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AI के खतरों पर चेतावनी देने वाले पोप के दस्तावेज़ में ही AI के इस्तेमाल का दावा

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prativad
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📍 भोपाल
AI के खतरों पर चेतावनी देने वाले पोप के दस्तावेज़ में ही AI के इस्तेमाल का दावा
28 मई 2026। एक रिसर्चर ने दावा किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरों पर चेतावनी देने वाले पोप लियो XIV के हालिया धार्मिक दस्तावेज़ का बड़ा हिस्सा खुद AI की मदद से लिखा गया हो सकता है।

42,000 शब्दों वाले एनसाइक्लिकल ‘Magnifica Humanitas’ में पोप ने सिलिकॉन वैली की बढ़ती ताकत, स्वायत्त हथियारों के खतरे और AI के जरिए इंसानों को “सिर्फ इस्तेमाल और शोषण योग्य संसाधन” में बदल देने जैसी आशंकाओं पर चिंता जताई थी। दस्तावेज़ में AI को नियंत्रित करने और “हथियार-मुक्त” रखने की अपील भी की गई थी।

हालांकि, एनालिस्ट लिंच झांग ने दावा किया है कि इस दस्तावेज़ में AI-जनित लेखन के कई संकेत दिखाई देते हैं। अपने ब्लॉग पोस्ट में उन्होंने कहा कि टेक्स्ट में ऐसे वाक्यांश, विराम चिह्न और लेखन शैली का इस्तेमाल असामान्य रूप से अधिक है, जो अक्सर AI मॉडल्स में देखने को मिलते हैं।

झांग के मुताबिक, दस्तावेज़ में em-dash का इस्तेमाल 127 बार किया गया, जबकि पोप फ्रांसिस के पिछले चार एनसाइक्लिकल में यह संख्या कुल मिलाकर सिर्फ 26 थी। उन्होंने “tricolons” यानी तीन समानांतर शब्दों या वाक्यांशों की श्रृंखला के लगातार इस्तेमाल को भी AI शैली का संकेत बताया।

रिपोर्ट के अनुसार, झांग ने टेक्स्ट को AI डिटेक्शन टूल Pangram से जांचा। कुछ पैराग्राफ पूरी तरह इंसानी लेखन जैसे लगे, जबकि कई हिस्सों में 40% से 100% तक AI जनरेशन की संभावना बताई गई। इतालवी संस्करण में भी AI संकेत मिलने से यह संभावना कमजोर पड़ती है कि AI का इस्तेमाल केवल अनुवाद के लिए किया गया था।

टेक वेबसाइट The Verge ने भी झांग के प्रयोग को दोहराया और अपनी जांच में पाया कि दस्तावेज़ का लगभग 46% हिस्सा AI-जनित हो सकता है।

झांग ने यह भी दावा किया कि दस्तावेज़ तैयार करने में संभवतः Anthropic के Claude मॉडल का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने “genuinely” जैसे शब्दों के बार-बार उपयोग को इसका संकेत बताया। उनका कहना है कि दस्तावेज़ के कुछ हिस्से पूरी तरह मानव-लिखित प्रतीत होते हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वेटिकन के अलग-अलग अधिकारियों ने AI का अलग स्तर पर इस्तेमाल किया होगा।

उन्होंने यह भी संभावना जताई कि खुद पोप लियो XIV को शायद यह जानकारी नहीं रही हो कि दस्तावेज़ के निर्माण में AI का इतनी व्यापक मात्रा में इस्तेमाल हुआ।

वेटिकन ने इन दावों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं Anthropic की ओर से भी कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के सह-संस्थापक क्रिस्टोफर ओलाह ने हाल ही में पोप के साथ एक कार्यक्रम में मंच साझा किया था।
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