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  बीजेपी का फैमिली ड्रामा ?
बीजेपी से निकाले गए वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को क्या महंगा पड़ा ?
जिन्ना की तारीफ या फिर सरदार बल्लभ भाई पटेल की निंदा? शायद दोनों। अपनी नई किताब 'जिन्ना-इंडिया, पार्टिशन, इंडिपेंडेंस' में जसवंत ने लिखा है कि भारत बंटवारे के लिए सिर्फ जिन्ना नहीं बल्कि सरदार बल्लभ भाई पटेल, जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस भी जिम्मेदार थे। जबकि बीजेपी सरदार पटेल को आदर्श मानती है। अपनी इस सोच को जगजाहिर करने की कीमत जसवंत को पार्टी से निलंबन के रूप में चुकानी पड़ी। जसवंत का कहना है कि 5 साल के रिसर्च के बाद उन्होंने किताब लिखी है। ऐसा नहीं है कि भारत विभाजन पर किताबें नहीं लिखी गई हों या फिर शोध नहीं हुए हों, लेकिन ऐसी बात कभी सामने नहीं आई कि बंटवारे के लिए सरदार पटेल और जवाहर लाल नेहरू जिम्मेदार थे। भारत में ही क्या पाकिस्तान में भी इस तरह की बात नहीं उठी। अब ये तो जसवंत ही जानें कि ऐसा क्या तथ्य उनके हाथ लग गया कि उन्होंने इतनी बड़ी बात लिख डाली? अपनी बात लिखने में जसवंत सिंह ने काफी बाजीगरी दिखाई। जिन्ना की तारीफ कर उन्होंने पार्टी की नीतियों की खिलाफत की, सरदार पटेल को विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराकर उन्होंने पार्टी के आदर्श पुरुष का अपमान भी किया और शायद इसे संतुलित करने की कोशिश में बंटवारे के लिए नेहरू और कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहरा दिया। लेकिन जसवंत अपनी कोशिश में कामयाब नहीं हो पाए और मात खा गए। जसवंत ने सोचा सस्ते में निपट जाएंगे, लेकिन पार्टी विचारधारा के खिलाफ जाने पर लालकृष्ण आडवाणी नहीं बच पाए तो फिर पार्टी की नजरों में जसवंत ने तो दोहरा अपराध किया है। जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कहने पर 2005 में लालकृष्ण आडवाणी को बीजेपी अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ा था। ये जानते हुए भी जिन्ना की तारीफ में कसीदे पढ़ने को जसवंत का आत्मघाती कदम कहा जा सकता है। पार्टी ने जिस तरह जसवंत की विदाई की उससे इस वरिष्ठ नेता को गहरी ठेस पहुंची है। बीजेपी की चिंतन बैठक के पहले पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने प्रेस से बातचीत में कहा कि संसदीय बोर्ड ने जसवंत को पार्टी से निष्कासित करने का फैसला किया और उनकी प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी गई है। आगे राजनाथ ने कहा कि जसवंत सिंह को मैसेज दे दिया गया है कि वे चिंतन बैठक में शामिल न हों। जसवंत का कहना है कि निष्कासन की सूचना उन्हें व्यक्तिगत तौर पर दी जाती तो इतना बुरा नहीं लगता। लेकिन जसवंत जी आपने पार्टी और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का ख्याल रखा होता तो बीजेपी आपके बारे में सोचती, लेकिन आपने तो कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी। इससे पहले भी जसवंत सिंह कई बार विवादों में रह चुके हैं। भले ही इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार के लिए पार्टी के बड़े नेताओं को जिम्मेदार ठहराने वाला पत्र हो या फिर वसुंधरा राजे से विवाद। परिवार का कोई सदस्य दुनिया की नजरों भले कितनी ही गलतियां करे, उसे समझाकर या फिर डांट फटकार कर फिर से गलती न करने की नसीहत देकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन जब कोई सदस्य ऐसा काम करे जिससे परिवार के आदर्शों और रिवाजों की ध्वज्जियां उड़ें और परिवार की पगड़ी उछले है तो उसे घर से बेदखल कर दिया जाता है। यही जसवंत सिंह के साथ हुआ। लेकिन हकीकत ये भी है कि परिवार की शान में गुस्ताखी करने वाले सदस्य को हालात सामान्य होने पर फिर से घर में जोड़ लिया जाता है, कभी परिवार की जरूरत पर तो कभी निष्कासित सदस्य की जरूरत पर। यही देखना है कि ये पूरा एपिसोड बीजेपी का फैमिली ड्रामा तो नहीं?

by Devendra Sharma
sharmadev09@gmail.com

 
 
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