🔴 TRENDING NOW!
सीतारमण ने ग्लोबल टैक्स नियमों में BRICS की बड़ी भूमिका की वकालत, भारत ने दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव रखा राधिका आप्टे का खुलासा: लीक हुई निजी फुटेज के बाद 4 दिनों तक घर से नहीं निकलीं भारत का KAL Drone: 1,000 KM तक की रेंज, पोखरण में स्वदेशी Long-Range Attack Drone का परीक्षण भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव MP पुलिस के नए सोशल मीडिया नियम: वर्दी में रील्स और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर रोक मध्यप्रदेश का चारों ओर होगा विकास, सीएम डॉ. मोहन ने डेवलमेंट के लिए मंजूर किए 13 हजार 790 करोड़ रुपये ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी

चीन ने AI विशेषज्ञों की विदेश यात्राओं पर कड़ा नियंत्रण लगाया: रिपोर्ट

👤
prativad
👁 685 व्यूज
📍 भोपाल
चीन ने AI विशेषज्ञों की विदेश यात्राओं पर कड़ा नियंत्रण लगाया: रिपोर्ट
28 मई 2026। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन अब अपने शीर्ष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञों और टेक उद्यमियों की विदेश यात्राओं पर सख्त निगरानी रख रहा है। दावा किया गया है कि बीजिंग चाहता है कि AI सेक्टर से जुड़े प्रमुख लोग विदेश जाने से पहले सरकारी मंजूरी लें।

Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, यह नई नीति Alibaba, DeepSeek और अन्य अग्रणी टेक कंपनियों से जुड़े AI शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, स्टार्टअप संस्थापकों और अधिकारियों पर लागू की जा रही है। रिपोर्ट में गुमनाम सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चीन सरकार अब AI टैलेंट को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रही है।

बताया गया है कि इन विशेषज्ञों पर अब वैसी ही निगरानी और यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जैसे पहले परमाणु वैज्ञानिकों और सरकारी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों पर लागू होते थे। हालांकि, चीनी सरकार ने अब तक इन खबरों की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग को डर है कि महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता पश्चिमी देशों तक पहुंच सकती है। इसी वजह से AI, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए चीन लगातार सख्त कदम उठा रहा है।

हाल ही में चीनी नियामकों ने Meta द्वारा चीनी AI स्टार्टअप Manus के प्रस्तावित 2 अरब डॉलर के अधिग्रहण को भी रोक दिया था। Manus ने 2025 में अपना मुख्यालय सिंगापुर स्थानांतरित कर लिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच के दौरान कंपनी के दो अधिकारियों को चीन छोड़ने से अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।

Bloomberg के सूत्रों का कहना है कि नई यात्रा पाबंदियां केवल Manus विवाद से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य संवेदनशील तकनीक और विशेषज्ञता के बाहरी प्रवाह को नियंत्रित करना है।

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और AI सुपरकंप्यूटिंग से जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर भी कई प्रतिबंध लगाए हैं। चीन दुनिया के लगभग 60 प्रतिशत रेयर अर्थ खनिजों का खनन और करीब 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग करता है। इन संसाधनों को लेकर बीजिंग अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

चीन की मौजूदा पंचवर्षीय योजना में AI, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए “असाधारण कदम” उठाने पर जोर दिया गया है।
Tags :