🔴 TRENDING NOW!
सीतारमण ने ग्लोबल टैक्स नियमों में BRICS की बड़ी भूमिका की वकालत, भारत ने दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव रखा राधिका आप्टे का खुलासा: लीक हुई निजी फुटेज के बाद 4 दिनों तक घर से नहीं निकलीं भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव MP पुलिस के नए सोशल मीडिया नियम: वर्दी में रील्स और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर रोक मध्यप्रदेश का चारों ओर होगा विकास, सीएम डॉ. मोहन ने डेवलमेंट के लिए मंजूर किए 13 हजार 790 करोड़ रुपये ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी

जंग अब डेटा से लड़ी जाएगी? चीन क्वांटम साइबर हथियारों पर दांव लगा रहा

👤
prativad
👁 1569 व्यूज
📍 भोपाल
जंग अब डेटा से लड़ी जाएगी? चीन क्वांटम साइबर हथियारों पर दांव लगा रहा
17 जनवरी 2026। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने खुलासा किया है कि वह पब्लिक इंटरनेट से अहम सैन्य इंटेलिजेंस जुटाने के लिए क्वांटम साइबर वॉरफेयर टूल्स विकसित कर रही है। मकसद साफ है: ओपन-सोर्स डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नज़र रखना और युद्ध से जुड़े विशाल डेटा को बेहद कम समय में प्रोसेस करना।

चीन के साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली के मुताबिक, PLA फिलहाल 10 से अधिक क्वांटम आधारित साइबर टूल्स की टेस्टिंग कर रही है। इन टूल्स में भविष्य के युद्धों के लिए मारक क्षमता से ज्यादा रफ्तार और सूचना की बढ़त को अहम माना जा रहा है।

इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी को एक साझा ऑपरेशनल ढांचे में जोड़ने पर काम कर रहे हैं। संकेत साफ हैं कि चीन अब क्वांटम टेक्नोलॉजी को सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उसे सीधे सैन्य योजना और ऑपरेशन में उतारने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।

PLA इन सिस्टम्स को अलग-अलग हथियारों के बजाय आपस में जुड़े एक नेटवर्क के तौर पर देख रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इनकी टेस्टिंग चांग्शा स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी की सुपरकंप्यूटिंग लैब में की जा रही है।

इसका मतलब क्या है?
PLA की इंफॉर्मेशन सपोर्ट फोर्स से जुड़े शोधकर्ता लियू वेई ने बताया कि टीम “साइबर सिक्योरिटी से संचालित युद्धक्षेत्र जागरूकता के नए मॉडल” पर काम कर रही है। क्वांटम पोजिशनिंग टेक्नोलॉजी बेहद सटीक नेविगेशन सिस्टम को संभव बना सकती है, जो स्पूफिंग और जैमिंग जैसे हमलों से काफी हद तक सुरक्षित होंगे।

एक साल में इकट्ठा किए गए डेटा के आधार पर एक एकीकृत युद्धक्षेत्र मानचित्र तैयार किया गया है। यह मॉडल सिविलियन क्लाउड-बेस्ड डेटा एग्रीगेशन सिस्टम जैसा है, जिसे अब सैन्य जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है।

साइबर सिक्योरिटी पर दिया गया जोर दिखाता है कि PLA अब सूचना नियंत्रण को पारंपरिक रक्षा जितना ही रणनीतिक मान रही है। साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली के शब्दों में, टीम “पब्लिक सर्विस प्लेटफॉर्म सिस्टम के एकीकरण और मल्टी-डोमेन सपोर्ट क्षमताओं का पूरी तरह इस्तेमाल” कर रही है।
Tags :