अफसर ने अपनी लापरवाही का ठींकरा निर्दोष लोको पायलट पर फोड़ा

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: DD                                                                         Views: 423

Bhopal: लोको पायलट का कंपीटेंसी प्रमाण पत्र किया सस्पेंड
भोपाल रेल मंडल में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी पायलट द्वारा ट्रेन के ओवरलोड की जानकारी झांसी और भोपाल के अफसरों को देने के बाद भी रेलवे अफसर द्वारा इंजन बदलने को लेकर न तो कोई निर्देश जारी किए गए और न ही उसके द्वारा इसकी गंभीरता को समझा गया। ऐसे में जब यह मामला तूल पकड़ा और अपने ऊपर तलवार लटकने का अंदेशा होते ही रेल अधिकारी ने आनन-फानन में निर्दोष लोको पायलट का कंपीटेंसी प्रमाण पत्र सस्पेंड कर दिया।

ये है पूरा मामला -
राजेन्द्र नगर से इंदौर जा रही गाड़ी क्रं. 19322 राजेन्द्र नगर-इंदौर एक्सप्रेस 16 मई को इंदौर जा रही थी। ये ट्रेन जैसे ही झांसी पहुंची ही थी कि इस गाड़ी का लोको पायलट मनोज अवस्थी ने देखा कि इंजन बार-बार गर्म हो रहा है। इसकी जांच की तो पता चला कि ट्रेन ओवरलोड चल रही है और गाड़ी स्पीड नहीं पकड़ पा रही है। ऐसे में लोको पायलट श्री अवस्थी ने इसकी जानकारी झांसी और भोपाल मंडल के अधिकारियों को दी, लेकिन दोनों मंडल के अधिकारियों ने एक न सुनी। ऐसे में लोको पायलट को धीमी गति से ट्रेन को भोपाल लाना पड़ा। हालांकि भोपाल तक ट्रेन आने में कई बार गर्म होकर अपने-आप अलार्म बजती रही। बावजूद इसके वह पूरी जिम्मेदारी और जवाबदारी से अपने कार्य का निर्वहन करते हुए ट्रेन को भोपाल सात घंटे देरी से पहुंचाई। इस घटना का ठिकरा अधिकारियों पर न फूटे, इससे पूर्व ही रेल अधिकारी ने लोको पायलटल पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसका कंपीटेंसी प्रमाण पत्र सस्पेंड कर दिया, जिससे कि उसकी गल्ती सामने न आ सके।

इन आयोजनों पर भी ट्रेनें रहती ओवरलोड
रेलवे सूत्रों के अनुसार वर्ष भर में कई ऐसे प्रतियोगिताएं होती हैं तथा बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन होते हैं । इस दौरान अधिकतर ट्रेनें ओवरलोड ही चलती हैं। लेकिन इस दौरान ट्रेनों के ओवरलोड होने के बाद भी रेलवे ने लोको पायलटों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं किया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब इंजन की खामियों का परिणाम भोपाल रेल मंडल के लोको पायलट को भुगतना पड़ा है।

बिना जांच के कर दिया दोषी करार
रेलवे के वरिष्ठ लोको पायलटों का इस संबंध में यह कहना है कि यदि ट्रेन में लोड अधिक होने पर इंजन दस मिनट के लिए गर्म होकर बंद हो जाता है। इसके बाद इंजन को दोबारा चालू कर चलाया जाता है। झांसी से भोपाल तक पटना एक्सप्रेस का इंजन तीन बार बंद हुआ। इस कारण ट्रेन अपने निर्धारित समय से सात घंटे देरी से भोपाल पहुंची। ऐसे में इस मामले में लोको पायलट की कोई भी गलती नहीं है। अधिकारियों ने ट्रेन लेट लतीफी का ठींकरा सीधे लोको पायलट पर फोड़ दिया।

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