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महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना जरूरी -सुश्री रीना रे
प्रशासन अकादमी में 'महिला एवं सुरक्षा' विषय पर कार्यशाला आयोजन
Bhopal:Monday, March 8, 2010: अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज यहाँ आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के म.प्र. महिला संसाधन केन्द्र द्वारा 'महिला एवं सुरक्षा' विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुये दिल्ली सरकार की संस्कृति सचिव तथा संचालक दिल्ली पर्यटन निगम सुश्री रीना रे ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा कोई बहस का मुद्दा नहीं है। अत: महिलाओं को जन्म से ही सुरक्षा प्रदान करने की जरूरत है। इसके लिये महिलाओं एवं पुरूषों दोनों को संवेदनशील बनाने की जरूरत है, तभी लड़का और लड़की के जन्म में होने वाला भेदभाव कुछ हद तक रूक पायेगा। जिससे भारत में पुरूष एवं महिलाओं के लिंगानुपात के अंतर में कमी लायी जा सकेगी। सुश्री रे ने बताया कि भारत में लड़कियों को बचपन से ही 'चुप' रहने की शिक्षा दी जाती है, जिसके कारण वे चाहकर भी अपनी रक्षा हेतु आक्रामक नहीं हो पाती है। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को निर्धारित कायदे-कानूनों के अंतर्गत महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिये।
प्रारंभ में प्रशासन अकादमी महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत विचारों से महिलाओं के सशक्तिकरण एवं सुरक्षा के संबंध में सार्थक परिणाम प्राप्त होंगे। महानिरीक्षक पुलिस सुश्री अनुराधा शंकर ने कार्यशाला को संबोधित करते हुये कहा कि भारत ही नही वरन् विश्व के अन्य देशों के समाजों में महिलाओं के संबंध में अपराध विद्यमान हैं। भारत में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में मध्यम श्रेणी के परिवारों में जेण्डर (लिंग) भेदभाव ज्यादा है जबकि आदिम जातियों में यह सबसे कम है। बड़े शहरों में महिला भ्रूणों की हत्या ज्यादा होती है जबकि आदिम जाति परिवारों में महिला भ्रूण की हत्या नहीं होती है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं के यौन शोषण का प्रतिशत अधिक है। साम्प्रदायिक दंगों में सबसे अधिक टारगेट महिलाओं को बनाया जाता है। रोजगार के अवसरों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण भी उन्हें सुरक्षा की जरूरत पड़ती है। भारतीय दण्ड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की गई है। शासकीय अधिकारी इन्हीं कानूनी प्रावधानों के अनुसार महिलाओं को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
संभागायुक्त रीवा संभाग श्री रवीन्द्र पस्तोर ने अपने संबोधन में कहा कि म.प्र. में अभी भी 72 प्रतिशत जनसंख्या खेती पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादित वस्तुओं का स्थानीय बाजार कम है जबकि शहरों में बाजार अधिक है। महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने गाँव में वस्तुओं का उत्पादन किया जाना आवश्यक है। म.प्र. में ग्रामीण महिलाओं सहित अन्य लोगों को स्वावलम्बी बनाने 24 कार्यक्रम आजीविका से संबंधित संचालित हैं। गाँवों में उत्पादित वस्तुओं को बाजार उपलब्ध करानें गतिविधि आधारित फेडरेशन का गठन किया गया है। जो विभिन्न स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित सामग्री की मार्केटिंग में सहायता करता है।
कार्यशाला को इंडियन रेलवे रिसर्च की विशेष कार्य निदेशक श्रीमती आशिमा सिंह, डॉ. राका आर्य, प्रोफेसर एन.एल.आई.यू. भोपाल ने भी संबोधित किया। कार्यशाला का संचालन डॉ. प्रतिभा राजगोपाल तथा आभार प्रदर्शन प्रशासन अकादमी संचालक श्री एम.के. वार्ष्णेय ने किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय केन्द्रीय सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों के अलावा म.प्र. के प्रशिक्षु, राजस्व एवं पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
Date: 08-03-2010     Time: 19:17:23
 
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