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सूक्ष्म सौर विस्फोट भी बन सकते हैं बड़ा खतरा, तीव्र भूचुंबकीय तूफान ने खोली अंतरिक्ष मौसम की नई परत

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📍 भोपाल
सूक्ष्म सौर विस्फोट भी बन सकते हैं बड़ा खतरा, तीव्र भूचुंबकीय तूफान ने खोली अंतरिक्ष मौसम की नई परत
30 जनवरी 2026। खगोलविदों ने यह साफ कर दिया है कि अंतरिक्ष मौसम को लेकर अब सिर्फ बड़े सौर विस्फोटों पर नजर रखना काफी नहीं है। मार्च 2023 में सूर्य से निकले एक बेहद सूक्ष्म और लगभग अदृश्य कोरोनल मास इजेक्शन (CME) ने पृथ्वी पर तीव्र भूचुंबकीय तूफान पैदा कर दिया। यह अध्ययन दिखाता है कि छोटे और “स्टील्थ” सौर विस्फोट भी गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे अंतरिक्ष मौसम का पूर्वानुमान और ज्यादा जटिल हो जाता है।

कोरोनल मास इजेक्शन सूर्य के वायुमंडल से निकलने वाले प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्रों के विशाल विस्फोट होते हैं, जो पृथ्वी तक पहुंचने पर उपग्रहों, संचार प्रणालियों और बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं। आम तौर पर ऐसे तीव्र तूफान बड़े सौर विस्फोटों से जुड़े होते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि करीब 10 प्रतिशत गंभीर भूचुंबकीय तूफान ऐसे होते हैं, जिनका स्रोत सूर्य पर साफ दिखाई ही नहीं देता।

इन्हीं रहस्यमय घटनाओं को समझने के लिए खगोलविदों ने 19 मार्च 2023 को घटित एक स्टील्थ CME का अध्ययन किया। नासा के कई अंतरिक्ष यानों से मिले आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया कि यह कमजोर दिखने वाला सौर विस्फोट करीब तीन दिन बाद पृथ्वी तक पहुंचा और एक तीव्र भूचुंबकीय तूफान का कारण बना। खास बात यह रही कि इसमें दक्षिणी दिशा वाला चुंबकीय घटक और अपेक्षाकृत अधिक घनत्व मौजूद था, जो इसके प्रभाव को बढ़ाने वाला साबित हुआ।

यह CME सूर्य के केंद्र के पास स्थित एक फिलामेंट चैनल से निकला था, लेकिन इसके साथ न तो कोई एक्स-रे फ्लेयर दिखा और न ही रेडियो विस्फोट। यही वजह है कि यह घटना पारंपरिक सौर चेतावनी संकेतों से बाहर रही और लंबे समय तक नजरों से छिपी रही।

इस अध्ययन का नेतृत्व विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने किया। प्रमुख लेखक पी. वेमारेड्डी के अनुसार, ऐसे कमजोर CME सूर्य पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं छोड़ते, जिससे मौजूदा अवलोकन तकनीकों से इनकी पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है। शोध में नासा के सोलर डायनेमिक ऑब्जर्वेटरी, सोलर ऑर्बिटर, स्टीरियो-ए और विंड मिशन से मिले डेटा का इस्तेमाल किया गया।

SDO से मिली पराबैंगनी छवियों में CME के स्रोत क्षेत्र के पास एक कोरोनल होल भी देखा गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोनल होल से निकलने वाली तेज सौर पवन ने इस स्टील्थ CME को ऊर्जा दी, जिससे वह सूर्य के पास ही खत्म होने के बजाय पृथ्वी तक पहुंच सका। यह निष्कर्ष बताता है कि सूक्ष्म सौर विस्फोटों के फैलाव में कोरोनल होल की भूमिका बेहद अहम हो सकती है।

अध्ययन में अंतरग्रहीय CME के विकास को भी ट्रैक किया गया। अंतरिक्ष यानों से मिले इन-सीटू आंकड़ों के अनुसार, यह CME बिना किसी स्पष्ट शॉक के तेज सौर पवन के पीछे यात्रा करता रहा। इसके भीतर मौजूद चुंबकीय बादल का आकार बढ़ता गया, गति धीमी होती गई और चुंबकीय संरचना में घूर्णन देखा गया, जो इसके स्रोत क्षेत्र से मेल खाता है।

वैज्ञानिकों ने सौर पवन की गति, घनत्व, चुंबकीय और विद्युत क्षेत्रों के आधार पर भूचुंबकीय तूफान की तीव्रता का प्रतिरूपण भी किया। नतीजे बताते हैं कि सौर पवन के घनत्व और विद्युत क्षेत्र में बदलावों को शामिल करने पर मॉडल और वास्तविक भूचुंबकीय सूचकांकों में मजबूत सामंजस्य दिखाई देता है।

यह अध्ययन साफ तौर पर दिखाता है कि सूर्य के पास लगभग अदृश्य रहने वाले सूक्ष्म CME भी, जब जटिल सौर पवन संरचनाओं से गुजरते हैं, तो पृथ्वी पर गंभीर अंतरिक्ष मौसम प्रभाव पैदा कर सकते हैं। यही वजह है कि स्टील्थ CME से जुड़े जोखिमों की पहचान और उनका पूर्वानुमान आने वाले समय में अंतरिक्ष विज्ञान की बड़ी चुनौती बने रहेंगे।

यह शोधपत्र The Astrophysical Journal में प्रकाशित हुआ है। इसके लेखक IIA के पी. वेमारेड्डी और IISER तिरुपति के के. सेल्वा भारती हैं, जो IIA में एमएससी इंटर्नशिप के छात्र रहे हैं।

चित्र: सूर्य की डिस्क पर सीएमई का स्रोत क्षेत्र, जिसमें कोरोनल होल और फिलामेंट दिखाई दे रहे हैं। (a) 193 Å पर सूर्य की पराबैंगनी एआईए छवि, (b) 212 Å पर सूर्य की यूवी छवि, (c) चुंबकीय क्षेत्र वितरण, (d) स्रोत क्षेत्र का ज़ूम-इन, (ef) फिलामेंट के साथ धुंधली चमकीली चैनलों को दर्शाने वाली अंतर छवियां।
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