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पत्रकारिता में यदि गलत निष्कर्ष निकालने वालों का बाहुल्य होगा तो समाज और राष्ट्र
तो बर्बाद होगा:
कुलदीप चन्द्र
अग्निहोत्र
नारद जयंती पर
भविष्य का मीडिया विषय पर परिसंवाद आयोजित
Bhopal:Saturday, May 29, 2010: मानवता को पोषित करने वाली मीडिया का ही भविष्य है
और हिन्दुस्तान की मीडिया राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों से अलग नहीं हो सकती। नारद
जयंती के अवसर पर 'भविष्य का मीडिया राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकार' विषय पर आयोजित
परिसंवाद में वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार पद्मश्री डॉ.मुजफ्फर हुसैन ने यह विचार
व्यक्त किये। जनसम्पर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
थे।
जनसम्पर्क मंत्री ने महत्वपूर्ण विषय पर परिसंवाद आयोजित करने के लिए आयोजकों को
बधाई दी। उन्होंने परिसंवाद के विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को
पुरस्कार वितरित किये। कु.अंकिता मिश्रा को 2100 रुपये का प्रथम, कु.पूजा
श्रीवास्तव को 1500 रुपये का द्वितीय और श्री कुन्दन पाण्डे को 1100 रुपये का तृतीय
पुरस्कार दिया गया। दो विजेताओं को सान्त्वना पुरस्कार दिये गये। सभी विजेताओं को
स्मृति चिन्ह भेंट किये गये। जनसम्पर्क मंत्री ने भविष्य की मीडिया और सामाजिक
सरोकार परिसंवाद में विद्वानों द्वारा व्यक्त विचारों को प्रेरणा दायक बताया।
पद्मश्री डॉ. मुजफ्फर हुसैन ने कहा कि देवर्षि नारद के साथ ही भगवान गणपति
पत्रकारिता के प्रतीक देवता है। पत्रकारिता के मुख्य गुणों समाचार सुनने, सूघने,
खोजने और प्रकाशन के पूर्व तक उसको गोपनीय रखने की आवश्यकता को श्री हुसैन ने गणपति
के प्रतीकों से तुलना कर विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि मीडिया चाहे प्रिंट हो
या इलेक्ट्रानिक सबसे मुख्य बात है उस पर कन्ट्रोल किसका है। उन्होंने कहा कि
पत्रकारिता में तटस्थता के साथ जनता और राष्ट्र के हित में एक्टीवीजम स्वीकार हो
सकता है, जो बाजारवाद और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में संरक्षक बनेगा वही भविष्य
का मीडिया होगा। तथ्यों को तोड़ने- मरोड़ने से पत्रकारिता नहीं होती। अखबार में
संपादक की संस्था को मजबूत बनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का दायरा बढ़ा
है, तकनीक विकसित हुई है, साधन बढ़े है। लिपियों के एकीकरण को उन्होंने आवश्यक बताया।
हिमालच प्रदेश विश्वविद्यालय के निदेशक और वरिष्ठ पत्रकार श्री कुलदीप चन्द्र
अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकारिता अन्य व्यवसाय की तरह हो गई है, इसमें भी लाभ का
गणित नियंत्रण की स्थिति में है। वेबसाईट की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय
भाषाओं की मीडिया ही भारतीय पत्रकारिता की आत्मा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों के
पत्रकारिता विभाग के पाठ्यक्रमों में भारतीय मूल्यों के समावेश को भविष्य की
पत्रकारिता के लिए आवश्यक बताया।
लघु उद्योग भारती के डॉ.अजय नारंग ने भी अपने विचार व्यक्त किये। विश्व संवाद
केन्द्र के श्री अनिल सौमित्र ने कार्यक्रम का संचालन किया। हिन्दुस्तान समाचार के
ब्यूरो प्रमुख श्री मयंक चतुर्वेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
Video by
www.prativad.com,
29/May/2010,
Bhopal, MP, India
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