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भारत-अमेरिका डील पर निर्णायक दौर, कृषि और डेटा सुरक्षा बने अहम मुद्दे

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📍 भोपाल
भारत-अमेरिका डील पर निर्णायक दौर, कृषि और डेटा सुरक्षा बने अहम मुद्दे
3 जून 2026। भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक और महत्वपूर्ण दौर की वार्ता शुरू हो गई है। नई दिल्ली इस समझौते के साथ-साथ अमेरिकी व्यापार कानूनों के तहत संभावित टैरिफ कार्रवाई से भी खुद को सुरक्षित रखना चाहती है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि दोनों देश कई महीनों से चल रही बातचीत के बाद व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुके हैं। इसी सिलसिले में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचा है। वार्ता 4 जून तक जारी रहेगी।

कृषि और डेटा सुरक्षा पर बनी हुई है असहमति

भारत के पूर्व वाणिज्य एवं उद्योग सचिव अजय दुआ के अनुसार, नई दिल्ली की सबसे बड़ी चिंता कृषि क्षेत्र को पूरी तरह विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलने के अमेरिकी दबाव को लेकर है। उनका कहना है कि भारत इस क्षेत्र में बिना किसी सीमा के बाजार खोलने को लेकर सतर्क है।

इसके अलावा डिजिटल डेटा सुरक्षा भी बातचीत का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। भारत चाहता है कि विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय नागरिकों और संस्थानों से जुड़ा डेटा देश के भीतर ही संग्रहीत किया जाए, जबकि कई पश्चिमी कंपनियां इस शर्त का विरोध करती रही हैं।

धारा 301 की जांच से बचना चाहता है भारत

सूत्रों के अनुसार, भारत अमेरिका से यह आश्वासन भी चाहता है कि व्यापार समझौते के बाद उसे अमेरिकी ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 301 के तहत जांच और संभावित दंडात्मक टैरिफ का सामना न करना पड़े।

धारा 301 अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार देती है, जिनकी व्यापारिक नीतियों को वह "अनुचित" मानता है। इस कानून के तहत अमेरिका अतिरिक्त शुल्क या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकता है।

बताया जा रहा है कि 24 जुलाई से नए टैरिफ लागू होने की संभावना है, जो पूर्व में घोषित "पारस्परिक टैरिफ" व्यवस्था की जगह ले सकते हैं।

ब्राजील पर कार्रवाई ने बढ़ाई भारत की चिंता

भारत की चिंताओं को उस समय और बल मिला जब अमेरिका ने हाल ही में ब्राजील पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया। वाशिंगटन ने ब्राजील की कुछ व्यापारिक नीतियों को धारा 301 के तहत अनुचित बताते हुए यह कदम उठाया था।

नई दिल्ली चाहती है कि व्यापार समझौते के बाद उसके खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की संभावना समाप्त हो जाए।

2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया था। दोनों देशों ने बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण को 2025 तक पूरा करने की योजना भी बनाई थी।

हालांकि, इसके बाद अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जिसमें रूस से तेल आयात के मुद्दे पर अतिरिक्त शुल्क भी शामिल था। बाद में फरवरी में हुए समझौते के बाद इन शुल्कों में कमी आई थी।

UK समझौते की भी समीक्षा कर सकता है भारत

इसी बीच रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते की कुछ शर्तों की भी समीक्षा कर सकता है। माना जा रहा है कि नई दिल्ली स्टील कोटे और आयात शुल्क से जुड़े मुद्दों के बदले स्कॉच व्हिस्की समेत कुछ उत्पादों पर दी गई टैरिफ रियायतों में संशोधन पर विचार कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ब्रिटेन दोनों के साथ चल रही ये व्यापारिक वार्ताएं आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को नई दिशा दे सकती हैं।
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