🔴 TRENDING NOW!
सीतारमण ने ग्लोबल टैक्स नियमों में BRICS की बड़ी भूमिका की वकालत, भारत ने दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव रखा राधिका आप्टे का खुलासा: लीक हुई निजी फुटेज के बाद 4 दिनों तक घर से नहीं निकलीं भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव MP पुलिस के नए सोशल मीडिया नियम: वर्दी में रील्स और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर रोक मध्यप्रदेश का चारों ओर होगा विकास, सीएम डॉ. मोहन ने डेवलमेंट के लिए मंजूर किए 13 हजार 790 करोड़ रुपये ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी

अब डिजिटल होगा ‘Kiss’, दूर बैठे पार्टनर तक पहुंचेगा स्पर्श का एहसास

👤
prativad
👁 1130 व्यूज
📍 भोपाल
अब डिजिटल होगा ‘Kiss’, दूर बैठे पार्टनर तक पहुंचेगा स्पर्श का एहसास
21 फरवरी 2026। टेक्नोलॉजी ने दुनिया को जोड़ दिया है, लेकिन दिलों के बीच की दूरी अब भी चुनौती बनी रहती है। इसी खाली जगह को भरने की कोशिश में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रयोग किया जिसने भावनाओं को डिजिटल दुनिया में नया आयाम देने की कोशिश की।

इस प्रयोग का नाम था Kissenger — यानी Kiss Messenger का छोटा रूप। यह एक छोटा गैजेट था, जिसे स्मार्टफोन से जोड़ा जा सकता था। इसमें लगे सॉफ्ट और प्रेशर-सेंसिटिव सेंसर किसी किस की मूवमेंट और उसकी तीव्रता को रिकॉर्ड करते थे।

अगर एक पार्टनर इस डिवाइस को किस करता, तो वही फीलिंग रियल टाइम में दूसरे व्यक्ति के पास मौजूद डिवाइस पर ट्रांसमिट हो जाती। मतलब, सिर्फ आवाज़ या वीडियो नहीं, बल्कि “स्पर्श” का अनुभव भी डिजिटल तरीके से भेजा जा सकता था।

यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म का दृश्य नहीं था, बल्कि एक वास्तविक रिसर्च प्रोजेक्ट था। शोधकर्ताओं का मानना था कि इंसानी रिश्तों में टच की भूमिका बेहद अहम होती है। लंबी दूरी के रिश्तों में जहां स्क्रीन ही सहारा होती है, वहां स्पर्श की कमी सबसे ज्यादा महसूस होती है। Kissenger इसी इमोशनल गैप को कम करने की दिशा में एक प्रयोग था।

हालांकि यह डिवाइस कभी बड़े पैमाने पर बाजार में नहीं आया, लेकिन इसने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया। क्या टेक्नोलॉजी सिर्फ शब्द और तस्वीरों तक सीमित रहेगी, या वह इंसानी एहसासों की नकल भी कर सकेगी?

वर्चुअल इंटिमेसी, डिजिटल रिश्ते और इमोशनल कनेक्टिविटी पर इस प्रयोग ने वैश्विक चर्चा को जन्म दिया। आज जब एआई और मिक्स्ड रियलिटी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तब यह सवाल और भी गहरा हो गया है कि मशीनें आखिर इंसानी अनुभवों को कितनी बारीकी से दोहरा सकती हैं।

डिजिटल दौर में लोग सिर्फ “मिस यू” सुनना नहीं चाहते। वे उसे महसूस करना चाहते हैं। और शायद इसी चाहत ने टेक्नोलॉजी को एक किस तक पहुंचा दिया।
Tags :