🔴 TRENDING NOW!
सीतारमण ने ग्लोबल टैक्स नियमों में BRICS की बड़ी भूमिका की वकालत, भारत ने दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव रखा राधिका आप्टे का खुलासा: लीक हुई निजी फुटेज के बाद 4 दिनों तक घर से नहीं निकलीं भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव MP पुलिस के नए सोशल मीडिया नियम: वर्दी में रील्स और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर रोक मध्यप्रदेश का चारों ओर होगा विकास, सीएम डॉ. मोहन ने डेवलमेंट के लिए मंजूर किए 13 हजार 790 करोड़ रुपये ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी

क्या एलियंस सुन रहे हैं हमारी बातें? धरती के रेडियो संकेत पहुँच रहे हैं अंतरिक्ष तक!

👤
prativad
👁 7591 व्यूज
📍 नई दिल्ली
क्या एलियंस सुन रहे हैं हमारी बातें? धरती के रेडियो संकेत पहुँच रहे हैं अंतरिक्ष तक!
26 अगस्त 2025। नई रिसर्च बताती है कि इंसान चाहे बचपन की बातें छुपाए या आधी रात को रेडियो सुनने का राज़, हमारी प्यारी धरती लगातार ब्रह्मांड में अपनी मौजूदगी का प्रसारण कर रही है।

पेन स्टेट यूनिवर्सिटी और नासा के वैज्ञानिकों ने पाया है कि पृथ्वी से निकलने वाले रेडियो संकेत शायद काफी दूर तक पहुँच चुके होंगे और एलियन सभ्यताएँ इनको सुन भी रही होंगी।

कैसे फैलते हैं धरती के सिग्नल?
धरती से रोज़मर्रा में निकलने वाला रेडियो शोर अंतरिक्ष में लगातार बाहर की ओर जाता है।
नासा का डीप स्पेस नेटवर्क – जो इंसानों द्वारा भेजे गए सबसे ताकतवर और स्थायी सिग्नलों में से एक है – इन तरंगों को और भी गहराई तक फैलाता है।

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने देखा कि किन ग्रहों की स्थिति के कारण ये रेडियो संकेत सबसे स्पष्ट रूप से अंतरिक्ष में पहुँचते हैं।

कहाँ है सबसे ज्यादा संभावना?
मंगल ग्रह – यहाँ से गुजरते हुए हमारे संकेतों के पकड़े जाने की संभावना सबसे ज्यादा, लगभग 77% है।

शुक्र, बृहस्पति और शनि – इनके साथ संरेखण होने पर यह संभावना घटकर सिर्फ 12% रह जाती है।

अनजान बाह्यग्रह (Exoplanets) – इनके लिए तो मौके लगभग न के बराबर हैं।

वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
इस टीम में शामिल शोधकर्ता पिंचेन फैन का कहना है कि “अगर किसी दूर के ग्रह या अंतरिक्षयान की दिशा इन रास्तों से मिलती है, तो वे हमारे भेजे गए इन संकेतों को पकड़ सकते हैं।”

नासा के वरिष्ठ वैज्ञानिक जोसेफ लाज़ियो ने जोड़ा – “हमारे भेजे गए रेडियो सिग्नल्स ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा ताकतवर हैं। अगर कहीं एलियन सभ्यता होगी, तो वही इन्हें पकड़ने का सबसे आसान जरिया है।”

एलियन खोज को मिलेगा रोडमैप
यह नया अध्ययन SETI (Search for Extraterrestrial Intelligence) को यह समझने में मदद कर सकता है कि किस दिशा और दूरी पर नज़र रखने से एलियंस को ढूँढ़ने की संभावना बढ़ेगी।

पेन स्टेट के खगोलभौतिकीविद् जेसन राइट के मुताबिक – “हमारी रोज़मर्रा की कम्यूनिकेशन गतिविधियाँ खुद एक तरह की गाइडलाइन हैं, जिससे भविष्य में बुद्धिमान जीवन की खोज और भी सटीक हो सकती है।”

कुल मिलाकर, यह रिसर्च बताती है कि हमारी धरती चुपचाप नहीं है। हो सकता है कि आपकी रात की रेडियो प्लेलिस्ट या फोन कॉल, किसी दूरस्थ ग्रह पर किसी एलियन के कानों तक पहुँच रही हो!
Tags :