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  रामकृष्ण मिशन को महाराजा अग्रसेन, विद्या भारती को महर्षि वेदव्यास रवि को लता मंगेशकर एवं गुलशन बावरा को किशोर सम्मान
संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा द्वारा घोषणा
Bhopal:Friday, September 18, 2009: मध्यप्रदेश शासन द्वारा सामाजिक सद्भाव, समरसता और श्रेष्ठतम उपलब्धियों के लिए स्थापित महाराजा अग्रसेन राष्ट्रीय सम्मान, शिक्षा के
क्षेत्र में समग्र रचनात्मक अवदान, सृजनात्मकता एवं श्रेष्ठ उपलब्धि के लिए महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान, सुगम संगीत के क्षेत्र में स्थापित राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान एवं निर्देशन,
अभिनय, पटकथा एवं गीत लेखन विधाओं के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान की घोषणा की गयी है। बेल्लूर मठ में स्थापित रामकृष्ण मिशन को वर्ष 2009-10 का
महाराजा अग्रसेन राष्ट्रीय सम्मान, नयी दिल्ली स्थित विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान को इसी वर्ष का महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान, हिन्दी सिनेमा के प्रख्यात संगीतकार श्री
रवि को वर्ष 2008-09 का राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान और स्वर्गीय गुलशन बावरा को वर्ष 2008-09 के राष्ट्रीय किशोर सम्मान से विभूषित किया जायेगा। इन सम्मानों के अन्तर्गत
दो-दो लाख रूपये की आयकर मुक्त राशि, सम्मान पटि्टका, शाल व श्रीफल प्रदान किया जाता है। संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने आज यहां उक्त जानकारी दी।
श्री शर्मा ने बताया कि इस आशय का निर्णय इन सम्मानों के लिए राज्य शासन द्वारा गठित चयन समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मत निर्णय के आधार पर किया। उल्लेखनीय है कि
चयन समिति का निर्णय राज्य शासन के लिए बंधनकारी होता है। महाराजा अग्रसेन राष्ट्रीय सम्मान की चयन समिति में सर्वश्री नारायण प्रसाद गुप्ता, रमेशचन्द्र अग्रवाल, ललित सुरजन,
प्रभात कुमार भट्टाचार्य और राजेन्द्र कोठारी शामिल थे। इस सम्मान से विभूषित होने वाली संस्था रामकृष्ण मिशन वर्ष 1909 से पंजीकृत है और विश्व के अनेक देशों में संस्था की
शाखाएँ शिक्षा, चिकित्सा एवं समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही है। मिशन द्वारा श्री रामकृष्ण परमहंस द्वारा प्रतिपादित तथा उनके जीवन में अवधारित वेदान्त और उसके
सिद्वांतों के अध्ययन का प्रचार-प्रसार एवं सार्थक कार्य किए जा रहे है।
महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान की चयन समिति में सर्वश्री सच्चिदानंद जोशी, प्रो. हीरालाल शुक्ल, श्री जगदीश तोमर, श्री कृष्ण कुमार अष्ठाना एवं राजीव मोहन गुप्त शामिल थे। इस
सम्मान से विभूषित होने वाली संस्था विद्या भारती देश का सबसे बड़ा गैर शासकीय शैक्षिक संगठन है। लक्ष्यद्वीप और मिजोरम के अलावा सम्पूर्ण भारत में 56 प्रांतीय और क्षेत्रीय
समितियाँ विद्या भारती से सम्बद्ध हैं। संस्थान के अन्तर्गत 13 हजार से अधिक शिक्षण संस्थाओं में लगभग 74 हजार शिक्षकों के मार्गदर्शन में 17 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को शिक्षा
और संस्कार प्रदान किए जाने का महती कार्य किया जा रहा है।
राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान की चयन समिति में सुश्री भावना सोमैया, सर्वश्री नितिन मुकेश, ओम थानवी तथा रवीन्द्र जैन शामिल थे। इस सम्मान से विभूषित होने वाले प्रख्यात
सिने-संगीतकार श्री रवि बीसवीं सदी के छठवें दशक से सक्रिय एक ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने अपने समय का श्रेष्ठ और कालजयी संगीत दिया। उनकी पहली फिल्म एक साल थी जो
1957 में प्रदर्शित हुई थी। उनकी प्रमुख फिल्मों में दिल्ली का ठग, चौदहवीं का चांद, घूंघट, तराना, नजराना, चायना टाउन, आज और कल, गुमराह, काजल, खानदान, वक्त, फूल और
पत्थर, औरत, हमराज, ऑखें, नीलकमल, एक फूल दो माली आदि शामिल हैं।
वर्ष 2008-09 के राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान से विभूषित होने वाले दिवंगत गीतकार स्व. गुलशन बावरा ने उपकार फिल्म के लिए मेरे देश की धरती जैसा यादगार गीत लिखा था।
उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण फिल्मों के लिए मधुर गीत की रचना की जिनमें जंजीर, दुल्हा दुल्हन, विश्वास, जाने-अनजाने, कस्मे वादे, सत्ते पे सत्ता, अगर तुम न होते, पवित्र पापी आदि
फिल्में शामिल हैं। स्व. गुलशन बावरा का हाल ही में निधन हो गया। चयन समिति द्वारा लिए गये निर्णय के समय वे जीवित थे एवं सक्रिय स्वस्थ भी। उनके नाम का यह सम्मान 13
अक्टूबर को खण्डवा में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अंजु मेहता को प्रदान किया जायेगा।

  प्रो सभरवाल कांड से जुड़े अफसरों को मिली थी मलाई
उज्जैन, 18 जून, डॉ अरूण जैन। माधव कॉलेज के चर्चित प्रो एचएस सभरवाल हत्याकांड में जुड़े लगभग सभी पुलिस वालों को शासन ने उपकृत कर दिया है। अफसरों ही नहीं जवानों को भी मलाई वाली कुर्सियां दी गई है। संबंधित पुलिस वालों में घटना की एफआईआर दर्ज करने वाले अफसर से लेकर कोर्ट में अपने बयान से पलटने वाले जवान भी शामिल हैं।
26 अगस्त 2006 को छात्र संघ चुनाव के दौरान हुई हिंसा में माधव कॉलेज के प्रो एचएस सभरवाल की मौत हो गई थी। मामले में अभा विद्यार्थी परि6ाद के तत्कालीन प्रांताध्यक्ष शशिरंजन अकेला सहित कुल 6 पदाधिकारियो-कार्यकर्ताओं को आरोपी बनाया गया था। जबकि नागपुर कोर्ट में 67 लोगों के बतौर गवाह बयान दर्ज हुए थे। करीब 35 माह बाद 13 जुलाई 09 को नागपुर की सेशन कोर्ट ने आरोप सिद्ध न होने पर आरोपियों को प्रो सभरवाल की मौत के मामले से बरी कर दिया। मामले का दूसरा पहलू यह है कि इससे जुड़े लगभग सभी पुलिस वाले फैसले के पहले या बाद में मलाईदार पदों पर पहुंचे है। इनमें वे अफसर भी शामिल है जिनके सुरक्षा बंदोबस्त में कमजोरी के कारण हादसा हुआ और वे जवान भी जो सीआईडी को पूर्व में दिए बयान के विपरीत कोर्ट मे पलट गए। जानकारों के मुताबिक शासकीय सेवक के बयान से पलटने पर उस पर विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन सरकार ने इन्हं उपकृत कर दिया। इस पर सभरवाल परिवार ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
किसे क्या मिला
एसपी जयदीप प्रसाद - राजधानी भोपाल एसपी, माधवनगर सीएसपी मनोजसिंह एएसपी पश्चिम इंदौर, एसडीएम मनोज पुष्प एसडीएम इंदौर, देवास गेट टीआई य6ावंत रूनवाल इंदौर में पदस्थ, नीलगंगा टीआई व्हायपी सिंह पूर्व में इंदौर अब खंडवा में पदस्थ।
ज्वान - दारासिंह चावड़ा आरटीओ खवासा (सिवनी), इंद्रविक्रमसिंह (बंटी) आरटीओ सिकंदरा बैरियर पर तैनात। दिलीप त्रिपाठी आरटीओ में पोस्टिंग, फिलहाल उज्जैन से रिलीव नहीं।

  वन विभाग द्वारा इस वर्ष पौध रोपण में बांस को प्राथमिकता
वन रोपणियों से प्रथम आवे, प्रथम पावे के आधार पर पौध वितरण
Bhopal:Friday, September 18, 2009: वन विभाग द्वारा इस वर्षा ऋतु में वन समितियों के माध्यम से बांस रोपण के विशेष प्रयास किये गये है। वन अनुसंधान और विस्तार
की रोपणियों में तैयार किये गये पौध प्रथम आवे, प्रथम पावें के आधार पर जन साधारण विशेषकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराये जा रहें है।
उल्लेखनीय है कि ग्रीन गोल्ड के रूप में विख्यात बांस सबसे तेजी से बढ़ने वाला तथा उत्पादकता देने वाला वृक्ष है। प्रदेश की वन समितियों द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में सदस्यों के माध्यम
से बांस के पौधे तथा राइजोम के रोपण का कार्य किया जा रहा है। वन समितियों द्वारा मांगे जाने पर पांच रूपये प्रति पौधे की दर से बांस के पौधे तथा एक रूपये प्रति राइजोम की दर
से रोपण योग्य राइजोम वन अनुसंधान रोपणियों में उपलब्ध कराये जा रहे है।
प्रदेश के शिक्षण संस्थानों तथा शासकीय विभागों को न लाभ न हानि के आधार पर निर्धारित दर पर पौधे उपलब्ध करायें जा रहे है। इस वर्ष भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अधीन
संस्थानों के पास उपलब्ध स्थलों पर रोपण का कार्य पर्यावरण वानिकी के तहत करने का प्रावधान रखा गया है। इसके लिये संबंधित संस्थान के नियत्रणकर्ता अधिकारी को इन पौधो के
रोपण तथा सुरक्षा के दायित्व का वचन पत्रा देना होगा।

  पुरातत्व राष्ट्रीय डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर सम्मान वर्ष 2008-09 का प्रो. बी.बी. लाल को दिया जाएगा
संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा द्वारा घोषणा
Bhopal:Friday, September 18, 2009: संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि पुरातत्व के सरंक्षण एवं पुरातात्विक संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीयस्तर की उत्कृष्ट प्रतिभा
को सम्मानित और प्रोत्साहित करने के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान वर्ष 2008-09 के लिए दिल्ली के सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् प्रो. बी.बी.
लाल को देने का निर्णय लिया गया है। सम्मान के अन्तर्गत 2 लाख रुपये की नगद राशि एवं प्रशस्तिपत्र दिया जाएगा।
सम्मान के चयन के लिए राज्य शासन द्वारा राष्ट्रीय स्तर के सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् गोरखपुर के प्रो. डी.एन. त्रिपाठी, नई दिल्ली के प्रो.आर.सी.अग्रवाल और नई दिल्ली के डॉ. बी.आर. मणि
की चयन समिति गठित की गई थी। चयन समिति ने वर्ष 2008-09 का सम्मान प्रो. बी.बी. लाल को देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है।
प्रो.लाल ने पुरातत्व, प्राच्यविधा एवं भारतीय संस्कृति तथा पराम्परा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रो. लाल को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रो. बी.बी. लाल का जन्म
1921 में झाँसी (उत्तरप्रदेश) में हुआ। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक रह चुके प्रो. बी.बी. लाल द्वारा पुरातत्वीय शोध एवं सर्वेक्षण के क्षेत्र में अब तक अनेक पुस्तकों का लेखन
किया गया है। इनमें शिशुपाल गढ़ 1948:एन अर्ली हिस्टोरिकल फोर्ट इन ईस्टर्न इण्डिया, बीरभानपुरःमाइक्रोलिथिक साइट इन द दामोदर वैली, इण्डियन आर्कियॉलाजी सिन्स् इडिपेडेन्स्, द
आर्लिएस्ट सिविलाइजेशन ऑफ साउथ एशिया आदि पुस्तकें शामिल है। अनेक विशिष्ट पत्र-पत्रिकाओं में आपके गहरे विश्लेषाणात्मक शोध पत्र भी प्रकाशित हुए हैं।

  राष्ट्रीय चित्रांकन कार्यशाला अच्छा प्रयास-लक्ष्मीकांत शर्मा
Bhopal:Friday, September 18, 2009: संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने आज यहां भारतीय स्वाधीनता संग्राम पर केन्द्रित आठ दिवसीय राष्ट्रीय चित्रांकन
कार्यशाला का स्वराज वीथि भोपाल में समापन किया। श्री शर्मा ने कहा कि इस तरह की कार्यशाला से चित्रकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कार्यशाला
में बनाये गये चित्रों को सराहनीय बताया।
स्वराज संस्थान संचालनालय द्वारा आयोजित भारतीय स्वाधीनता संग्राम पर केन्द्रित राष्ट्रीय चित्रांकन कार्यशाला में भुवनेश्वर से आए मानस रंजन जैना द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई और बख्शी
जगबंधु, ग्वालियर के एम.एम. कानाडे द्वारा महादेव विनायक रानडे एवं जतीन्द्रनाथ दास, दिल्ली के भुनेश्वर भास्कर द्वारा धर्मन बाई- कर्मन बाई, जम्मू के कमलेश गांधी द्वारा श्याम कृष्ण
वर्मा और 1857 घटना, पटना के मिलन दास द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई और महात्मा गांधी, ग्वालियर के नितिन योगी द्वारा राज बिहारी बोस और वासुदेव चापेकर, औरंगाबाद के दिलीप डी.
बडे द्वारा महारानी लक्ष्मी बाई और अवंतिकाबाई गोखले, इंदौर के बृजमोहन आर्य द्वारा राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, नालिनी बागची, भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू, गाजीपुर के पंकज कुमार शर्मा
द्वारा सुचेता कृपलानी और जुगलकिशोर दत्त के पोर्ट्रेट बनाये गये।
भोपाल से शामिल हुए युवा चित्रकार हेमंत राव, अमित सोनी, वाणी जैन, वंदना शर्मा, धीरेन्द्र रोहित द्वारा महावीर सिंह, सआदत खॉ, लाला हरदयाल, बारीन्द्र घोष, गजानन सदाशिव
पोतदार, चितरंजन दास, ठक्कर बप्पा, शालिगराम शुक्ल, चन्द्रशेखर आजाद, अवंति बाई, रवीन्द्र नाथ टैगोर, हंसा मेहता के रंगीन पोर्ट्रेट वर्कशॉप में तैयार किये गये।
चित्रांकन कार्यशाला की एक विशेषता यह भी रही है कि जहॉ शिरकत कर रहे चित्रकारों द्वारा नवीन चित्रों को चित्रांकित किया जा रहा था वहीं दर्शकों को पूर्व में आयोजित चित्रांकन
कार्यशाला में तैयार चित्रों की प्रदर्शनी को निहारने का अवसर भी मिला। आठ दिवसीय चित्रांकन कार्यशाला में प्रतिदिन ही चित्रकला में रूचि रखने वाले सैकड़ों छात्र एवं दर्शकों का जमावड़ा
बना रहा तथा चित्रकला की नवीनतम विधा को सीखने और समझने की समझ भी विकसित हुई। चित्रांकन कार्यशाला में तैयार चित्रों की प्रदर्शनी शीघ्र ही आयोजित की जायेगी।

  मोगली बाल उत्सव पेंच अभ्यारण्य में एक से तीन नवम्बर तक
Bhopal:Friday, September 18, 2009: मोगली बाल उत्सव का राज्य स्तरीय आयोजन एक से तीन नवंबर तक सिवनी जिले के पेंच अभ्यारण्य में होगा। आयोजन में जिला
स्तरीय प्रतियोगिता के आधार पर प्रत्येक जिले से प्रथम स्थान प्राप्त कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग से एक-एक छात्र-छात्रा (कुल चार) का चयन किया जायेगा। सिवनी जिले के दल में 16 विद्यार्थी
भाग ले सकेंगे। जिसमें कनिष्ठ व वरिष्ठ प्रत्येक वर्ग से 4-4 छात्र-छात्राएं भाग लेंगे। ये सभी चयनित छात्र पेंच अभ्यारण्य में होने वाले राज्य स्तरीय मोगली उत्सव में सहभागिता करेंगे।
जिले से आने वाले दल में छात्र-छात्राओं के साथ एक महिला शिक्षिका ही रहेगी, इसमें कोई छूट नही रहेगी। महिला शिक्षिका जिसका चयन संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किया
जायेगा। शासन ने संभागीय संयुक्त संचालकों व डीईओ को ऐसे प्रतियोगी छात्र या छात्रा व महिला शिक्षिका का चयन न करने के निर्देश दिये हैं, जो पूर्व में किसी भी राज्य स्तरीय
मोगली उत्सव में सम्मिलित हो चुके हैं। मोगली बाल उत्सव में भाग लेने का खर्च शासन द्वारा वहन किया जायेगा।
शासन ने संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है कि चयनित छात्र एवं छात्रा मोगली उत्सव में आवश्यक रूप से शामिल हो। यदि अपरिहार्य स्थिति में
कोई छात्र या छात्रा सम्मिलित होने में असमर्थ है तो डीईओ द्वारा जिला कलेक्टर की अनुमति से द्वितीय स्थान प्राप्त छात्र या छात्रा को मोगली उत्सव में अनिवार्यत: सम्मिलित कराने को
कहा गया है। शासन ने जिलों के दलों को मोगली उत्सव प्रारंभ होने के एक दिन पूर्व 31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक निर्धारित स्थल पर पहुँचने को कहा है। बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी
और बालाघाट जिले के दल उत्कृष्ट विद्यालय सिवनी में तथा शेष सभी 46 जिलों के दल जबलपुर स्थित उत्कृष्ट विद्यालय में एकत्रित होंगे। जहां से उन्हें पेंच अभ्यारण्य पहुँचाने की
व्यवस्था की जायेगी। पेंच से ये दल 4 नवंबर को सबेरे 8 बजे सिवनी-जबलपुर हेतु रवाना होंगे।
विद्यार्थियों को पर्यावरण विज्ञान के साथ प्रदेश की भौगोलिक विशेषताओं आदि के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने की दृष्टि से आयोजित होने वाले मोगली उत्सव में चयन हेतु त्रिस्तरीय
प्रतियोगिताएं आयोजित की जायेगी। गत 12 सितम्बर को शाला स्तर पर कनिष्ठ व वरिष्ठ वर्ग की निबंध प्रतियोगिता हो चुकी है। जन शिक्षा केन्द्र स्तर पर कनिष्ठ वर्ग के लिए 19
सितम्बर को प्रतियोगिता होगी। दोनों वर्ग की लिखित प्रश्न पत्र प्रतियोगिता विकासखण्ड स्तर पर 10 अक्टूबर को होगी। इसी तरह जिला स्तर पर दोनों वर्गों की प्रश्न मंच प्रतियोगिता 25
अक्टूबर को होगी।

  इस बार कार्यस्थल पर स्वस्थ रहकर मनाएं विश्व हृदय दिवस
इंदौर, 18 सितम्बर, 2009: हृदय रोग दुनिया भर में मौत का सबसे प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार वर्ष 2015 तक, कार्डियोकस्कुलर रोगों से 2 करोड़ लोग मर जाएंगे जिनमें हृदय रोग और आघात के सबसे ज्यादा शिकार होंगे। स्वस्थ आहार और बुद्धिमत्तापूर्ण जीवन शैली के जरिए हृदय रोग और आघात के जरिए होने वाली कम से कम 80 प्रतिशत समय से पहले मौतों को रोका जा सकता है। हर साल जिंदगी के लाखों वर्ष बेकार हो जाते हैं जो खासतौर पर वर्तमान वित्तीय संकट के दौर में, बेहद स्वतंत्र वैश्विक प्रणाली के स्थायित्व के लिए गंभीर खतरा है।
दुनिया भर में बिजनेस के साथ साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व आर्थिक मंच जैसे अग्रणी संगठन बिजनेस के प्रमुख लक्ष्य हासिल करने के लिए अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य का महत्त्व समझते हैं। इसीलिए विश्व हृदय दिवस 2009 मनाया जा रहा है जो हर किसी के लिए ''हृदय के साथ काम'' के महत्त्व को रेखांकित करता है। यह आपको छोटे- छोटे बदलाव करने के उत्साहित करता है जो परस्पर मिलकर अच्छे स्वास्थ्य और उत्पादकता जैसे बडे बदलाव करूप में परिणाम देंगे। दुनिया भर के लोगों को यह सूचना देने के लिए विश्व हृदय दिवस सृजित किया गया कि हृदय रोग और आघात दुनिया भर में मृत्यु के सबसे बड़े कारण हैं और हर साल इनसे 1 करोड़ 72 लाख लोग मर जाते हैं। यह 27 सितम्बर, 2009 रविवार को मनाया जाएगा। 
जो लोग जीर्ण रोगों का शिकार होते हैं उनमें से लगभग आधे अपने उत्पादक सालों में होते हैं। उत्पादकता में कमी और इन रोगों के कारण श्रमशक्ति में लागत बढ़ने के परिणाम बेहद नाटकीय होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2005-2015 के बीच आमदनी में चीन में 558 अरब अमरीकी डालर, भारत में 237 अरब अमरीकी डालर, रूस में 303 अरब अमरीकी डालर और ब्रिटेन में 33 अरब अमरीकी डालर की हानि हो जाएगी।
ब्राजील, चीन, रूस और भारत में फिलहाल जीर्ण रोगों के कारण हर साल 2 करोड़ से अधिक उत्पादक जीवन वर्षों का नुकसान होता है और 2030 तक यह 65 प्रतिशत बढ़ने की आशंका है। इन रोगों से संबंधित उत्पादकता के नुकसान में अपंगता, अनियोजित अनुपस्थिति और बढ़ती दुर्घटनाएं शामिल हैं तथा ये उपचार की लागत से 400 प्रतिशत अधिक बैठते हैं।
सीएचएल अपोलो अस्पताल और गोकुलदास अस्पताल, इंदौर के चौइतराम अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ इंटरवेंसनल कार्डियोलोजिस्ट डॉ ग़िरीश कावथेकर कहते हैं, '' ज्यादातर लोग चलने फिरने के अपने करीब 60 प्रतिशत घंटे काम पर खर्च करते हैं, इसलिए समग्र रूप से अच्छा रहने के लिए कार्यस्थल पर स्वस्थ रहने का विकल्प बहुत महत्वपूर्ण है।
सामाजिक लाभ का आनंद : अपने सहकर्मी के साथ किसी क्लब या मनोरंजन केंद्र में किसी सामूहिक कार्य में भागीदारी एक अच्छा अवसर होता है जबकि आप अपनी सामान्य टीम से हट कर लोगों से मिलते हैं और इस तरह आपके दोस्तों का नेटवर्क भी बड़ा होता है। स्वस्थ अनुभव करना और नए कौ8ालों का विकास करने से आपका आत्मवि8वास बढ़ता है। इस तरह आप महसूस करते हैं कि जिन्दगी पर आपका बेहतर नियंत्रण है।
आर्थिक लाभ : स्वस्थ कार्यबल से किसी व्यवसाय को कई लाभ हो सकते हैं - आर्थिक मंदी के दौरान भी। लाभों का विवरण नीचे दिया गया है :
अधिक उत्पादन
अनुपस्थिति की दर में कमी-20 प्रति8ात तक कम दिन बरबाद होते हैं
चिकित्सा व्यय में कमी (नियोक्ता एवं कार्मिक दोनों के लिए)
कार्य स्थान पर कम जोखिम
एक सकारात्मक कॉर्पोरेट छवि
उन्नत आत्मबल एवं नि6ठा
अधिक संख्या में कार्मिक संगठन में बने रहते हैं
कार्य स्थान एवं उसके आसपास ारीरिक गतिविधियों एवं स्वास्थ्यकर आहार को बढ़ावा देने तथा धूम्रपान एवं तम्बाकू के अन्य उपयोगों को हतोत्साहित करना एक आसान काम हो सकता है जिस पर खर्च भी अधिक नहीं है।  
कार्य स्थान पर बेहतर स्वास्थ्य के सटीक कुछ नुस्खे:
सही आहार - दिन में न्यूनतम 5 बार फल एवं सब्जियां का सेवन करें। कैंटीन के लिए 'स्वास्थ्यकर मेन्यू' तैयार करें या घर से भोजन लाएं।
कम नमक खाएं और प्रॉसेस्ड फूड से परहेज करें : दिन में लगभग 1 छोटा चम्मच नमक ही लें। प्रॉसेस्ड फूड से परहेज करें क्योंकि इनमें अधिकां में नमक की अधिक मात्रा होती है। कम नमक के सेवन के साथ यदि वजन घट जाए तो रक्तचाप कम होने की संभावना रहती है। उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का सबसे बड़ा खतरा माना जाता है और स्ट्रोक समेत दिल की सभी बीमारियों में लगभग आधे की जड़ में उच्च रक्तचाप होता है।
डेस्क से उठकर टहलना बहुत बुरा नहीं है - महज 30 मिनट की ारीरिक गतिविधि से हृदयाघात और स्ट्रोक की रोकथाम संभव है। इसका आपके काम पर भी अच्छा असर पड़ेगा। दिन में आप बेाक बेहद व्यस्त हों लंच के लिए अव8य बाहर जाएं या रसोई या कैफेटेरिया में फुर्सत के कुछ पल बिताएं। ई-मेल पर आंख गड़ाए रखने से अधिक भोजन पर ध्यान देने से आपको अधिक संतो मिलेगा। आपके ारीर में नई ऊर्जा का संचार हो जाएगा। इतना ही नहीं, आपका कार्य स्थान भी साफ-सुथरा रहेगा। सीढ़ियों से ऊपर नीचे जाएं, ब्रेक के समय टहलें, या एक-दो स्टॉप पहले बस से उतर कर घर पैदल पहुंच जाएं।
खतरों से सावधान - किसी चिकित्सक के पास जाकर अपना रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और ग्लूकोज़ लेवल जंचवा लें। साथ ही, कमर से कूल्हे का अनुपात और बॉडी मास इंडेक्स भी जंचवा लें। आप यदि स्वास्थ्य संबंधी खतरों से अवगत हैं तो स्वास्थ्य सुधार के लिए वि86ा योजना बना सकते हैं।
एक अंतराल पर पानी पीएं, कॉफी नहीं - दैनिक कार्य के दौरान मानव 7ारीर से लगभग 10 कप पानी निकल जाता है जिसकी भरपाई आव8यक है। इसलिए एएचए प्रतिदिन 6 से 8 ग्लास पानी पीने की सलाह देता है ताकि आपके 7ारीर में पानी की उचित मात्रा बनी रहे।
तम्बाकू से तौबा कर लें : इससे साल भर के अंदर दिल की धमनियों की बीमारियां का खतरा आधा रह जाएगा और कालांतर में सामान्य स्तर पर आ जाएगा।
बेहतर जीवन के लिए हंसिए -तनाव को न्यूनतम रखना स्वस्थ एवं तंदुरुस्त रहने के लिए जरूरी है, और हंसना सबसे अच्छी दवा है। इसलिए सहकर्मियों के बीच चुटकुले सुनिए-सुनाइये - वह सब कीजिए जिससे डेडलाइन का तनाव हल्का हो।
  

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