसानों को लेकर जहां मंच से की गई घोषणाएं काफुर हो जाती हैं, वहीं सरकारी तंत्र किसानों को ठग रहा है। लिहाजा, सरकार स्पष्ट करे कि प्रदेश में किसानों की बद से बदतर स्थिति का जिम्मेदार कौन है ? किसानों के लिए बनाई गई केन्द्र और राज्य की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन क्यों नहीं हो पा रहा है ? किसानों को कृषि उपकरण, सरकारी सबसिडके बाद भी बाजार मूल्य से महंगे क्यों मिल रहे हैं ? किसानों के लिए सरकार के साथ-साथ प्रमुख विभाग मिलकर लगभग 24 योजनाएं चला रहे हैं, धरातल पर इन योजनाओं की स्थिति क्या है, इन्हें लेकर सरकार श्वेतपत्र जारी करे।

  बुंदेलखण्ड में भी की जाये सांस्कृतिक कला केंद्र की स्थापना- केप्टन जयपाल सिंह
भोपाल, 7 सितम्बर। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री केप्टन जयपाल सिंह ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर बुंदेलखण्ड क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया है। राजधानी भोपाल के भारत भवन की तरह प्रदेश के पांच शहरों ग्वालियर, खण्डवा, उज्जैन, रीवा और जबलपुर में सांस्कृतिक कला केन्द्रों की स्थापना की जा रही है, किन्तु इनमें बुंदेलखण्ड का कोई शहर नहीं है।
      केप्टन ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि संस्कृति और कला के क्षेत्र में बुंदेलखण्ड अत्यंत संपन्न रहा है। खजुराहो न केवल राष्ट्रीय अपितु अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर सदियों से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाता रहा है। रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास बांदा के थे। अमर वीरकथा आल्हा के रचयिता नरपति नाल्ह भी बुंदेलखण्ड के ही हैं। केशवदास, पदमाकर और सेनापति जैसे महाकवियों ने बुंदेलखण्ड में ही जन्म लिया था। अत: राज्य सरकार को चाहिये कि वह बुंदेलखण्ड में भी सांस्कृतिक कला केन्द्र की स्थापना की दिशा में त्वरित कार्रवाई करे।

  फिनेस्टा के रिटेल शॉप अब मप्र में भी
आकर्षक व टिकाऊ खिड़कियां बनाने में कंपनी का जमा सिक्का
इंदौर, 7 सितंबर। भारत के पीवीसी विन्डो निर्माण में सबसे अग्रणी कंपनी, फिनेस्टा बिल्डिंग सिस्टम्स अपने रिटेल बिजनेस का विस्तार करते हुए मध्यप्रदेश में प्रवेश किया है। कंपनीअपनी योजना के अनुसार, ग्राहकों तक पहुंचने के लिये प्रदेश के विभिन्न शहरों में डीलरों द्वारा संचालित कई शोरूम खोलेगी। 
कंपनी ग्राहकों से सीधे तौर पर जुड़नाचाहती है। इसलिये कई शहरों में डीलरों का नेटवर्क फैलाया जा रहा है। कंपनी ने हाल ही में इंदौर, भोपाल और रायपुर में अपने डीलरों को नियुक्त किया है। ये सभी डीलर शीघ्र ही प्रदर्शनी काउंटर खोलेंगे। जहां पर फिनेस्टा विन्डो के सभी उत्पादों का प्रदर्शन किया जायेगा। 
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि कई शहरों जैसे मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, नासिक, नागपुर, औरंगाबाद, अलीबाग, लोनावाला, भोपाल, लुधियाना, जम्मू जालंधर, मंगलौर, बंगलुरू, मैसूर, बेलगाम, शिमोरा, विजयवाड़ा, तंजौर, वेल्लूर तिरुनेवेल्ली, बड़ौदा सूरत, अहमदाबाद, राजकोट, काटनपुर, लखनऊ, बुलंदशहर और कोलकाता में नेटवर्क का जाल बिछाया है। इस साल के अंत तक आशा है कि कंपनी देश के 50 शहरों मेंअपनी पहुंच बना लेगी। 
इसके अलावा  फिनेस्टा बाजार के अन्य कंपनियों से समझौता करने जा रही है। ये सभी कंपनियां मकान में सुविधाएं प्रदान करने के लिये अपने तमाम उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचा रही है। 
पिछले पांच सालों मेंकंपनी ने बड़े बिल्डर्स, आर्किटेक्ट्स और इंटिरीयर डिजायनर्स के बीच में अपनी साख जमायी  है अब तक कंपनी करीब च ार लाख विन्डोस ग्राहकों को बेच चुकी है। फिनेस्टा के रिटेल मार्केट में आने के बाद लोगों में इसकी पहुंच और स्वीकार्यता आसान हुई है। 
संदीप माथुर, बिजनेस हेड, फिनेस्टा बिल्डिंग सिस्टम्स ने कहा मकानों में आकर्षक और टिकाऊ खिड़कियां लगाना एक प्रकार से नया विचार है। मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में आउटलेट्स खोलकर कंपनी अपने यूपीवीसी ब्रांड को घरों तक पहुंचायेगी। ये सभी खिड़कियां मध्यप्रदेश की जलवायु को ध्यान में रखकर बनायी गई है। जो कि भारी बरसात तेज और धूल भरी आंधियों को आसानी से झेल सकती है। 
400 से 700 रुपये प्रति वर्गफईट की कीमतों पर उपलब्ध-फिनेस्टा विन्डोस कई प्रकार के सुविधाएं ग्राहकों  को उपलब्ध करा रही है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार इन विन्डोस की कई विशेषताएं हैं जैसे कि धूल और ध्वनि प्रदूषण मुक्त कमरे  के अंदर प्रकाश की पहुंच को बढ़ाना, वातावरण की स्वच्छ हवा को अंदर आने और जाने में सहायक, कम मेन्टिनेंस और ज्यादा समय तक चलना और सबसे बड़ी बात उर्जा की खपत कम करना फिलहाल कंपनी का ध्यान मजबूत नेटवर्क तैयार करने में है जिससे ग्राहकों की समस्याओं को कम से कम समय में दूर किया जा सके। 
पांच अन्य जगहों पर इन्हें आकर्षक रूप प्रदान किया  जाता है ये जगहें हैं- भिवंडी, मुंबई, बंगलुरू, चेन्नई और हैदराबाद। कंपनी का ग्रीनर आस्ट्रिया के साथ तकनीकी रुप से साझेदारी है इस कंपनी के तकनीक का भारत के जलवायु के अनुसार पीवीसी खिड़कियों का डिजायन किया गया है।

  म्याना में 9 सितम्बर को, स्वच्छता विरुद्ध कीटाणु टीम के मध्य फुटवाल मैच राज्यमंत्री श्री अग्रवाल शामिल होंगे
जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर म्याना कस्बे में जिला स्तरीय स्वच्छता सम्मेलन का आयोजन बुधवार 9 सितम्बर को होगा। समग्र स्वच्छता अभियान अन्तर्गत स्वच्छता सम्मेलन में विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के साथ प्रमुख रुप से स्वच्छता विरुद्ध कीटाणु टीमों के मध्य एक फुटबाल मैच भी खेला जायेगा। स्वच्छता टीम का नेतृत्व प्रदेश के सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास एवं विमानन राज्यमंत्री श्री के.एल. अग्रवाल करेंगे। सम्मेलन के मुख्य अतिथि श्री अग्रवाल द्वारा कार्यक्रम में मोबाईल यूनिट एप्रोच संदेश वाहन को हरी झण्डी भी दिखाई जायेगी।
समग्र स्वच्छता अभियान के प्रभारी श्री आर.के. मिश्रा ने बताया कि जिला स्तरीय सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ग्रामीणों की भागीदारी होगी। जिले में स्वच्छता के प्रति जनजागरुकता लाने और गांवों को निर्मल बनाने के लिये एक नई एप्रोच के साथ काम करने की शुरुआत होगी। जिले में पहली बार मोबाईल यूनिट एप्रोच को अपनाया जाकर गांव और स्कूलों में स्वच्छता के प्रति नया माहौल निर्मित किया जायेगा। स्कूली बच्चों को खेल के माध्यम से स्वच्छ रहने और स्वच्छता के लिये उनके व्यवहार में परिवर्तन की सीख दी जायेगी।
यूनीसेफ के सहयोग से कार्य करने वाली सामाजिक संस्था इनर्जी इन्वायरमेंट डव्हलपमेंट सोसायटी के संचालक श्री अजीत सक्सेना ने बताया कि सम्मेलन में मुख्य अतिथि द्वारा जादुई छड़ी का लोकार्पण भी किया जायेगा। संस्था द्वारा तैयार की गई इस जादुई छड़ी के माध्यम से राज मिस्त्रियों को शौचालय निर्माण की सम्पूर्ण तकनीकी जानकारी से मिल सकेगी। मोबाईल यूनिट गांव-गांव जाकर स्वच्छता का संदेश और प्रशिक्षण देने की कार्रवाईयां भी की जायेंगी

  बी.टी. कॉटन की किस्मों पर निगरानी रखी जायेगी
भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की जेनेटिक इन्जीनियरिंग एप्रूव्हल कमेटी (जी.ई.ए.सी.) द्वारा स्वीकृत/अनुमोदित बीटी कॉटन हायब्रिड/किस्मों के प्रदेश में विक्रय पर राज्य शासन द्वारा सतत निगाह रखी जा रही है।
प्रदेश में विक्रय के लिए जीईएसी द्वारा निर्धारित शर्तें इस प्रकार है- जी.ई.ए.सी. का विभिन्न कम्पनियों के विभिन्न संकर व्यावसायिक रिलीज हेतु जारी पत्र की प्रमाणित प्रति. जी.ई.ए.सी. द्वारा निर्धारित अवधि के लिए अनुमति मान्य होगी। प्रत्येक बीटी कॉटन के खेत के चारों ओर उसी किस्म से नान बीटी कॉटन की बुवाई की जावे,जिसे रिफयूजिया कहते है। रिफयूजी बेल्ट का आकार कम से कम 5 पंक्तियों अथवा कुल क्षेत्र का 20 प्रतिशत जो भी अधिक हो, क्षेत्र में बुवाई की जावे, वह सुविधा उपलब्ध कराई जावे कि प्रत्येक अनुशंसित किस्म के बीज के साथ ही उसी किस्म के नान से वीटी कॉटन के बीज की उपयुक्त मात्रा रखी जाये, जो रिफयूजिया की बुवाई के लिये पर्याप्त हो, प्रत्येक पैकेट पर लेबल हो जिसमें बीटी कॉटन की किस्म का पूर्ण विवरण मय ट्रान्सजीन के दिया गया है। जो भौतिक व अनुवांशिक रूप से जीईएसी द्वारा अनुशंसित बीज की शुद्धता, पैकेट पर बुवाई की विधि कीट प्रबंधन जलवायु क्षेत्र हेतु अनुकूलता आदि के उपयोग के संबंध में स्थानीय भाषा में पूर्ण विवरण दिया जावे, कंपनी अपने वितरकों से अनुबंध करेगी जो उनसे उनकी विशेष माँग की पूर्ति बीज की मात्रा क्षेत्राच्छादन एवं राज्य/क्षेत्र के अंतर्गत उगाई जाने वाली बीटी कॉटन की किस्म के संबंध में होगा।
कंपनी प्रत्येक वर्ष के अंत में 31 मार्च को बीटी कॉटन का वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करेगी जिसमें डीलर्स क्षेत्राच्छादन क्षेत्र (राज्य/जिला) होगा और उस प्रतिवेदन को जीईएसी को प्रस्तुत करेगी। कंपनी बीटी काटन आधारित एकीकृत जीवनाशी प्रबंधन कार्यक्रम तैयार करेगी एवं इसकी जानकारी पैकेट के साथ उपलब्ध करायेगी। कंपनी प्रत्येक वर्ष बालवर्म की बीटी कॉटन पर एवं बैस लाईन फसल पर तुलनात्मक ग्राहिता व प्रतिरोधात्मक क्षमता का मूल्यांकन करेगी एवं प्रतिवेदन जीईएसी को भेजेगी।

  

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