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गौहर महल में कुम्हारों की कलाकृतियों ने बिखेरा आकर्षण, 'भोपाल कुम्हार बाजार 2024' का समापन

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📍 भोपाल
गौहर महल में कुम्हारों की कलाकृतियों ने बिखेरा आकर्षण, 'भोपाल कुम्हार बाजार 2024' का समापन
2 दिसंबर 2024। भोपाल के ऐतिहासिक गौहर महल में आयोजित चार दिवसीय 'भोपाल कुम्हार बाजार 2024' का रविवार को समापन हुआ। इस प्रदर्शनी में देशभर से आए करीब 50 कुम्हारों ने अपनी अनूठी और रचनात्मक कलाकृतियां प्रदर्शित कीं, जो दर्शकों को बेहद आकर्षित कर रही थीं।

प्रदर्शनी की खास झलकियां
प्रोफेसर अंजू पवार (बड़ौदा): उन्होंने कछुआ, मछली, मेंढक, और बत्तख जैसी सजावटी मूर्तियां पेश कीं, जिन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इन मूर्तियों को घर में शुभ माना जाता है।
कुणाल उइके (नागपुर): उन्होंने टेराकोटा से बनी दीवार पर सजाने योग्य छोटी-छोटी वस्तुएं और सरसों के दाने के आकार के मिट्टी के आइटम पेश किए।
भान सिंह (भरतपुर): मिट्टी के बर्तन और शोपीस उनकी खासियत थे। उनका 15,000 रुपये का गमला, जो घड़े के आकार में तैयार किया गया, दर्शकों का केंद्र बना।
सुरेश प्रजापति (मुंबई): मिनिएचर सिरेमिक आर्टिस्ट ने छोटे-छोटे जीवों की कलाकृतियां प्रदर्शित कीं। उन्होंने बताया कि इन जीवों को बनाने से पहले उनका स्केच तैयार किया जाता है।
समीर मोरे (पुणे): प्रकृति से प्रेरित मिट्टी के बर्तन और प्राकृतिक रंगों से सजी कलाकृतियां उन्होंने प्रदर्शित कीं।
पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के दौरान शिवानी तनेजा की पुस्तक ‘रेलवे क्रॉनिकल्स ऑफ भोपाल’ और माया मौर्य की ‘गांठ’ का विमोचन किया गया। ये पुस्तकें भोपाल की संस्कृति, इतिहास और सामाजिक पहलुओं को उजागर करती हैं। संगीतकार शशांक वर्मा की विशेष प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी रंगीन बना दिया।

'भोपाल पॉटर्स डेवलपमेंट वेलफेयर' की पहल
इस आयोजन का यह 12वां सीजन था, जिसे भोपाल पॉटर्स डेवलपमेंट वेलफेयर द्वारा आयोजित किया गया। इस बाजार ने न केवल कला प्रेमियों को एक अनूठा अनुभव दिया बल्कि मिट्टी की कला और कुम्हारों के कौशल को एक नया मंच भी प्रदान किया।
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