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भारत ने बांग्लादेश से ‘विवादित बयानबाजी से बचने’ का अनुरोध किया

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📍 नई दिल्ली
भारत ने बांग्लादेश से ‘विवादित बयानबाजी से बचने’ का अनुरोध किया
4 अप्रैल 2025। ढाका में सरकार बदलने के बाद पहली बार हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारत और बांग्लादेश के नेताओं ने आपसी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने बैंकॉक में छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की।

✔️ भारत-बांग्लादेश संबंधों पर मोदी का संदेश
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-बांग्लादेश के बीच सकारात्मक और रचनात्मक संबंधों को मजबूत करने की इच्छा जताई, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ‘परिस्थितियों को बिगाड़ने वाली बयानबाजी से बचना जरूरी है।’ भारतीय विदेश मंत्रालय ने वार्ता के बाद एक बयान में यह जानकारी दी।

मोदी ने अवैध सीमा पार करने और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने हिंदू समुदाय सहित सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भारत की चिंताओं को दोहराया।

✔️ बांग्लादेश की प्रतिक्रिया और हसीना का प्रत्यर्पण मुद्दा
यूनुस ने वार्ता के दौरान कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने संबंधों को अत्यंत महत्व देता है। उन्होंने भारत-बांग्लादेश की दोस्ती को इतिहास, भौगोलिक निकटता और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित बताया।

बैठक के दौरान यूनुस ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की स्थिति पर भी चर्चा की। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार हसीना और उनके पूर्व सहयोगियों के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है, ताकि उन पर हत्या, यातना, अपहरण, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार जैसे आरोपों में मुकदमा चलाया जा सके। हालांकि, भारत सरकार ने इस अनुरोध पर अब तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।

यूनुस ने यह भी आरोप लगाया कि हसीना मीडिया में भड़काऊ बयानबाजी कर रही हैं और बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर रही हैं।

✔️ बंगाल की खाड़ी और चीन की भूमिका
हाल ही में यूनुस द्वारा बांग्लादेश को चीन के संभावित व्यापारिक और रसद भागीदार के रूप में पेश करने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव और बढ़ गया। उन्होंने बंगाल की खाड़ी को “चीन का एकमात्र संरक्षित क्षेत्र” बताने की कोशिश की, जिससे भारत ने कड़ी आपत्ति जताई।




भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

“भारत के पास बंगाल की खाड़ी में सबसे लंबी तटरेखा है, जो 6,500 किमी से अधिक है। भारत न केवल पांच बिम्सटेक सदस्यों के साथ सीमा साझा करता है, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप और आसियान के बीच महत्वपूर्ण कड़ी भी प्रदान करता है।”

✔️ मोंगला बंदरगाह परियोजना: भारत-चीन की प्रतिस्पर्धा?
यूनुस की हालिया चीन यात्रा के दौरान बांग्लादेश और चीन ने मोंगला बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना की कुल लागत 33 मिलियन डॉलर है, जिसमें चीन से 29 मिलियन डॉलर का ऋण शामिल है।

गौरतलब है कि जुलाई 2024 में, जब हसीना की सरकार को हटाया गया था, उससे ठीक एक महीने पहले भारत ने मोंगला बंदरगाह के एक टर्मिनल के संचालन का अधिकार प्राप्त किया था। हालांकि, हाल ही में प्रकाशित बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों में भारत की भागीदारी का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट नहीं हुआ कि नई दिल्ली अभी भी इस परियोजना का हिस्सा है या नहीं।

भारत और बांग्लादेश के संबंधों में हाल के घटनाक्रमों से राजनीतिक और कूटनीतिक जटिलताएं बढ़ी हैं। भारत ने रचनात्मक सहयोग की प्रतिबद्धता जताते हुए भड़काऊ बयानबाजी से बचने की सलाह दी। वहीं, बांग्लादेश की चीन के साथ बढ़ती नजदीकियों और शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग पर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
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