भारत ने दिया यूएन को जवाब, पीओके और जम्‍मू कश्‍मीर में कोई तुलना नहीं

Location: नई दिल्‍ली                                                 👤Posted By: Digital Desk                                                                         Views: 16637

नई दिल्‍ली: संयुक्‍त राष्‍ट्रसंघ (यूएन) में मानवाधिकारों के लिए उच्‍चायुक्‍त जाइउ राद अल हुसैन की ओर से भारत और पाकिस्‍तान दोनों से ही अनुरोध किया गया कि कश्‍मीर और बलूचिस्‍तान में जारी मानवाधिकार हनन पर एक स्‍वतंत्र जांच कराई जाने के लिए रास्‍ता खोला जाए। इस पर भारत की ओर से यूएन को जवाब दिया गया है। भारत ने साफ कर दिया है कि घाटी में आज जो हालात हैं उसकी सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा मिलना है।

यूएन से की निष्‍पक्ष होने की अपील
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता विकास स्‍वरूप की ओर से एक चिट्टी लिखी गई है। इस चिट्ठी में भारत ने साफ कर दिया है कि जम्‍मू कश्‍मीर में मौजूदा हालात उस समय से बिगड़े हैं जब आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी को मार गिराया गया था, जो कि कई आतंकी वारदातों में वांटेंड था। हालातों को पाकिस्‍तान की ओर से और बढ़ावा मिला।
स्‍वरूप ने लिखा है कि आतंकवाद मानवाधिकार हनन का सबसे क्रूर रूप है और इसे बिना किसी पक्षपात के देखना चाहिए।

जम्‍मू कश्‍मीर और पीओके में है अंतर
स्‍वरूप ने अपने जवाब में उस सलाह का जिक्र भी किया है जिसमें यूएन की ओर से एक मिशन के एलओसी के दोनों तरफ का दौरा करने की बात है।
स्‍वरूप ने इस बात पर जोर दिया है कि जम्‍मू कश्‍मीर और पीओके की स्थितियों के बीच में कोई तुलना नहीं हैं।
उन्‍होंने कहा है कि जम्‍मू कश्‍मीर में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार है। जबकि पीओके में पाक के राजनयिक को इसके मुखिया के तौर पर नियुक्‍त किया गया है।

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