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सितंबर - शिक्षक दिवस
मध्यप्रदेश में शिक्षा की मजबूत होती नींव
विकास
और समृध्दि की नींव है शिक्षा। स्वर्णिम मध्यप्रदेश के निर्माण में
शिक्षा की भूमिका अहम है। मध्यप्रदेश में पिछले आठ माह शिक्षा की
गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ ही शैक्षिक व्यवस्था में आमूल-चूल
परिवर्तन के लिए जाने जायेंगे। विकसित और समृध्दिशाली राज्य बनाने के लिए
तय प्राथमिकताओं में से शिक्षा विशेषकर स्कूली शिक्षा भी एक है। यही कारण
है कि मौजूदा सरकार नवाचारों के जरिए शैक्षिक नींव की मजबूती पर विशेष
ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दृढ़ संकल्प है
कि प्रदेश का हर बच्चा स्कूल जाए,
खूब पढ़े और आगे बढ़े। अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुणवत्ता
के साथ पूरी करें।
राज्य
सरकार के मजबूत इरादों कोर् मूत्तरूप मिल रहा है स्कूल शिक्षा के क्षेत्र
में। आज हर गांव-कस्बें के एक किलोमीटर में प्राथमिक और तीन किलोमीटर में
माध्यमिक शाला की सुविधा है। जिन बसाहटों में शाला जाने योग्य न्यूनतम
10
बच्चें भी है, तो उन जगहों
पर प्राथमिक शिक्षा की सुविधा के लिए सेटेलाइट स्कूल प्रारंभ किये गये
है। विशेष अध्ययन प्रणाली को अपनाते हुए अनेक गांवों में ब्रिज कोर्स भी
संचालित किये गये है। बालिकाओं के लिए अनेक स्थानों पर आवासीय सुविधा के
साथ बालिका छात्रावास और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित है।
उत्तम अध्ययन-अध्यापन का वातावरण निर्मित करने की दृष्टि से
सर्वसुविधायुक्त शाला भवनों का निर्माण किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में विगत आठ माह से एक महत्वपूर्ण दौर चल रहा है,
शिक्षा को शिक्षक से जोड़ने का। शिक्षक प्रशिक्षण के
अलावा ऐसे भी प्रयास हुए कि कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारी के रूप में
तैनात शिक्षक कक्षाओं में अध्यापन के लिए भी पहुँचे। गुरूजनों को अनेक
प्रशिक्षणों के माध्यम से व्यवसायिक रूप से अपनी दक्षता और कार्यकुशलता
में वृध्दि के अवसर सुलभ कराये गये है। इस कड़ी में गुणवत्तायुक्त शिक्षा
का समयबध्द कार्यक्रम दक्षता संवर्धन कार्यक्रम भी लागू है। इसके तहत जिन
कक्षाओं के 90 प्रतिशत विद्यार्थी 'ए'
ग्रेड में आयेंगे उनके गुरूजनों को 5
हजार रूपये एवं 80 प्रतिशत
विद्यार्थियों के 'ए'
ग्रेड में रहने पर उन गुरूजनों को ढाई हजार रूपये की
प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। बेहतर शैक्षिक उपलब्धियां प्राप्त करने वाले
स्कूलों के पालक शिक्षक संघों को भी दस हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि भी
सरकार देगी।
प्रदेश के स्कूलों में प्रारंभिक कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को
दोपहर का भोजन और पाठय पुस्तकें नि:शुल्क मिल रही है। कक्षा एक से आठवीं
तक अध्ययनरत बेटियों को दो जोड़ी शाला गणवेश भी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती
है। इस वर्ष पहली बार अप्रेल से स्कूल खुले और
95
प्रतिशत से अधिक बच्चों को नि:शुल्क पाठय पुस्तकें
मिली। पांचवी व आठवीं कक्षा पास कर क्रमश: छटवीं व नवमीं कक्षा में दूसरे
स्थान की शाला में प्रवेश लेने वाली बालिकाओं को नि:शुल्क सायकिलें भी
पालक शिक्षक संघ के माध्यम से दी जा रही है। अनुसूचित जाति,
जनजाति, पिछड़ा वर्ग के
बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की अनेक योजनाएं संचालित हो रही है। सामान्य
वर्ग के निर्धन परिवारों के बच्चों के शैक्षिक प्रोत्साहन के लिए सामान्य
निर्धन वर्ग छात्रवृत्ति योजना प्रारंभ की गई है। योजना के तहत कक्षा
6 से 8वीं में
बालकों को 200 रूपये और बालिकाओं को
300 रूपये की छात्रवृत्ति दी जा रही है। योजना से गत
वर्ष 1.28 लाख बालक-बालिकाएं लाभान्वित हुए।
शिक्षा के क्षेत्र में अपनाए जा रहे नवाचारों के बावजूद आज भी प्रदेश के
अनेक बच्चें शालाओं से बाहर होने से शिक्षा से वंचित है। समाज और राष्ट्र
की प्रगति के लिए इन बच्चों को स्कूलों तक लाना आवश्यक है। इसी बात को
दृष्टिगत रखते हुए
'स्कूल
चले हम' अभियान 29
जून से 14 जुलाई तक चलाया गया। ग्रामों में
शिक्षा चौपाल के आयोजन के साथ शुरू हुए इस अभियान के दौरान शाला में
प्रवेश लेने वाले बच्चों के स्वागत में स्कूलों के द्वार पर मंगल कलश रखे
गये और तोरण द्वार लगाये गये। सात जुलाई तक घर-घर सम्पर्क कर शाला जाने
योग्य बच्चों की पहचान के साथ ही एक से 14
जुलाई तक प्रवेशोत्सव हुआ।
प्रदेश में इस वर्ष भी
21
जनवरी को सामूहिक सूर्य नमस्कार का आयोजन सभी
स्कूलों-कॉलेजों में हुआ। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और स्कूल
शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने भी इस महा आयोजन में
जनप्रतिनिधियों के साथ अपनी सहभागिता की। सिवनी जिले के पेंच अभ्यारण्य
में तीन फरवरी को हुए पांचवें मोगली उत्सव में मुख्यमंत्री ने कक्षा
12वीं में 85
प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने वाले विद्यार्थियों को शासन की ओर से
कम्प्यूटर भेंट करने की घोषणा कर छात्रहित में एक नया कदम उठाया,
जिसेर् मूत्तरूप भी मिला 10
अगस्त को। उन्होंने मुख्यमंत्री निवास में विशाल
आयोजन कर लगभग 475 विद्यार्थियों को कम्प्यूटर
हेतु 25-25 हजार रूपये के चेक भेंट किये। इतना
ही नही पहली बार वृहद स्तर पर हुए मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान
समारोह में उन्होंने 10वीं व 12वीं
की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले 65
विद्यार्थियों और शत-प्रतिशत परिणाम देने वाली
238 संस्थाओं के प्राचार्यों को भी पुरस्कृत किया।
योग नीति को सार्थक सिध्द करते हुए स्वामी विवेकानंद योग पुरस्कार
ग्वालियर की एक संस्था को तथा योग के क्षेत्र में कार्यरत चार अन्य
संस्थाओं#व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया।
शिक्षा विभाग,
जिसमें स्कूल शिक्षा, उच्च
शिक्षा व तकनीकी शिक्षा व प्रशिक्षण विभाग भी शामिल है,
संभागीय समीक्षा बैठकों का दौर भी शुरू हुआ। बैठकों
में शिक्षा की गुणवत्ता और विभाग में कसावट लाने के अहम फैसले लिए गये।
ऐसा ही एक फैसला था, पदोन्नति के बाद पदांकन
के लिए काउसिंलिग का। फैसले से ज्यादा महत्वपूर्ण था उसका क्रियान्वयन।
लेकिन अपने इरादों में बुलंद शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने इस
प्रक्रिया को जुलाई में कराकर पारदर्शिता की जो मिसाल प्रस्तुत की,
उसे न सिर्फ सर्वत्र सराहा गया बल्कि वह अब अन्य
विभागों के लिए अनुकरणीय बन चुकी है। हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी के
परीक्षा परिणाम अपेक्षानुरूप न आने पर सरकार मुस्तैद हुई और बेहतर परिणाम
देने वाले स्कूलों, प्राचार्यों,
जिलों, संभागों और उसके
अमले को पुरस्कृत करने की योजना बनाई, तो
अपेक्षित रिजल्ट न देने वालों को दंडित करने का प्रावधान भी किया गया।
उचित मौके पर रिजल्ट की संभागवार समीक्षा हुई तथा भविष्य में परीक्षा
परिणामों को सुधारने के लिए शाला और जिलावार लक्ष्य तय हुए। कम परीक्षा
परिणाम वाले हाई स्कूल#हायर सेकेडंरी के विषय
शिक्षकों के विरूध्द अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।
शून्य से 10 प्रतिशत तक परीक्षा परिणाम होने
पर दो वेतनवृध्दि, 10 से 20
प्रतिशत पर एक वेतनवृध्दि, 20
से 30 प्रतिशत पर
चारित्रिक चेतावनी दिये जाने के संबंध में नोटिस जारी होगा। संभागीय
संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों का
नियमित दौरा कर शिक्षण कार्य की सतत मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिये गये।
शिक्षा का अकादमिक स्तर सुधरे इस ओर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया
गया। हाई स्कूल के परिणामों के परिप्रेक्ष्य में शासन ने एक विषय के
स्थान पर दो विषयों में पूरक की पात्रता देने का निर्णय भी लिया। इस
फैसले के कारण एक लाख
18
हजार 300 अतिरिक्त
परीक्षार्थियों को परीक्षा में सम्मिलित होने का मौका मिला।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के प्रयासों के तहत जुलाई से दिसम्बर माह में
कम से कम दो बार शासकीय तथा अशासकीय शिक्षण संस्थाओं के प्राचार्यों की
सम्मिलित बैठक जिला कलेक्टरों द्वारा बुलाई जायेगी। इस साल अप्रेल में
शुरू हुए शिक्षा सत्र के बाद एक जुलाई से पूरी कड़ाई के साथ स्कूल प्रारंभ
हुए। प्रशासनिक पारदर्शिता एवं कसावट लाने की दृष्टि से संभागीय संयुक्त
संचालक#जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में
तीन वर्ष या अधिक अवधि से पदस्थ कर्मचारियों को अन्यत्र पदस्थ किया
जायेगा। रिक्त होने वाले पदों पर जिले के अन्य अधीनस्थ कार्यालयों#
विद्यालयों में पदस्थ समकक्ष योग्य कर्मियों को उन
कार्यालयों में भेजा जायेगा। शिक्षा में गुणवत्ता हेतु विद्यालयों में
अतिथि शिक्षक आदि के रूप में सेवानिवृत्त व्याख्याता#शिक्षकों
के अनुभव व ज्ञान का लाभ भी लेने का निर्णय लिया गया है।
नि:शुल्क सायकिल वितरण की योजना में वर्ष
2008-09
में नवमी कक्षा में प्रवेश लेने वाली एक लाख
94 हजार 552 बालिकाओं को
लाभान्वित किया गया। गत वर्ष सभी वर्गों की बालिकाओं को 2400
रूपये प्रति बालिका की दर से सायकिल क्रय हेतु दिये
गये। इसके लिए 50.27 करोड़ रूपये व्यय हुए।
छटवीं कक्षा में दूसरे गांव में अध्ययन हेतु जाने वाली 2
लाख बालिकाओं को वर्ष 2008-09
में नि:शुल्क सायकिल वितरण योजना का लाभ मिला।
शैक्षिक परिवर्तन की दृष्टि से आठ माह शिक्षक वर्ग के लिए भी महत्वपूर्ण
रहे। महत्वपूर्ण निर्णय के तहत अब शिक्षकीय अमले और स्कूल प्रबंधन से
जुड़े कर्मियों को वेतन की ऑन लाइन व्यवस्था के बाद सेवाकाल की समस्त
सुविधाएं भी ऑन लाइन प्राप्त हो रही है। वेतन संबंधी जानकारी का
कम्प्यूटरीकरण करते हुए प्रत्येक शिक्षक को यूनीक कोड आवंटित किया गया
है। इस व्यवस्था से उनके स्थापना संबंधी कार्यों में शुचिता,
पारदर्शिता, क्रमोन्नति
एवं वित्तीय स्वत्वों के निराकरण में गति,
अध्यापक संवर्ग में सविलियन, ऑन लाइन वरिष्ठता
सूची, वार्षिक वेतन वृध्दि,
वेतन निर्धारण आदि की कार्रवाई अविलंब पूरी होगी। इस
योजना कोर् मूत्तरूप देने के लिए शिक्षा विभाग ने अपने एजुकेशन पोर्टल
में पूर्व से उपलब्ध शिक्षकों की जानकारी में अतिरिक्त जानकारी भी शामिल
कर रहा है। एजुकेशन पोर्टल में शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं की प्रविष्ट
भी की जायेगी।
मूल्यांकन में पारदर्शिता लाने एवं छात्रों के अभिभावकों को परफॉरमेंस की
सही जानकारी देने के उद्देश्य से हाई स्कूल एवं हायर सेकेडंरी तथा अन्य
परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं छात्रों द्वारा मांगें जाने पर उन्हें
मूलत: उपलब्ध कराने का भी फैसला लिया गया है,
गत 16 जून को विभाग की
समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण,
विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति,
पुस्तकों एवं गणवेश वितरण के कार्य को समय में पूर्ण
करने के निर्देश तथा सत्रारंभ में ही नवीन विद्यालय शुरू करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने और शिक्षा की
गुणवत्ता पर अधिक ध्यान की आवश्यकता भी बताई। उनके सभी निर्देशों का
अक्षरश: पालन करने में स्कूल शिक्षा विभाग अग्रणी रहा है। इतना ही नही
मध्यप्रदेश सहित तीन राज्यों को केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय माध्यमिक
शिक्षा अभियान के लिए चयनित किया है। शासन ने इस वर्ष शैक्षणिक रूप से
पिछड़े विकासखण्डों में 200 मॉडल स्कूलों और
200 कन्या हायर सेकेडंरी छात्रावासों की
स्थापना का भी निर्णय है।
प्रदेश सरकार की
100
दिन की कार्ययोजना के तहत 200
माध्यमिक शाला भवनों का निर्माण और शालाओं में एक
हजार अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण का कार्य भी शुरू किया गया है। इसके
साथ ही 100 आवासीय ब्रिज कोर्स, 500
शाला भवनों में रेम्प निर्माण, 1500
प्राथमिक शालाओं में गतिविधि आधारित शिक्षण पध्दति
पायलट के रूप में प्रारंभ कर शिक्षण-प्रशिक्षण की शुरूआत,
कक्षा पांचवी एवं आठवीं के बेहतर परीक्षा परिणाम वाली
1886 शालाओं को पुरस्कृत करने,
चार जिलों भोपाल, इन्दौर,
ग्वालियर और जबलपुर की 35
हजार बालिकाओं को पॉयलट तौर पर सेनिटेशन किट प्रदान कर 1100
शालाओं के भवनों में उन्नयन व सुधार कार्य,
कॉल सेंटर के माध्यम से अनियमितताओं की शिकायतों को
प्राप्त कर उनके समाधान और पालक शिक्षक संघों को प्रशिक्षित करने की पहल
की गई है।
बीती
छ: माह की अवधि में स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित मुख्यमंत्री की
491
घोषणाओं में से 450 गत माह
तक पूर्ण कर ली गई है। वर्ष 2008-09 में
919 सेटेलाइट स्कूल, 1013
नई माध्यमिक शालाएं, 1185
हाईस्कूल और 215 हायर सेकेंडरी स्कूल प्रारंभ
किये गये। 15 नये कस्तूरबा गांधी विद्यालयों
के अलावा गैर आवासीय ब्रिज कोर्स में 21 हजार
93 बच्चें दर्ज हुए। कक्षा एक से बारहवीं तक
के 1.33 करोड़ विद्यार्थियों को पाठय पुस्तकें
और कक्षा एक से आठ तक अध्ययनरत 56 लाख
बालिकाओं को स्कूल यूनिफार्म भी गत वर्ष दी गई। पिछले वर्ष से गणवेश के
लिए प्रति बालिका के मान से 200 रूपये
प्रत्येक शाला कोष में दिये जा रहे हैं। इस साल भी यह राशि शाला कोष में
जमा कराई गई है। प्रत्येक बालिका को दो जोड़ गणवेश दिया जाना है,
संभव होने पर गणवेश के साथ चप्पल भी उन्हें देने के
निर्देश है। 100 प्रतिशत सिंथेटिक धागों#पॉलिस्टर
धागों से निर्मित वस्त्र जिसे रोटो कहा जाता है,
गणवेश हेतु क्रय न किये जाने के निर्देश दिये गये है।
क्योंकि उसे मानव त्वचा एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से उपयुक्त नहीं पाया
गया है। अध्यापन कार्य के महत्व को जानते हुए सरकार ने जिला शिक्षा
अधिकारियों, प्राचार्यों,
और विकासखण्ड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र
के किसी एक विद्यालय का चयन कर विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कम से कम
एक पीरियड अनिवार्य रूप से लेने को कहा है। परीक्षा परिणाम सुधारने और
शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दृष्टि से न केवल विद्यालय बल्कि हर
जिले की शैक्षिक कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है।
जिला
व संभाग स्तर पर शैक्षिक व्यवस्थाएं सुदृढ़ बनी रहे इसके लिए शिक्षकों को
गैर शैक्षणिक कार्यों में न लगाये जाने का निर्णय लिया गया है। यथासंभव
सभी शालाएं एक ही पाली में लगाई जायेगी। हाई स्कूल व हायर सेकेंडरी परिसर
में संचालित प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं का नियंत्रण संबंधित प्राचार्य
को सौपा गया है। शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मासिक मूल्यांकन की
व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया है। मासिक टेस्ट के आधार पर कमजोर छात्रों
को चिन्हित कर उनकी सूची तैयार होगी। त्रैमासिक अर्ध्दवार्षिक परीक्षा
एवं प्री-बोर्ड परीक्षा वार्षिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों के पैटर्न के
अनुसार होगी। चिन्हित कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष निदानात्मक
कक्षाएं संचालित की जायेगी। सुदुर ग्रामीण इलाकों में शिक्षक न होने पर
वहां अन्य संस्थाओं में पदस्थ शिक्षक या डाईट के विषय शिक्षकों को मोबाइल
टीचर के रूप में भेजा जायेगा। विद्यालय,
जिला, संभाग स्तर पर
अकादमिक गतिविधियों की नियमित मॉनीटरिंग होगी। प्राचार्य,
वरिष्ठ व्याख्यता दोनों अध्यापन कार्य करेंगे। शिक्षक
शालाओं में उपस्थित रहे, बसों (परिवहन) के
हिसाब से समय चक्र न बनाया जाए, ऐसी व्यवस्था
की गई है। शिक्षक अब आधा घंटा पहले आएगें और आधा घंटा बाद जाएंगे। शासन
ने जिलों में पदस्थ प्रथम व द्वितीय श्रेणी अधिकारियों को एक-एक स्कूल
अपनाने को कहा है। शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए शालाओं का सतत
निरीक्षण जरूरी है, इस बात को मद्देनजर रखते
हुए लोक शिक्षण संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में सात दल
गठित किये गये है। विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए 15
जुलाई से आकाशवाणी के सभी प्राथमिक प्रसारण केन्द्रों
से परस्पर रेडियो संवाद कार्यक्रम का प्रसारण प्रारंभ किया गया है।
राज्य
सरकार शिक्षकों को शिक्षा व विद्यार्थी के प्रति अपनी जिम्मेदारी का
अहसास कराने,
उनमें राष्ट्रीयता की भावना और संस्कृति से जोड़ने के
उद्देश्य से राष्ट्र ऋषि योजना का क्रियान्वयन शीघ्र प्रारंभ करने जा रही
है। योजना के तहत शिक्षकों को राष्ट्रीयता की भावना से ओत प्रोत साहित्य
और परिचय कार्ड भी उपलब्ध कराये जायेंगे। शिक्षकों के स्वास्थ्य परीक्षण
का भी व्यापक अभियान इस योजना के माध्यम से चलेगा। सरकार ने इस वर्ष के
हाई स्कूल व हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणामों को सुधारने की कवायद तेजी से
शुरू की है। इसके तहत नौवी से बारहवीं कक्षा तक के शिक्षकों#व्याख्याताओं
को सितंबर में राज्य स्तर पर प्रशिक्षित किये जाने का निर्णय लिया गया
है। इसके पूर्व विषय विशेषज्ञों एवं राज्य स्तरीय स्त्रोत शिक्षकों को
प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ आदिम जाति कल्याण
विभाग द्वारा संचालित स्कूलों के शिक्षकों को भी मिलेगा। प्रशिक्षण में
दसवीं के गणित, अंग्रेजी,
विज्ञान तथा संस्कृत और कक्षा बारहवीं के अंग्रेजी,
भौतिक, रसायन एवं गणित
विषयों के परिवर्तित पाठयक्रम के अनुरूप लगभग सोलह हजार शिक्षकों को
प्रशिक्षण मिलेगा। हाल में शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वृहद
प्रशिक्षण में भाग लेने वाले शिक्षकों को भोजन के पूर्व प्रार्थना
अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश भी दिये है। मध्यान्ह भोजन के पूर्व यह
किसी विशेष धर्म के लिए न होकर प्रार्थना स्वरूप होगा।
भोजन के पूर्व प्रार्थना
अन्न
ग्रहण करने से पहले विचार मन में करना है,
किस हेतु से इस शरीर का रक्षण पोषण करना है।
हे
परमेश्वर एक प्रार्थना नित्य तुम्हारे चरणों में,
लग
जाए तन,
मन, धन मेरा मातृभूमि की
सेवा में॥
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