Share



Radhey Shyam Sharma पत्तियों में छिपे औषधीय गुण

तुलसी की पत्तियां, कपूर तथा लौंग घिसकर गोलियां बनाकर दांतों के नीचे दबाने से पायरिया नष्ट होती है और केवल तुलसी की पत्तियों को धीरे-धीरे चबाने से दांत दर्द में राहत मिलती है।

मेहंदी के पत्तों को पीसकर शरीर में ऊपरी गांठ पर लेप करने से धीरे-धीरे गांठ मिट जाती है। बीच-बीच में गांठ के ऊपर सिकाई करने से जल्दी लाभ मिलता है।

कनेर के सूखे हुए पत्तों को जलाकर पुराने घावों पर बुरकने से घाव सूखकर अच्छे हो जाते हैं।

फोड़े-फुंसियों पर बेल की कोमल पत्तियों के साथ काली मिर्च पीसकर लगाने से लाभ होता है। फोड़े-फुंसी से परेशान मरीज नीम के पत्तों का लेप बनाकर उसमें थोड़ा हल्दी मिलाकर उससे लेप करने से भली प्रकार से ठीक हो जाता है।

कामला (जिसमें आंख, हाथ-पैर पीले हो जाते हैं, पेट बड़ा और शरीर का रंग बरसाती मेंढक जैसा हो जाता है) में मेहंदी की 30 ग्राम ताजी पत्तियों को कूटकर 250 ग्राम जल में शाम को भिगो दें। अगले दिन प्रात:काल जल को निथार लें तथा उस जल को रोगी को पिला दें। एक सप्ताह में ही कामला रोग ठीक होने लगता है।

Radhey Shyam Sharma
पालक की हरी पत्तियों का सेवन मधुमेह रोगियों के लिए खासतौर से फायदेमंद होता है।

अरंडी के हरे पत्ते लेकर खरल में घोंट लें। जब वे अच्छी तरह पिस जाएं तो हल्का-हल्का गर्म कर रोगी के माथे पर कनपटियों पर लेप कर दें। यह लेप सिर के दर्द में भी लाभकारी है।

नमक और बेर के पत्ते को पीसकर और उसमें शुध्द शहद मिलाकर चाटने से जुकाम में काफी राहत मिलती है।

मूली व उसके पत्तों का रस निकालकर कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

गाजर के पत्तों का रस निकालकर हल्का गर्म कर लें। इसे नाक व कान में डालने से आधा शीशी का दर्द दूर हो जाता है। अमरूद के पत्तों में पान की तरह कत्था लगाकर खाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
गाजर की पत्तियों में आंवला पीसकर लेप बना लें। इस लेप को बालों पर मलने से सफेद बालों में कालापन आने लगता है। यह प्रयोग सर्दियों में नित्य करना चाहिए। पुदीने की 10 ताजी पत्तियां सुबह-शाम चबाने से दांतों के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

करौंदा के ताजे पत्ते लेकर उनका रस निकालें, छानकर ड्रापर द्वारा दो-दो बूंद आंखों में डालने से आरंभिक काल का मोतियाबिंद ठीक हो जाता है। खांसी में करौंदे केपत्ते शहद में मिलाकर खाने से लाभ होता है।

Radhey Shyam Sharma
मदान के पके पत्ते कोयले की आग में जलाकर भस्म बना लें। चार रत्ती सुबह-शाम शहद में खाने से कफ ज्वर ठीक हो जाता है। दाद-खाज खुजली से छुटकारा पाने के लिये सरसों के तेल में आक (मदार) के पत्तों का रस और हल्दी मिलाकर गर्म कर लें। इसे छानकर साफ शीशी में भर लें। इसे लगाने से चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है।

ब्राह्मी की ताजी पत्तियों का रस एक चम्मच पिलाने से उल्टी-दस्त के साथ दस्त कफ निकालकर सर्दी-खांसी खीट हो जाती है।

परवल-पत्र (पटोल-पत्र) और नीम पत्र का क्वाथ शहद मिलाकर पीने से वातरक्त (गाउट) में आराम होता है।

मुलहठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर दांतों से चबाकर चूसते रहें, इससे गला खुलने के साथ-साथ गले का दर्द आदि भी जाता रहता है।

अर्जुन के रस के साथ आम और जामुन के पत्तों का रस लेने पर कहीं से भी आने वाला रक्त रूक जाता है। यह रक्त रक्तपित्त में विशेष काम करता है।

आम की कोपलें दांत से खूब चबाएं और फिर थूक दें। दांत चमकीले व पुष्ट हो जाएंगे।
More News