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सरकारी अस्पतालों में अब रोगी के शव बेड पर नहीं रखे जायेंगे

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Digital Desk
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📍 भोपाल
सरकारी अस्पतालों में अब रोगी के शव बेड पर नहीं रखे जायेंगे
2 नवम्बर 2016, मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अब रोगी के शव वार्ड के बेड पर नहीं रखे जायेंगे बल्कि उन्हें परिजनों के सुपुर्द कर शव अस्पताल के कारीडोर में बेड अथवा स्ट्रेचर पर रखा जायेगा तथा शव के आसपास स्क्रीन लगायी जायेगी।



यह ताजा हिदायत राज्य सरकार ने सभी जिलों के सीएमओ एवं सिविल सर्जनों को जारी की है। हिदायत में इस बात पर अफसोस जाहिर किया गया है कि शासकीय चिकित्सालय में रोगी की मृत्यु के बाद भी रोगी की देह वार्ड में ही रखी जाती है। ऐसा करने से अन्य मरीजों पर मानसिक तौर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिससे कभी-कभी मरीजों की बीमारी बढऩे की संभावना हो सकती है। इसके अलावा वार्ड में अवसाद एवं उदासीपूर्ण वातावरण हो जाता है। अन्य मरीजों को परेशानी एवं संक्रमण होने का खतरा भी रहता है।



ताजा हिदायत में कहा गया है कि यदि परिजनों द्वारा शव को ले जाने में विलम्ब हो रहा है अथवा पोस्टमार्टम किया जाना है तो उसे मारचुरी रेफ्रिजरेटर में सुरक्षित रखकर वैधानिक औपाचारिकतायें पूर्ण की जायें। इसके अलावा रोगी की मृत्यु उपरान्त मृतक के परिजनों को शव गंतव्य तक ले जाने में परेशानी हो तो समन्वय कर अस्पताल में उपलब्ध शांति वाहन अथवा स्थानीय स्वयंसेवी संस्था/नगरीय निकाय से समन्वय स्थापित कर शव वाहन उपलब्ध कराने हेतु मृतक परिवार को सहयोग प्रदान करें जिससे मृतक के निकट संबंधियों को यहां-वहां न भटकना पड़े।



संचालक अस्पताल प्रशासन डा. केके ठस्सु के अनुसार, अस्पताल में मृत रोगी के शव को उसके गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अस्पताल की नहीं है बल्कि यह स्थानीय प्रशासन की है। झारखण्ड, छत्तीसगढ़ एवं मप्र में शव सायकल या स्वयं ढोकर ले जाने की घटनायें सामने आने पर उच्च स्तरीय बैठक हुई थी जिसमें अब यह तजा हिदायत सभी सीएमओ और सिविल सर्जनों को जारी की गई है।





- डॉ नवीन जोशी
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