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म.प्र. राष्ट्रभाषा
प्रचार समिति द्वारा बसंत व्याख्यानमाला के तहत ''मंथन'' कार्यक्रम में
''अपराध-विवेचना एवं सामाजिक जागरूकता'' व्याख्यान का आयोजन किया गया इस अवसर पर
समाजशास्त्री श्रीमती आशा शुक्ला ने कहा कि सुविधाभोगी जीवनशैली अपराधवृत्ति को
बढ़ाती है। मानव अधिकार, फारेंसिक साइंस, शिक्षाविद्, पुलिस और समाजशास्त्रियों को
एकजुट होकर उन कारणों को खोजना होगा जिससे समाज में अपराधवृत्ति को बढ़ावा मिलता
है। उन्होंने कहा कि आम जनता तो दूर की बात है प्रबुद्ध वर्ग के लोग भी फारेंसिक
तकनीकियों के बारे में कुछ खास नहीं जानते हैं। आपराधिक घटना में पीड़ित की मदद
करने की हड़बड़ी में वे घटनास्थल पर उपलब्ध साक्ष्यों को ही नष्ट कर डालते हैं।
श्रीमती शुक्ला ने कहा कि साइबर क्राइम बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। संसार में पोर्न
उद्योग का कारोबार 54 बिलियन डालर का हो गया है। ऐसे वातावरण में चंद फारेंसिक
विशेषज्ञों और पुलिस के विवेचना दलों से यह अपेक्षा कैसे की जा सकती है कि इतने
बड़े पैमाने के अपराध क्षेत्र पर नियंत्रण रखा जाये। उन्होंने कहा कि यह सही है कि
पुलिस का दायित्व समाज को सुरक्षा देना है, लेकिन समाज कितनी मदद पुलिस को करता है
इस पर भी विचार करना होगा।
14 फरवरी 2010,
हिन्दी भवन, भोपाल
Video by
www.prativad.com
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