🔴 TRENDING NOW!
सीतारमण ने ग्लोबल टैक्स नियमों में BRICS की बड़ी भूमिका की वकालत, भारत ने दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव रखा राधिका आप्टे का खुलासा: लीक हुई निजी फुटेज के बाद 4 दिनों तक घर से नहीं निकलीं भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव MP पुलिस के नए सोशल मीडिया नियम: वर्दी में रील्स और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर रोक मध्यप्रदेश का चारों ओर होगा विकास, सीएम डॉ. मोहन ने डेवलमेंट के लिए मंजूर किए 13 हजार 790 करोड़ रुपये ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी

ट्रम्प का दबाव: यूरोपीय संघ से भारत-चीन पर 100% टैरिफ लगाने की मांग

👤
prativad
👁 11220 व्यूज
📍 नई दिल्ली
ट्रम्प का दबाव: यूरोपीय संघ से भारत-चीन पर 100% टैरिफ लगाने की मांग
10 सितंबर 2025। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय संघ (EU) से कहा है कि वह चीन और भारत से आयात पर 100% तक टैरिफ लगाए। उनका तर्क है कि ऐसा कदम रूस पर दबाव बढ़ाने की संयुक्त रणनीति का हिस्सा होना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, यह मांग हाल ही में वाशिंगटन में अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों की बैठक में उठाई गई, जहाँ यूक्रेन युद्ध के चलते रूस की आर्थिक लागत बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हो रही थी। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ कदम से कदम मिलाने को तैयार है।

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि टैरिफ तब तक जारी रहने चाहिए जब तक चीन रूस से तेल खरीदना बंद न करे। साथ ही यह भी साफ किया गया कि यूरोप जो भी टैरिफ लगाएगा, अमेरिका उसकी नकल करेगा।

EU पहले ही रूस से चीन के ऊर्जा आयात को निशाना बनाते हुए संभावित "सेकेंडरी सैंक्शन" पर शुरुआती चर्चा कर चुका है, लेकिन यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और अमेरिकी समर्थन ज़रूरी है।

भारत और चीन, दोनों ही रूस से सस्ते कच्चे तेल की बड़ी मात्रा खरीद रहे हैं। नई दिल्ली ने साफ कहा है कि उसकी ऊर्जा नीति घरेलू ज़रूरतों पर आधारित है और बाहरी दबाव स्वीकार्य नहीं। पिछले महीने ट्रम्प ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 25% से बढ़ाकर 50% कर दिए थे, जिसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस कदम को "अनुचित और अतार्किक" बताया।

बीजिंग ने भी पश्चिमी दबाव को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करता रहेगा। चीनी अधिकारियों ने चेताया कि "टैरिफ युद्ध में कोई विजेता नहीं होता।"

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में चेतावनी दी कि पश्चिम एशियाई दिग्गजों के साथ "औपनिवेशिक भाषा" का इस्तेमाल बंद करे। उन्होंने कहा, "भारत और चीन जैसे अरबों की आबादी वाले देशों की अपनी मज़बूत अर्थव्यवस्थाएँ और राजनीतिक संप्रभुता है। उन्हें सज़ा देने की कोशिश उनकी प्रगति रोकने के बराबर है, और यह अस्वीकार्य है।"
Tags :