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BRICS डिजिटल करेंसी को जोड़ने पर विचार कर सकता है भारतीय रिज़र्व बैंक

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📍 भोपाल
BRICS डिजिटल करेंसी को जोड़ने पर विचार कर सकता है भारतीय रिज़र्व बैंक
19 जनवरी 2026। भारतीय रिज़र्व बैंक BRICS देशों की डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने के प्रस्ताव पर काम कर सकता है। यह मुद्दा 2026 में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में चर्चा के लिए रखा जा सकता है, जिसकी मेज़बानी भारत करेगा। मकसद है सीमा पार भुगतान, खासकर पर्यटन और रिटेल ट्रांजैक्शन को आसान बनाना।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने यह सुझाव ऐसे समय दिया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं और कई देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं। दो अनाम सूत्रों के हवाले से एजेंसी ने बताया कि डिजिटल करेंसी इंटरलिंकिंग इस दिशा में एक व्यावहारिक कदम हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी ई-रुपया दिसंबर 2022 में लॉन्च होने के बाद अब तक करीब 70 लाख रिटेल यूजर्स तक पहुंच चुकी है। वहीं चीन डिजिटल युआन के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को तेज़ी से बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

इस बीच अमेरिका ने BRICS के किसी भी ऐसे कदम पर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं जो डॉलर की वैश्विक भूमिका को चुनौती दे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल चेतावनी दी थी कि डॉलर के खिलाफ किसी भी संगठित प्रयास पर सख्त आर्थिक जवाब दिया जाएगा। हालिया अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आए BRICS सदस्य देशों, जिनमें भारत और ब्राजील भी शामिल हैं, ने अपने घरेलू हितों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया है।

रूस का कहना है कि राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार निपटान BRICS देशों को पश्चिमी वित्तीय संस्थानों का व्यावहारिक विकल्प देता है। रूसी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में BRICS देशों के आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि डॉलर और यूरो की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से नीचे आ गई।

रूस और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 245 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें लगभग सभी लेनदेन रूबल और युआन में हुए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्राजील ने पहले एक साझा BRICS मुद्रा का विचार रखा था, लेकिन उस पर आगे काम नहीं हो सका।

BRICS की शुरुआत 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने की थी। बाद में इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ। हाल के वर्षों में संगठन का विस्तार हुआ है और संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और इंडोनेशिया जैसे नए देश इसके सदस्य बने हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों और BRICS से जुड़े देशों को लेकर जारी चेतावनियों ने भारत, रूस और चीन के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और तेज़ किया है।
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