वाहनों के कानफोडू शोरगुल के खिलाफ यंग इंडियन्स ने राजा भोज विमानतल पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया

Location: भोपाल                                                 👤Posted By: वेब डेस्क                                                                         Views: 16373

भोपाल: 27 अक्टूबर 2016, सीआईआई यंगइंडियन्स ने आज एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ मिलकर राजा भोज विमानतल पर हॉर्न नॉट ओके प्लीज (एचएनओपी) नामक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहर में वाहनों के तेज व अनावश्यक रूप से बजते हॉर्न से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर जागरूकता फैलाना था। इस पहल भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेस के विद्यार्थियों के एक दल ने अपना योगदान देते हुए एक नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया। इस नुक्कड़ नाटक के जरिए विमानतल पर आने जाने वाले यात्रियों तथा उन्हें छोड़ने आए लोगों को ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, भोपाल के निदेशक फ्लाइट लेफ्टिनेंट आकाशदीप माथुर ने कहा कि यंग इंडियन्स की यह पहल निसंदेह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि हम सभी को इस मुहिम में शामिल होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हम अपने वाहनों में प्रेशर हॉर्न या मल्टीपल हॉर्न का इस्तेमाल न करके और बहुत जरूरी होने पर ही हॉर्न का इस्तेमाल कर अपना योगदान दे सकते हैं।

यंग इंडियन्स, भोपाल के चेयरमेन राकेश सुखरामानी ने कहा कि शहर में बढ़ते वाहन व उनके तेज हॉर्न से ध्वनि प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बनता जा रहा है। ध्वनि प्रदूषण का आंकड़ा मान्य मापदण्डों की सीमा से अधिक होता जा रहा है। इसे रोकने कोई प्रभावी कानून नहीं है। इससे लोगों में हायपरटेंशन, दिल की अन्य बीमारियां, चिड़चिड़ापन, मानसिक अस्वस्थता व बहरापन सहित दुर्घटनाग्रस्त होने आदि की समस्या बढ़ रही है।

हॉर्न नॉट ओके प्लीज अभियान के भोपाल वर्टिकल हेड सौरभ शर्मा ने बताया कि केन्द्र सरकार जल्द ही ध्वनि प्रदूषण को रोकने एक अध्यादेश लाने जा रही है। इस अध्यादेश के पारित हो जाने के बाद ज्यादा हॉर्न बजाने अथवा निर्धारित हॉर्न के स्थान पर अधिक आवाज पैदा करने वाले हॉर्न का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों पर 500 से लेकर 10,000 रूपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

अभियान की नेशनल हेड सुश्री प्रकृति जैन ने कहा कि दोपहिया से लेकर चार पहिया वाहन और ट्रकों व बसों तक सड़कों पर तेज व अनावश्यक हॉर्न का उपयोग किया जाता है। एक रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने कहा कि वाहनों का ध्वनि प्रदूषण देशभर में होने वाले प्रदूषण का 65 से 70 प्रतिशत तक होता है। इस प्रदूषण से लोग बड़ी संख्या में बीमारियों का शिकार बन रहे हैं।

Related News

Latest Tweets