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रूस को भी ब्रह्मोस मिसाइलें देने को तैयार भारत-रूस का संयुक्त उपक्रम

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prativad
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📍 भोपाल
रूस को भी ब्रह्मोस मिसाइलें देने को तैयार भारत-रूस का संयुक्त उपक्रम
नई दिल्ली 11 जून 2026। भारत और रूस के संयुक्त रक्षा उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने संकेत दिया है कि यदि रूस की ओर से मांग आती है तो वह रूसी नौसेना और थल सेना को सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों की आपूर्ति करने के लिए तैयार है। यह कदम भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता और वैश्विक रक्षा निर्यात में उसकी मजबूत होती भूमिका को दर्शाता है।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रबंध निदेशक अलेक्जेंडर मक्सिचेव ने अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक प्रदर्शनी ‘फ्लीट-2026’ के दौरान रूसी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में कहा कि कंपनी रूसी सैन्य जरूरतों के अनुरूप मिसाइलों की आपूर्ति करने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि कंपनी के पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता मौजूद है और वह रूस की आवश्यकताओं को अच्छी तरह समझती है।

ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की खासियत यह है कि इसे जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है। भारत पहले ही इस अत्याधुनिक मिसाइल को अपनी थल सेना, वायु सेना और नौसेना में शामिल कर चुका है। यदि रूस इस प्रणाली का ऑर्डर देता है, तो यह पहली बार होगा जब भारत में निर्मित यह मिसाइल अपने मूल तकनीकी साझेदार देश को निर्यात की जाएगी।

DRDO और रूस की संयुक्त परियोजना
ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया रॉकेट डिज़ाइन ब्यूरो ने संयुक्त रूप से किया है। दोनों देशों ने 1995 में ब्रह्मोस एयरोस्पेस नामक संयुक्त उद्यम की स्थापना की थी। मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नामों को जोड़कर रखा गया है।

दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में शामिल ब्रह्मोस की शुरुआती मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर थी, जिसे बाद में अपग्रेड कर लंबी दूरी तक पहुंचाने योग्य बनाया गया।

बढ़ रहा है वैश्विक निर्यात बाजार
फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइलों का पहला विदेशी ग्राहक बना था। उसने 2022 में 375 मिलियन डॉलर का रक्षा समझौता किया था। इस सौदे के तहत मिसाइलों की पहली खेप अप्रैल 2024 और दूसरी अप्रैल 2025 में सौंपी जा चुकी है। समझौते में तीन मिसाइल बैटरियां, लॉजिस्टिक सहायता और सैन्य कर्मियों का प्रशिक्षण भी शामिल है।

भारत ने हाल ही में वियतनाम को भी ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति के लिए समझौते की पुष्टि की है। वहीं, सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान भारतीय रक्षा अधिकारियों ने बताया कि इंडोनेशिया के साथ भी इस संबंध में बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

हाइपरसोनिक तकनीक पर अगला कदम
ब्रह्मोस परियोजना के अगले चरण में रूस की अत्याधुनिक ज़िरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर आधारित नई पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली के संयुक्त विकास की संभावना भी जताई जा रही है।

इस बीच, DRDO के अनुसार ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक राजस्व दर्ज किया है, जो वैश्विक बाजार में इसकी बढ़ती मांग और भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है।
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