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रेलवे में बढ़ेगी सुरक्षा और तकनीकी निगरानी, पर्यवेक्षकों की भर्ती का रास्ता खुला

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📍 गोरखपुर
रेलवे में बढ़ेगी सुरक्षा और तकनीकी निगरानी, पर्यवेक्षकों की भर्ती का रास्ता खुला
प्रतीवाद डेस्क | गोरखपुर, 2 जुलाई 2025:

भारतीय रेलवे में पर्यवेक्षकों (Supervisors) की भर्ती को लेकर बड़ी पहल सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने देश भर के सभी क्षेत्रीय रेलवे ज़ोन से पर्यवेक्षी स्तर के नए पदों के सृजन के लिए आवश्यकताओं का आकलन कर जल्द विवरण मांगा है। इस कदम को रेलवे संरक्षा तंत्र को मजबूत करने और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

कहां होंगे नए पद?
बोर्ड का प्रस्ताव मुख्य रूप से परिचालन (Operations) और इंजीनियरिंग (Engineering) विभागों से जुड़ा है। इसमें ग्रुप C के ग्रेड पे ₹4,200 और ₹4,600 पर अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की भर्ती का प्रावधान रखा गया है।

रेलवे बोर्ड के निदेशक (सिविल इंजीनियरिंग-जी) किशन रावत ने 30 जून 2025 को सभी ज़ोनल महाप्रबंधकों को पत्र लिखकर पांच मुख्य बिंदुओं और चार पूरक बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है।

📌 इन बिंदुओं पर मांगी गई मुख्य जानकारी:
अतिरिक्त पर्यवेक्षी पदों की कार्यात्मक आवश्यकता

वर्तमान कार्यभार और पर्यवेक्षी अवधि

नई भर्ती से दक्षता और सुरक्षा पर संभावित प्रभाव

मौजूदा स्तर पर स्थायित्व के आंकड़े

कैडर प्रबंधन और करियर प्रगति के लिए दीर्घकालिक लाभ

📋 पूरक जानकारी के चार अहम बिंदु:
स्वीकृत बनाम वर्तमान कार्यशील संख्या

रिक्त पदों की स्थिति

आगामी सेवानिवृत्ति और अनुमानित मानव संसाधन अंतराल

नई तकनीक और ट्रैक मशीनों के आने से उत्पन्न मांग

🚆 संरक्षा और रोजगार — दोनों में मजबूती
आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (AIRF) और एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री के.एल. गुप्ता ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि “ट्रेनों के सुरक्षित और निर्बाध संचालन के लिए तकनीकी पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाना समय की मांग है।” उन्होंने बताया कि 24–25 अप्रैल को स्थायी वार्ता तंत्र (PNM) की बैठक में यूनियन ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।

✅ क्या है असर?
रेलवे बोर्ड के इस फैसले से न केवल संरक्षा और दक्षता को बल मिलेगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुल सकते हैं। देश की सबसे बड़ी परिवहन सेवा में तकनीकी निगरानी और निरीक्षण को सुदृढ़ करना रेलवे की प्राथमिकता बनता जा रहा है — और यह फैसला उसी दिशा में एक अहम कदम है।
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