लघु उद्योग निगम से अब सरकारी खरीदी आनलाईन

Location: भोपाल                                                 👤Posted By: Admin                                                                         Views: 789

भोपाल: सितम्बर 9, 2016। राज्य सरकार द्वारा बनाये भण्डार क्रय नियम के तहत सरकारी विभाग अपने यहां उपयोग में आने वाली वस्तुओं की खरीदी सरकारी उपक्रम लघु उद्योग निगम से ही कर सकते हैं। इस खरीदी को सुकर बनाने के लिये अब निगम ने सरकारी विभागों के लिये आनलाईन खरीदी आदेश भेजने का प्रावधान कर है।

इसके लिये निगम ने सभी विभाग प्रमुखों, संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, सीईओ जिला पंचायत तथा बोर्ड-निगम-मंडलों के एमडी से कहा है कि वे एक निर्धारित फार्म भरकर निगम के ई-मेल पर भेजें जिस पर उन्हें ई-मेल आईडी एवं पासवर्ड दिया जायेगा। इसी ई-मेल आईडी से निगम की माल प्रदायकत्र्ता संस्थाओं को आनलाईन क्रय आदेश यानी इण्डेंट एवं सप्लाय आदेश भेजना होंगे। माल का भुगतान भी आनलाईन नेट बैंकिंग से करना होगा। ई-मेल आईडी और पासवर्ड निगम का होने के कारण वह इस खरीदी पर सतत नजर रख सकेगा तथा गड़बड़ी होने पर कार्यवाही कर सकेगा। उसे इस आनलाईन संव्यवहार पर सप्लायकत्र्ता फर्म से 2 प्रतिशत सर्विस चार्ज उसी फर्म के द्वारा आनलाईन मिलेगा तथा इसके बाद ही निगम आर्डर कम्प्लायसं के लिये कन्फर्म करेगा।

इसके लिये विभागों के आहरण एवं वितरण अधिकारियों को अपने डिजिटल हस्ताक्षर स्वयं बनाने होंगे तथा इसी डिजिटल हस्ताक्षर से वे निगम को क्रय आदेश आनलाईन भेज सकेंगे। डिजिटल हस्ताक्षर न्यूनतम क्लास-टु या क्लास-टु बी डीडीओ अधिकारी के होना अनिवार्य किया गया है।
निगम ने सभी विभागों से आग्रह किया है कि वे निगम को ई-मेल कर अपनी ई-मेल आईडी एवं पासवर्ड प्राप्त कर लें। जल संसाधन विभाग ने निगम के परिपत्र पर अपने सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण यंत्रियों एवं कार्यपालन यंत्रियों को निगम की आनलाईन खरीदी संबंधी व्यवस्था पर कार्यवाही करने के लिये निर्देशित कर दिया है। अन्य विभाग एवं कार्यालय भी ऐसा ही कर रहे हैं।

निगम के एक अधिकारी के अनुसार, निगम ने आनलाईन क्रय आदेश एवं सप्लाय आदेश भेजने की व्यवस्था प्रारंभ की है जिसके लिये सरकारी विभागों एवं कार्यालयों एवं अन्य सरकारी निकायों को निगम से ई-मेल आईडी एवं पासवर्ड लेना जरुरी है। अब तक सिर्फ तीस प्रतिशत विभागों एवं निकायों ने ही निगम से ई-मेल आईडी एवं पासवर्ड प्राप्त किये हैं। ऐसा जागरुकता की कमी के कारण है।

- डॉ नवीन जोशी

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