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प्रेम का प्रतीक अंक
अंक शास्त्र के अनुसार अंक 6 प्रेम का प्रतिनिधित्व करने वाला अंक है।
किंतु इसका अर्थ यह नहीं लगाना चाहिए कि 6 मूलांक वाले व्यक्ति कामी
प्रवृत्ति के होते हैं। अंक 6 की जन्म तिथि में बारंबारता या योग होने से
इसके भाव में परिर्वतन होता है। इसकी अधिकता अशुभ होती है परंतु इस अंक
की जन्मतिथि में न होना व्यक्ति के जीवन में बहुत से शुभ अवसरों को खो
देता है तथा जीवन में रोमांस तथा प्रेम का अभाव रहता है। इसलिए जन्मतिथि
में अंक 6 अंक का होना शुभ होता है।
किसी भी व्यक्ति के जीवन में अंकों के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। जन्म
से लेकर मृत्यु तक अंक सदैव आपके जीवन के घटनाक्रम को प्रभावित करते रहते
हैं, जीवन की सभी घटनाएं चाहे शादी-विवाह, दुर्घटना, मुकदमा, लॉटरी,
विदेश गमन, सुख-दुख: आदि ये सभी किसी न किसी रूप में अंकों से संबंध रखते
हैं। ये सब किसी न किसी तारीख को घटित होती है जो आपके जीवन में एक विशेष
स्थान रखती है। किसी भी व्यक्ति के जीवन को अंकों से अलग करके नहीं देखा
जा सकता।
सभी अंक सभी व्यक्तियों के लिए शुभ नहीं हो सकते। प्रत्येक व्यक्ति विशेष
के लिए कुछ विशेष अंक शुभ व अशुभ होते हैं। वैसे सभी अंक अपने आप में
पूर्ण तथा शुभ होते हैं और उनका अपना विशेष महत्व होता है, किंतु अलग-अलग
लोगों के जीवन में अपना पृथक प्रभाव डालते हैं। अंक विद्या के द्वारा
किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व, जीवन का घटनाक्रम तथा भविष्य का आंकलन
आसानी से किया जा सकता है। अपने अनुकूल व शुभ अंक के अनुसार कार्य करने
पर सफलताएं अपेक्षाकृत अधिक सुगमता से मिलती हैं।
अक्सर लोग इसे पाश्चात्य संस्कृति की देन मानते हैं परंतु अंक विद्या
मूलत: भारतीय ज्योतिष शास्त्र का एक अभिन्न अंग है। परंतु यह बात सत्य है
कि हम सौर मास की चंद्र तिथि के अंकों के अनुसार गणना नहीं करते अपितु
अंग्रेजी तिथियों का गणना में प्रयोग करते हैं। क्योंकि जन्म से लेकर अंत
तक हमारे सभी कार्य इन्हीं अंग्रेजी तारीखों के अनुसार किए जाते हैं,
चाहें वह जन्म प्रमाण-पत्र में अंकित तारीख हो या स्कूल के प्रमाण पत्र
में दर्शायी गई तारीख या इसी प्रकार नौकरी, विवाह की तारीख तथा मृत्यु
प्रमाण-पत्र भी अंग्रेजी तारीख के अनुसार बनाया जाता है। इसलिए इन अंकों
का निरंतर प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ना स्वाभाविक है।
भारतीय ज्योतिष व अंक शास्त्र में तथा अन्य शास्त्रों में अंकों की
निश्चित संख्या का महत्व पता चलता है, जिसमें विशेष ग्रहों की मंत्रों की
जप संख्या निश्चित है तथा मंत्रों में अक्षरों की संख्या निश्चित है। अंक
गणित की गणना का आधार केवल अंक ही है। माला में मनकों की संख्या भी 108
है जो सभी प्रकार की सिद्धियों में प्रयोग की जाती है। किंतु अलग-अलग
उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विभिन्न मनकों की मालाओं का विधान है जैसे
25 मनकों की माला से जप करने पर मोक्ष की प्राप्ति, 21 मनाकों की माला से
अर्थ सिद्धि, 30 मनकों की माला से धन प्राप्ति तथा 54 मनकों की माला से
कार्य सिद्धि प्राप्ति होती है।
प्रत्येक व्यक्ति का एक मूल अंक होता है और उस मूल अंक का स्वामी ग्रह
विशेष होता है जो व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक क्षमताओं को
प्रभावित करता है। उस ग्रह विशेष के गुण व्यक्ति के व्यवहार, स्वाभाव व
आदतों में पाया जाता हैं। अंक शास्त्र के अनुसार अंक 6 प्रेम का
प्रतिनिधित्व करने वाला अंक है। किंतु इसका अर्थ यह नहीं लगाना चाहिए कि
6 मूलांक वाले व्यक्ति कामी प्रवृत्ति के होते हैं। अंक 6 की जन्म तिथि
में बारंबारता या योग होने से इसके भाव में परिर्वतन होता है। इसकी
अधिकता अशुभ होती है परंतु इस अंक की जन्मतिथि में न होना व्यक्ति के
जीवन में बहुत से शुभ अवसरों को खो देता है तथा जीवन में रोमांस तथा
प्रेम का अभाव रहता है। इसलिए जन्मतिथि में अंक 6 का होना शुभ होता है।
जन्मतिथि के अन्य अंकां की बारंबारता से अंक श् शुभ या पीड़ित हो जाता है
और उसी के अनुसार शुभ-अशुभ फल देता है।
जिन व्यक्तियों का जन्म किसी भी मास की 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है,
उनका मूल अंक 6 होता है। इसका स्वामी ग्रह शुक्र आकाश में अपना भव्य चमक
के कारण बिना किसी यंत्र के स्पष्ट देखा जा सकता है। उसी प्रकार 6 मूल
अंक के व्यक्ति किसी भी पार्टी या उत्सव में अलग ही पहचान में आ जाते
हैं। विपरीत सैक्स के प्रति इनका आकर्षण व मोह अधिक होता है और इनकी ओर
भी लोग चुंबक की तरह स्वत: आकर्षित हो जाते हैं। अंक 6 के व्यक्ति
सुंदरता, ऐशो आराम, साज-साा तथा वस्त्रों पर अधिक व्यय करते है। धन की
कमी होने पर भी इनके रहन सहन से इसका अनुमान लगाना कठिन होता है। ऐसे
व्यक्ति दूसरों से सहज मित्रता कर लेते हैं। अंक 3, 6, 9 वाले व्यक्तियों
से इनकी मित्रता धनिष्ठ होती है। अंक 6 वाले व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट के
बल पर अपना उल्लू आसानी से सीधा कर लेते हैं, मित्रों के बीच रहना अधिक
पसंद करते हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी मित्रों का कंधा इन्हें
सांत्वना देता है। कोई भी व्यक्ति सर्वगुण संपन्न नहीं होता ऐसे ही अंक 6
के व्यक्ति भी अपवाद नहीं हैं। इन्हें अपने खर्चों पर नियंत्रण तथा बचत
की और ध्यान देना चाहिए।
अपनी चंचलता पर भी अंकुश लगाना चाहिए अन्यथा यह दूसरों को आपके
व्यक्तित्व के संदेश दे सकती हैं। अपने मित्रों पर अधिक विश्वास न करें,
क्योंकि आपके अधिकतर मित्र आपकी खर्चीली आदत के कारण आपके मित्र है, खर्च
न करने पर वह आपके मित्र नहीं रहेंगे। स्त्री जाति पर भी अधिक विश्वास न
करें, उनके साथ विलासित आपको महंगे के साथ अपमान भी दे सकता है और आपका
गृहस्थ जीवन खतरे में भी पड सकता है। यहां ध्यान रखने की बात यह है कि
यदि आप 6 मूलांक के व्यक्ति हैं तो आपकी प्रेमिका व पत्नी का मूलांक भी 6
नहीं होना चाहिए।
आपके लिए 6, 15 24 तारीख व शुवार का दिन शुभ है। जीवन में 6, 15, 24, 33,
42 ,51, 60वें वर्ष महत्वपूर्ण घटनाओं के सूचक हैं। 21 अप्रैल से 20 मई
और 21 सितबर से 20 अक्टूबर के बीच का समय शुभ रहेगा तथा इन महीनों में
पड़ने वाली 6, 15 तथा 24 तारीखें उत्तम फलदायक होंगी और यदि इन तारीखों
में शुक्रवार भी पड़े तो यह दिन सोने पे सुहागा के समान होगा। इस दिन
प्रेमी युगल एक-दूसरे को प्रस्तावित कर सकते हैं या शादी के बंधन में बंध
सकते हैं। (शादी के लिए जन्मतिथि को छोड़कर अन्य तिथि का चुनाव करें)
आपको कला, अभिनय, फैशन डिजाइनिंग, इंटीरियर डेकोरेशन, खाने -पीने के
व्यवसाय जैसे पाक विद्या, होटल, रेस्टोरंट, हाऊस कीपिंग, टे्रवल,
आयात-निर्यात, गहनों का व्यापार या रसायन संबंधी उद्योगों में अधिक सफलता
मिलेगी। आपके लिए सफेद या हल्का बैंगनी रंग शुभ है, परंतु लाल, काला,
नीला रंग अशुभ रहेगा। इसलिए इन्हें दैनिक जीवन में कम से कम प्रयोग करें।
शुक्रवार के दिन सफेद कपड़े पहनना शुभ फलदायक रहेगा। आपका भाग्यशाली रत्न
हीरा हैं, इसे चांदी या प्लेटिनम की अंगूठी या लॉॅकेट में शुक्रवार को
प्रात: भरणी, पूर्व-फाल्गुनी, पूर्व आषाढ़ नक्षत्र में धारण करें और ऊँ
शुं शुक्राय नम: का पाठ करें। विपरीत समय में तथा कार्यो में असफलता
मिलने की दशा में निम्न पाठ करें।
अंक शास्त्र के अनुसार अंक 6 प्रेम का प्रतिनिधित्व करने वाला अंक है।
किंतु इसका अर्थ यह नहीं लगाना चाहिए कि 6 मूलांक वाले व्यक्ति कामी
प्रवृति के होते हैं। अंक 6 की जन्म तिथि में बारंबारता या योग होने से
इसके भाव में परिवर्तन होता है। इसकी अधिकता अशुभ होती है परंतु इस अंक
की जन्मतिथि में न होना व्यक्ति के जीवन मे बहुत से शुभ अवसरों को खो
देता है तथा जीवन में रोमांस तथा प्रेम का आभाव रहता है।
ऊँ कीर्तिवीर्या अर्जुनो नाम राजा बाहू सहस्त्र वान।
तस्य स्मरण मात्रेण ह्नंत नष्टं च लभ्यते कलीं ऊँ॥
यदि अंक 6 आपका मूलांक नहीं है और आप फैशन, होटल, अभिनय, ट्रेवल,
आयात-निर्यात के क्षेत्र में हैं, तो आपको अपने घर व ऑफिस के वायव्य कोण
में 6 रॉड 11 इंच लंबी विंड चाइम लगानी चाहिए और साथ ही अपने शयन कक्ष
में 'चियन' नामक चांदी की बनी हुई आकृति दीवार पर लगानी चाहिए, यह शुभ फल
देगी। 6 मूलांक के व्यक्ति भी इन प्रयोगों को कर इनका लाभ उठा सकते हैं।
यदि आपका मित्र या प्रेमी आपसे नाराज है, तो उसे चांदी का चियन बना लॉकेट
या अंगूठी उपहार में दें। आपकी उससे पारस्परिक समस्या का समाधान तथा
घनिष्ठता बनी रहेगी।
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