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शहद एक, गुण अनेक
शहद
पंचामृत में से एक है। शहद मधुमक्खियों से प्राप्त होता है। इसलिए
मधुमक्खियों को प्राकृतिक हलवाई भी कहा जाता है। उनके द्वारा बनाई जाने
वाली यह मिठाई (शहद) बाजार में मिलने वाली मिठाइयों की तरह न तो बासी
होती है और न ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक। वरन् जितना ही पुराना होता
है, उतना ही स्वास्थ्यवर्धक होता जाता है। परिश्रम से एकत्रित किया गया
हजारों वनस्पतियों का सत्व हमें एक स्थान पर एकत्रित शहद के रूप में मिल
जाता है। इसमें जो स्वाभविक शक्तिवर्धक, रोग निरोधक तत्व मिलते हैं,
उन्हें बोतलों में बंद टॉनिकों से प्राप्त करना असंभव है।
वैज्ञानिकों ने गहन शोध करने के उपरांत कहा है कि शहद में पाए जाने वाला
पानी, एलब्यूमिन, चीनी, वसा पराग, केसर खनिज, विटामिन सी इत्यादि प्रचुर
मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण शहद एक दवा का काम करता है और शरीर
की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
इसमें जो चिकनाई होती है, उससे पाचन तंत्र हृष्ट-पुष्ट होता है। इसलिए
बीमार व वृद्ध, बच्चों के लिए शहद अत्यंत गुणकारी होता है। शहद प्रकृति
प्रदत्त सबसे सस्ता पौष्टिक खाने योग्य पदार्थ है जो रक्त में मिलकर
उष्मा व शरीर को बल देता है। यह हानिकारक कीटाणुओं को मारने की ताकत रखता
है। शहद में जो तत्व पाए जाते हैं उन तत्वों को मिलाकर शहद निर्माण के
लिए वैज्ञानिकों ने अथक प्रयास किए, किन्तु सफलता नहीं पाई शहद का सबसे
बड़ा गुण है कि शहद वर्षों तक रखने के बावजूद भी न खराब होता है और ना ही
सड़ता है, बल्कि शहद जितना पुराना होता है उसकी औषधीय क्षमता उतनी ही बढ
जाती है। शहद में जो तत्व पाए जाते हैं उनके कारण ही प्राचीन ऋषि मुनि
इसे अमृत की संज्ञा देते थे और हर शुभ कार्य हवन, यज्ञ, स्नान, अभिषेक
आदि में इसका प्रयोग अनिवार्य मानते थे। नित्य प्रात: एक कप पानी में दो
चम्मच शहद डालकर पीने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढती है व दिन भर
स्फूर्ति बनी रहती है। शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है व पाचन-तंत्र मजबूत होता
है। इसलिए शहद को उत्तम टॉनिक भी माना जाता है जो कि हजारों मधुमक्खियों
के श्रम से मिलता है। यद्यपि आज-कल शुद्ध व सस्ता शहद मिलना काफी कठिन
है, क्याेंकि बनावटी शहद भी बड़ी मात्रा में बाजार में मिल रहा है इसलिए
असली शहद जनसामान्य की पहुंच से काफी दूर होता जा रहा है। यदि मधुमक्खी
पालन को भारत में कुटीर उद्योग के रूप अपनाया जाए तो न केवल असली शहद
प्राप्त करना आसान होगा, बल्कि साथ ही इसका मूल्य भी जन सामान्य की पहुंच
के अंदर होगा। ये उद्योग इंसान को न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाएंगे,
बल्कि आर्थिक सहयोग भी प्रदान करेंगे। इसलिए टॉनिकों व मिठाइयाें के
भ्रमजाल से छूटकर यदि इस प्राकृतिक वरदान (शहद) का उपयोग शीतल पेय पदार्थ
के रूप में किया जाए तो अनेक बीमारियों से स्वत: ही छुटकारा पाया जा सकता
है।
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