केरोसिन के लिए भी डीबीटी लागू करने की योजना : पेट्रोलियम मंत्री

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1: पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज कहा कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों को प्रस्तावित जीएसटी के दायरे में लाने के तरीकों पर विचार कर रही है और उसकी केरोसिन के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण-डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना को लागू करने की भी योजना है.
प्रधान ने लोकसभा में पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि अभी तक पेट्रोलियम उत्पादों को प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर-गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के दायरे से बाहर रुखा गया है लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों को इसके अधीन लाने के लिए सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है.
उन्होंने कहा, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा लेकिन यह नहीं पता कि कब तक. हमारे देश में संघीय ढांचा है और हमें राज्यों की मंजूरी लेनी होगी. हम कई तरीकों पर विचार कर रहे हैं. मंत्री ने कहा कि कई राज्य पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के खिलाफ हैं क्योंकि यह उनके लिए राजस्व का बड़ा स्रोत है.
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, मिजोरम और कुछ केंद्रशासित प्रदेशों को छोड़कर अधिकतर राज्यों ने पेट्रोलियम उत्पादों पर कर बढ़ाया है और पूरे देश में एक समान कर तय करना मुश्किल काम है. प्रधान ने कहा कि सरकार एलपीजी में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण :डीबीटी: योजना के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के बाद केरोसिन :मिट्टी के तेल: में भी डीबीटी योजना को लागू करने की योजना बना रही है. उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले दिल्ली को केरोसिन मुक्त राज्य बनाये जाने के बाद अब हरियाणा को भी केरोसिन राज्य बनाने के लिए प्रयास तेजी से चल रहे हैं.
एक पूरक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने इन दावों को खारिज कर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम कम नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 2 साल में पेट्रोल की कीमतें 27 बार और डीजल की कीमत 21 बार कम हुई हैं.

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