कैसे होगा इलेक्ट्रिक व्हीकल का सपना साकार? बजट में कैसे चूक गई सरकार

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: Admin                                                                         Views: 3542

Bhopal: 5 फरवरी 2018। उम्मीद जताई जा रही थी कि बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार कुछ खास तोहफा दे सकती है. लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने इस बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को मिस कर गये.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को यूनियन बजट पेश किया. उम्मीद जताई जा रही थी कि बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार कुछ खास तोहफा दे सकती है. लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने इस बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को मिस कर गये. इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए न तो कोई फंड जारी किया गया और न ही इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए किसी योजना का जिक्र किया गया.

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में मोबिलिटी के फ्यूचर को लेकर कोई बात नहीं कही जबकि सरकार का लक्ष्य 2032 तक सड़कों पर इलेक्ट्रिक व्हीकल दौड़ाने का है. सरकार चाहती है कि 2032 तक भारतीय सड़कों पर पूरी तरह से बिना पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन दौड़े. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना फंड और किसी योजना के न जाने सरकार का यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा? और कैसे प्रदूषण को कम किया जायेगा.

दुनियाभर की सरकारें इस वक्त इलेक्ट्रिक व्हीकल पर खासा जोर दे रही हैं. लेकिन भारत में अभी तक इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर कोई खास तैयारी नहीं हुई है. हालांकि बीच-बीच में ऑटोमोबिल कंपनियां 2020 तक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक व्हीकल पेश करना का शिगूफा छेड़ती रहती हैं, लेकिन सरकार के इस बजट से इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को खासा निराशा हाथ लगी है. यहां तक की सरकार के पास इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर अभी तक कोई पुख्ता रोडमैप भी नहीं है. हालांकि इलेक्ट्रोनिक कम्पोनेंट और इलेक्ट्रिक व्हीकल पर टैक्स कम करके से इस सेक्टर को लेकर एक उम्मीद जगी है लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रोत्साहन देने को लेकर कोई ठोस रोडमैप का अभी भी अभाव है.

हालांकि बजट में लग्जरी कारों पर कस्टम ड्यूटी को 5 फीसदी बढ़ाकर सरकार ने 'मेक इन इंडिया' कैंपेन को जरूर समर्थन दिया है. लेकिन EV इंडस्ट्री को बजट में कोई त्वरित लाभ नहीं दिया गया है. पिछले साल देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति भी यह बात कह चुकी है कि देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रोत्साहन बेहद जरूरी है. मारुति की 2020 तक देश में पहला इलेक्ट्रिक व्हीकल पेश करने की योजना है. इलेक्ट्रिक वाहनों सफलता के लिए जरूरी है कि बैटरियों व अन्य कंपोनेंट्स का निर्माण भारत में ही हो. इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल सस्ते भी मिलेंगे और वाहनों के लागत में भी कमी आएगी.

उम्मीद की जा रही थी कि रिचर्स और डेवलमेंट पर वर्तमान 150 फीसदी की कटौती को सरकार बढ़ाकर 200 फीसदी करेगी जिससे ईवी बैटरी मैन्यूफेक्चरिंग को जोरदार बूस्ट मिलता लेकिन सरकार ने यह भी नहीं किया.

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