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AI एजेंट्स के बढ़ते प्रभाव से बदली इंटरनेट की तस्वीर, इंसानों से अधिक ट्रैफ़िक अब बॉट्स से: Cloudflare

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📍 भोपाल
AI एजेंट्स के बढ़ते प्रभाव से बदली इंटरनेट की तस्वीर, इंसानों से अधिक ट्रैफ़िक अब बॉट्स से: Cloudflare
7 जून 2026। इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Cloudflare की नई रिपोर्ट ने वेब की बदलती दुनिया की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश की है। कंपनी के अनुसार, अब इंटरनेट पर इंसानों की तुलना में बॉट्स और AI एजेंट्स अधिक वेब ट्रैफ़िक उत्पन्न कर रहे हैं, जो डिजिटल इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

Cloudflare Radar के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी की सेवाओं का उपयोग करने वाली वेबसाइटों पर आने वाले कुल वेब ट्रैफ़िक में लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा ऑटोमेटेड बॉट्स और AI एजेंट्स का है, जबकि केवल 43 प्रतिशत ट्रैफ़िक वास्तविक उपयोगकर्ताओं से आता है।

Cloudflare के सह-संस्थापक और CEO Matthew Prince ने इस बदलाव को इंटरनेट के इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें उम्मीद थी कि ऑटोमेटेड ट्रैफ़िक 2027 तक इंसानी गतिविधियों को पीछे छोड़ेगा, लेकिन AI एजेंट्स की तेज़ वृद्धि ने यह स्थिति अपेक्षा से कहीं पहले पैदा कर दी।

AI एजेंट्स कैसे बढ़ा रहे हैं ट्रैफ़िक?
AI एजेंट्स ऐसे स्वचालित सिस्टम हैं जो उपयोगकर्ताओं की ओर से इंटरनेट पर जानकारी खोजते, एकत्रित करते और उसका विश्लेषण करते हैं। जहां कोई व्यक्ति किसी विषय पर जानकारी जुटाने के लिए कुछ वेबसाइटों तक सीमित रहता है, वहीं AI एजेंट एक ही कार्य को पूरा करने के लिए हजारों वेबपेज स्कैन कर सकते हैं।

इसी वजह से इंटरनेट पर मशीन-टू-मशीन ट्रैफ़िक तेजी से बढ़ रहा है। इसमें वेबसाइटों, ऐप्स, ऑनलाइन सेवाओं और डेटाबेस के बीच लगातार डेटा अनुरोध किए जाते हैं। हालांकि Cloudflare का यह डेटा केवल वेब ट्रैफ़िक तक सीमित है और इसमें वीडियो स्ट्रीमिंग, मैसेजिंग, ऑनलाइन गेमिंग या मोबाइल ऐप उपयोग जैसी गतिविधियां शामिल नहीं हैं।

फिर चर्चा में आई 'डेड इंटरनेट थ्योरी'
बॉट ट्रैफ़िक में वृद्धि के साथ तथाकथित "डेड इंटरनेट थ्योरी" पर भी बहस तेज हो गई है। इस सिद्धांत के अनुसार, इंटरनेट पर दिखाई देने वाली बड़ी मात्रा में गतिविधियां अब मनुष्यों की बजाय बॉट्स, ऑटोमेटेड अकाउंट्स और AI सिस्टम द्वारा संचालित होती हैं, जो एक-दूसरे द्वारा बनाए गए कंटेंट के साथ इंटरैक्ट करते हैं।

विज्ञापन आधारित मॉडल के सामने नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता बॉट ट्रैफ़िक इंटरनेट के पारंपरिक विज्ञापन-आधारित बिजनेस मॉडल के लिए भी चुनौती बन सकता है। चूंकि AI एजेंट और बॉट्स विज्ञापनों पर क्लिक नहीं करते, इसलिए कंटेंट निर्माताओं और वेबसाइटों के सामने यह सवाल खड़ा हो रहा है कि भविष्य में AI सिस्टम से कंटेंट एक्सेस के बदले शुल्क कैसे लिया जाए।

पुराना वेब भी हो रहा है गायब
इस बीच, इंटरनेट के पुराने हिस्सों के तेजी से समाप्त होने की चिंता भी सामने आई है। Pew Research Center की 2024 की एक स्टडी के अनुसार, वर्ष 2013 में मौजूद लगभग 38 प्रतिशत वेबपेज एक दशक बाद इंटरनेट से गायब हो चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये संकेत बताते हैं कि कभी इंसानों के लिए बनाए गए ओपन वेब का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब उस पर ऑटोमेटेड सिस्टम तथा AI एजेंट्स का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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