🔴 TRENDING NOW!
सीतारमण ने ग्लोबल टैक्स नियमों में BRICS की बड़ी भूमिका की वकालत, भारत ने दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव रखा राधिका आप्टे का खुलासा: लीक हुई निजी फुटेज के बाद 4 दिनों तक घर से नहीं निकलीं भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव MP पुलिस के नए सोशल मीडिया नियम: वर्दी में रील्स और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर रोक मध्यप्रदेश का चारों ओर होगा विकास, सीएम डॉ. मोहन ने डेवलमेंट के लिए मंजूर किए 13 हजार 790 करोड़ रुपये ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी

US का भारत पर दबाव बढ़ा, रूसी तेल छोड़ अमेरिकी एनर्जी खरीदने की सलाह

👤
prativad
👁 1051 व्यूज
📍 भोपाल
US का भारत पर दबाव बढ़ा, रूसी तेल छोड़ अमेरिकी एनर्जी खरीदने की सलाह
23 मई 2026। अमेरिका भारत को तेल और LNG जैसे ऊर्जा संसाधनों का निर्यात बढ़ाना चाहता है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि वैश्विक तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने ब्लूमबर्ग से बातचीत में कहा कि भारत लंबे समय से अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की कोशिश करता रहा है और इसका मतलब अमेरिकी ऊर्जा खरीद में बढ़ोतरी भी हो सकता है।

गोर ने कहा कि भारत में अमेरिकी ऊर्जा को लेकर सकारात्मक रुझान दिखाई दे रहा है और वॉशिंगटन इससे काफी संतुष्ट है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio अगले सप्ताह भारत दौरे पर आने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान अमेरिका भारत पर तेल और LNG आयात बढ़ाने का दबाव बना सकता है।

अमेरिका लंबे समय से भारत से रूस से होने वाले तेल आयात को कम करने की मांग करता रहा है। 2022 के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसी मुद्दे को लेकर इस वर्ष की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर दंडात्मक टैरिफ भी लगाए थे।

बाद में राष्ट्रपति ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi के बीच हुए एक समझौते के बाद इन टैरिफ में राहत दी गई। शुरुआती व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए गए। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इसके बदले भारत ने रूसी तेल खरीद सीमित करने पर सहमति जताई थी।

हालांकि भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से कभी यह स्वीकार नहीं किया कि वह रूसी तेल आयात पूरी तरह बंद करेगी। नई दिल्ली लगातार यह कहती रही है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह सभी उपलब्ध स्रोतों से तेल खरीद जारी रखेगा।

इस बीच ईरान और इजरायल के बीच तनाव तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधाओं ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है और वैश्विक सप्लाई बाधित होने पर उसकी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सरकार बढ़ती तेल कीमतों के असर को कम करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिनमें ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती शामिल है।

गोर ने होर्मुज़ संकट के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अमेरिका पर इसका दोष मढ़ना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को रूसी तेल खरीद जारी रखने की छूट दी हुई है, जबकि अन्य देशों पर कई तरह के प्रतिबंध लागू हैं।
Tags :