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आर्थिक विषमता के
कारण अपराध बढ़ते हैं - जस्टिस धर्माधिकारी, ''अपराध-विवेचना एवं सामाजिक जागरूकता''
व्याख्यान का आयोजन
जस्टिस
धर्माधिकारी ने कहा कि निष्पक्ष न्यायदान के लिये समाज को सक्रिय होकर पुलिस और
न्यायिक अधिकारियों को सहयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, संत विनोबा
भावे और श्री सुब्बाराव कर्मयोगी हैं। इन महापुरुषों ने समाज में मानसिकता बदलने के
प्रयास किये हैं। श्री धर्माधिकारी ने कहा कि बेहतर विवेचना और सच्ची गवाही से
निष्पक्ष न्याय मिलता है। उन्होंने कहा कि हिंसा के प्रयोग से हिंसा को ही बढ़ावा
मिलता है इसलिये अब अहिंसा को अपनाना आवश्यक है। अपराधवृत्ति बढ़ने के पीछे आर्थिक
विषमता भी महत्वपूर्ण कारक है। श्री धर्माधिकारी ने कहा कि नक्सलवाद जैसी समस्याएं
सर्वहारा वर्ग के शोषण के कारण ही पैदा हुई हैं। इसलिये बड़ी समस्याओं के कारण तलाश
करके उनके निदान के प्रयत्न किये जाने चाहिये। श्री धर्माधिकारी ने कहा कि
सामुदायिक पुलिसिंग योजना में अच्छे लोगों को पुलिस की मदद करने, परिवार परामर्श
केन्द्रों के माध्यम से परिवारों को टूटने से बचाने आदि जैसे काम करके पुलिस की बड़ी
मदद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि म.प्र. मानव अधिकार आयोग ने आपराधिक घटनाओं से
पीड़ितों की मदद के लिये शासन को सुझाव देकर एक विक्टिमोलॉजी प्रोजेक्ट मंजूर करवाया
है। इसके तहत जिला स्तर पर सलाहकार समितियां गठित की गई हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत
पीड़ितों को वित्तीय, विधिक, चिकित्सकीय और उनके सामाजिक पुनर्वास जैसी सहायता
उपलब्ध कराना संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की न्याय प्रणाली में
कितना भी गंभीर अपराधी क्यों न हो उसका पक्ष सुनकर तथा ट्रायल करने के बाद ही सजा
देने का प्रावधान है। भीड़ तंत्र के न्याय की व्यवस्था हमारे देश में नहीं है।
14 फरवरी 2010,
हिन्दी भवन, भोपाल
Video by
www.prativad.com
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