🔴 TRENDING NOW!
एसबीआई कार्ड ने एसबीआई योनो के ज़रिए फिक्स्ड डिपॉज़िट पर आधारित सिक्योर्ड एडवांटेज एसबीआई कार्ड लॉन्च किया समीरा रेड्डी के साथ हॉर्लिक्स ने रोजमर्रा के पोषण में प्रोटीन की जरूरत पर डाला जोर, लॉन्च किया हॉर्लिक्स प्रोटीन पाउडर ब्लैक होल के शक्तिशाली जेट से बदल सकता है आकाशगंगाओं का भविष्य, भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा अहम संकेत ‘आपके मज़ेदार ट्रॉल्स का भी मज़ा लिया’: ‘द पैराडाइज़’ की मिली-जुली प्रतिक्रिया पर नानी ने कही ये बात केंद्रीय मंत्री गडकरी-सीएम डॉ. यादव ने जनता को दी बड़ी सौगात, अब आप कर सकेंगे सरकार की बसों में 'लग्जरी' सफर सीतारमण ने ग्लोबल टैक्स नियमों में BRICS की बड़ी भूमिका की वकालत, भारत ने दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव रखा राधिका आप्टे का खुलासा: लीक हुई निजी फुटेज के बाद 4 दिनों तक घर से नहीं निकलीं भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव MP पुलिस के नए सोशल मीडिया नियम: वर्दी में रील्स और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर रोक

भारत ने संयुक्त राष्ट्र को बताया 'एक पुरानी कंपनी'

👤
prativad
👁 2776 व्यूज
📍 भोपाल
भारत ने संयुक्त राष्ट्र को बताया 'एक पुरानी कंपनी'
7 अक्टूबर 2024। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे एक "पुरानी कंपनी" के रूप में वर्णित किया है, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ है। रविवार को कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में बोलते हुए, जयशंकर ने कहा कि महामारी और सैन्य संघर्षों जैसी महत्वपूर्ण वैश्विक समस्याओं के समाधान में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका नाकाफी रही है। उन्होंने कहा कि यह निकाय अब "केवल जगह घेर रहा है" और अपनी प्रभावशीलता खो चुका है।

विदेश मंत्री ने वैश्विक संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह समय है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाए और विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा, "इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र कहाँ है? यह सिर्फ तमाशबीन बना हुआ प्रतीत होता है।"

जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के दौरान संयुक्त राष्ट्र की निष्क्रियता की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि महामारी जैसी आपदा के समय भी संयुक्त राष्ट्र से कोई ठोस पहल नहीं की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र में दिए गए संबोधन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक शासन में सुधार न केवल जरूरी है, बल्कि यह शांति और विकास के लिए "कुंजी" है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है, और इसी क्रम में ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिलकर उसने महासभा के 79वें सत्र के दौरान वार्ता की धीमी गति पर "निराशा" व्यक्त की थी।

जयशंकर ने यह भी कहा कि विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में कोटा सुधारों की प्रगति में रुकावट आई है। उन्होंने इसका कारण "राजनीतिक प्राथमिकताओं" को बताया, जिनमें से एक यूक्रेन और दूसरा मध्य पूर्व में जारी संघर्ष हैं।

मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि संयुक्त राष्ट्र की विफलता के चलते अब कई देश वैकल्पिक समाधान तलाशने लगे हैं। उन्होंने कोवैक्स तंत्र, जो कोविड-19 वैक्सीन की समान वितरण व्यवस्था के लिए बनाई गई थी, और भारत-फ्रांस के नेतृत्व में बने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का उदाहरण दिया।

ब्रिक्स समूह के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि इस संगठन में शामिल होने की देशों की रुचि इस बात का संकेत है कि अब वैश्विक संबंधों में अधिक विकल्पों की तलाश की जा रही है। "यह केवल संयुक्त राष्ट्र ही नहीं है जो पुराना हो रहा है, बल्कि वैश्विक व्यवस्था भी अपनी प्रासंगिकता खो रही है," उन्होंने कहा।

जयशंकर का यह बयान वैश्विक मंच पर भारत की प्रभावशाली भूमिका और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की उसकी पुरानी मांग को दोहराता है।
Tags :