|
|
|
|
|
 |
|
|
सस्ता, सुलभ और शीघ्र
न्याय दिलाना बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री चौहान द्वारा 'आपराधिक न्याय प्रशासन' संगोष्ठी
का शुभारंभ
भोपाल, 13 जून। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान
ने कहा है कि लोगों को सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय दिलाना
बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सुशासन और बेहतर कानून
व्यवस्था के बिना प्रदेश को समृध्द और विकसित नहीं बनाया जा
सकता। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज स्थानीय समन्वय भवन सभागार
में आपराधिक न्याय प्रशासन पर केन्द्रित संगोष्ठी का शुभारंभ
कर रहे थे। प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा आयोजित इस
एक दिवसीय संगोष्ठी में प्रदेश के शासकीय अधिवक्ताओं सहित
लोक अभियोजक शामिल हुए। विधि राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र
शुक्ल समारोह के विशेष अतिथि थे। समारोह में मुख्य सूचना
आयुक्त श्री पी.पी. तिवारी, प्रमुख सचिव विधि श्री एन.के.
गुप्ता और जबलपुर की महापौर श्रीमती सुशीला सिंह भी उपस्थित
थीं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश को समृध्द और
विकसित बनाने की राज्य शासन की सात सर्वोच्च प्राथमिकताओं
में सुशासन और बेहतर कानून व्यवस्था को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि अन्याय और शोषण के खात्मे के साथ लोगों को
समय पर न्याय दिलाये बगैर इन दोनों प्राथमिकताओं की पूर्ति
नहीं हो सकती। श्री चौहान ने कहा कि लोगों को शीघ्र, सस्ता
और सुलभ न्याय दिलाने के लिये न्यायपालिका की सभी आवश्यकताओं
की पूर्ति की जायेगी। श्री चौहान ने कहा कि संगोष्ठी के
निष्कर्षों पर राज्य शासन पूरी गंभीरता से कार्रवाई करेगा।
श्री चौहान ने जानकारी दी कि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के 54
स्वीकृत न्यायालयों के लिये इतने ही लोक अभियोजकों के पद भी
स्वीकृत किये जा रहे हैं। श्री चौहान ने लोक अभियोजकों से
अपने दायित्वों का पूरी दक्षता, कर्मठता और समर्पण से
निर्वहन करने को कहा। उन्होंने कहा कि विधि के शासन की
स्थापना में लोक अभियोजक बड़ी भूमिका निबाह सकते हैं।
न्यायमूर्ति श्री दीपक मिश्रा ने मुख्य वक्तव्य देते हुए
सुशासन को प्रत्येक शासन व्यवस्था का मूल भाव बताया और कहा
कि लोगों को समय पर न्याय दिलाकर सुशासन दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लोक अभियोजक आपराधिक न्याय प्रशासन में सत्य
के प्रतिनिधि है। श्री मिश्रा ने निष्पक्षता को आपराधिक
न्याय प्रशासन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि लोगों की
विधिक समस्याएँ राज्य के लिये चुनौती है और उनका समय पर
निदान विधि के शासन के लिये जरूरी है।
संगोष्ठी के अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व
न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री पी.पी. नावलेकर ने कहा कि भारतीय
न्यायपालिका द्वारा जनहित याचिकाओं की सुनवाई और उन पर दिये
गये फैसलों को पूरे विश्व में सराहा गया है। श्री नावलेकर ने
आपराधिक न्याय प्रशासन के लिये लोक अभियोजनकों से 'प्ली
बारगेन' प्रावधान का इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने कहा कि
आपराधिक विधि में हाल ही में हुए इस संशोधन का व्यापक अध्ययन
कर लोक अभियोजक और शासकीय अधिवक्ता न्याय प्रक्रिया को
सस्ता, सरल और सुलभ बनाने में अपनी भूमिका का निर्वाह कर
सकते हैं।
प्रारंभ में प्रदेश के महाधिवक्ता श्री रविनंदन सिंह ने विषय
प्रवर्तन किया। उन्होंने कहा कि न्याय प्रशासन की एक
महत्वपूर्ण कड़ी लोक अभियोजकों और शासकीय अधिवक्ताओं को अपने
कार्यक्षेत्र में दक्ष और अद्यतन बनाने के लिये आयोजित यह
संगोष्ठी इस श्रंखला में तीसरी है। श्री सिंह ने कहा कि
पिछले पांच साल में राज्य शासन ने न्यायपालिका की सुदृढ़ता के
लिये अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान
में कार्यरत प्रथम और द्वितीय श्रेणी के 827 सिविल जजों में
से 361 पद पिछले पाँच साल में ही सृजित किये गये हैं। इसी
तरह लोक अभियोजकों के भी 261 पद इसी अवधि में सृजित हुए।
श्री सिंह ने शासकीय अधिवक्ताओं के पद को सम्मानजनक बनाये
जाने की जरूरत रेखांकित की। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का
उद्देश्य लोक अभियोजकों और शासकीय अधिवक्ताओं को प्रशिक्षित,
अद्यतन और गुणवत्तावान बनाना है।
प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान और अन्य अतिथियों ने
देवी सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर संगोष्ठी
का शुभारंभ किया। श्री सुदेश वर्मा सहित अन्य शासकीय
अधिवक्ताओं ने अतिथियों को बैज लगाये। मुख्यमंत्री श्री
चौहान और अन्य अतिथियों का महाधिवक्ता श्री रविनंदन सिंह,
अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री आर.एस. पटेल और श्री कुटुम्बले, उप
महाधिवक्ता श्री मोढ़े, शासकीय अधिवक्ता श्रीमती सुशीला
पालीवाल और शासकीय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री गौर ने
पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। समारोह का संचालन और आभार
प्रदर्शन अतिरिक्त महाधिवक्ता त्रिलोचन सिंह रूपराह ने किया।
संगोष्ठी में प्रदेश भर से आये शासकीय अधिवक्ता, सहायक
शासकीय अधिवक्ता, जिला अभियोजन अधिकारी, लोक अभियोजक, सहायक
लोक अभियोजक और विधि विभाग एवं महाधिवक्ता कार्यालय के
अधिकारी उपस्थित थे।
Video by
www.prativad.com,
13/Jun/2009,
Bhopal, MP, India
|
|
|
|
|
|
|
|