डूब की भूमि को खेती में देने में हुई अनियमिततायें

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: Admin                                                                         Views: 431

Bhopal: नये सिरे से सरकार को जारी करने पड़े निर्देश
01 जनवरी 2017। प्रदेश के बांधों को बनाने से डूब में आई भूमि को पानी उतरने पर कुछ समय के लिये उस डूब वाली भूमि को किसानों को सिंचाई हेतु दिया जाता है। इस काम में काफी अनियमिततायें हो रही थीं। इसलिये अब राज्य सरकार को नये सिरे से निर्देश जारी करने पड़े हैं और अब प्रति एकड़ दर का भी निर्धारण कर दिया गया है।

जल संसाधन विभाग के सभी मुख्य अभियंताओं को भेजे अपने ताजा निर्देश में सरकार ने कहा है कि प्राय: यह देखा जा रहा है कि बांध के डूब क्षेत्र से निकली भूमि को कृषि कार्य हेतु पट्टे पर दिये जाने में अनियमिततायें बरती जा रही हैं। इसलिये अब नये निर्देशों के तहत डूब से निकली भूमि को कृषि कार्य हेतु दिया जाये।

मुख्य अभियंताओं से कहा गया है कि वे प्रत्येक कृषक को पट्टे पर दी जाने वाली भूमि का क्षेत्रफल, अन्य भूमि सहित 5 एकड़ से अधिक एवं एक एकड़ से कम नहीं होना चाहिये। इस डूब वाली भूमि के पट्टों का आवंटन सभी पात्र व्यक्तियों को करने के पश्चात शेष बची भूमि का आवंटन खुली नीलामी से किया जाये एवं नीलामी की न्यूनतम दर एक हजार रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया जाये। यदि कोई पट्टेदार निर्धारित समय के अंदर पट्टे की राशि जमा नहीं करता है तो उसे भविष्य में भूमि पट्टे पर नहीं दी जाये। डूब से निकली भूमि कृषि कार्य हेतु पट्टे पर दिये जाने से राजस्व प्राप्ति की रसीद निर्धारित प्रपत्र एमपीटीसी-6 फार्म में ही दी जाये एवं प्राप्त राजस्व को तत्काल शासकीय खाते में जमा किया जाये। मुख्य अभियंताओं से यह भी कहा गया है कि डूब से निकली भूमि कृषि कार्य हेतु आवंटित किये जाने के लिये विज्ञापन जारी करते समय पर्याप्त सावधानी बरती जाना आवश्यक है।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि बांध के निर्माण से बहुत सारी भूमि डूब में आती है तथा इन्हें सरकार मुआवजा देकर अधिगृहित करती है। पानी उतरने पर यह डूब वाली भूमि खाली हो जाती है तथा उपजाऊ होने इसे खेती हेतु दिया जाता है। प्राथमिकता उन कृषकों को दी जाती है जिनसे यह भूमि अधिगृहित की गई है। इस कार्य में काफी अनियमिततायें देखने में आई थीं, इसलिये नये सिरे से इस संबंध में निर्देश जारी किये गये हैं।



- डॉ नवीन जोशी

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