🔴 TRENDING NOW!
सीतारमण ने ग्लोबल टैक्स नियमों में BRICS की बड़ी भूमिका की वकालत, भारत ने दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव रखा राधिका आप्टे का खुलासा: लीक हुई निजी फुटेज के बाद 4 दिनों तक घर से नहीं निकलीं भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव MP पुलिस के नए सोशल मीडिया नियम: वर्दी में रील्स और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर रोक मध्यप्रदेश का चारों ओर होगा विकास, सीएम डॉ. मोहन ने डेवलमेंट के लिए मंजूर किए 13 हजार 790 करोड़ रुपये ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी

कचरे से सोना: वैज्ञानिकों ने खोजा चमत्कारी बैक्टीरिया

👤
prativad
👁 2090 व्यूज
📍 भोपाल
कचरे से सोना: वैज्ञानिकों ने खोजा चमत्कारी बैक्टीरिया
7 नवंबर 2025। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा माइक्रोब खोजा है जो जहरीले धातु अवशेषों को असली सोने में बदलने की क्षमता रखता है। जर्मनी की मार्टिन लूथर यूनिवर्सिटी और टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख के शोधकर्ताओं ने इस दुर्लभ सूक्ष्मजीव Cupriavidus metallidurans की पहचान की है, जो अत्यधिक भारी धातुओं वाले वातावरण में भी जीवित रहता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बैक्टीरिया अपने अंदर मौजूद एक विशेष एंजाइम CopA का उपयोग कर सोने के यौगिकों को डिटॉक्सिफाई करता है। इसी प्रक्रिया के दौरान यह सूक्ष्म सोने के कण बनाता है, जो धीरे-धीरे इकट्ठे होकर छोटे-छोटे कणों का रूप ले लेते हैं। यह प्राकृतिक प्रक्रिया पृथ्वी पर सोने की प्राकृतिक उत्पत्ति को समझाने में अहम कड़ी मानी जा रही है।

हालांकि यह खोज किसी अलौकिक “कचरे से सोना बनाने” वाली तकनीक जैसी लग सकती है, लेकिन वैज्ञानिक साफ कर रहे हैं कि फिलहाल यह शोध प्रकृति के रहस्यों को समझने तक ही सीमित है। लेकिन भविष्य में ऐसी जैविक प्रक्रियाएँ पर्यावरण-अनुकूल तरीके से सोने के निष्कर्षण के नए रास्ते खोल सकती हैं, जिसमें जहरीले रसायनों की जरूरत कम होगी।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज खान उद्योग और पर्यावरणीय अनुसंधान दोनों क्षेत्रों में नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।
Tags :