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भारत ने बढ़ाई रूसी तेल की खरीद, जून में आयात 2.66 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंचा

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📍 भोपाल
भारत ने बढ़ाई रूसी तेल की खरीद, जून में आयात 2.66 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंचा
नई दिल्ली 22 जून 2026। जून महीने में भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीद पर दी गई तीसरी छूट समाप्त होने के बावजूद भारत ने रूसी तेल की खरीद तेज कर दी है। बेहतर डिस्काउंट और बढ़ती घरेलू मांग के चलते रूस एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

ऊर्जा विश्लेषण फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, 19 जून तक भारत ने रूस से औसतन 2.66 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चे तेल का आयात किया, जबकि मई में यह आंकड़ा 1.91 मिलियन bpd था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पूरे जून महीने में भारत का औसत रूसी तेल आयात 2.35 मिलियन bpd से अधिक रह सकता है।

इसके विपरीत, अमेरिका से होने वाला कच्चे तेल का आयात मई के 2.52 लाख bpd से घटकर केवल 91 हजार bpd रह गया है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्रोतों में विविधता

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक भारत पिछले कुछ वर्षों में अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाने पर लगातार जोर दे रहा है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान की आशंकाओं के बीच भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई है। ईरान-इजराइल संघर्ष के दौरान वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ने के बाद यह रणनीति और महत्वपूर्ण हो गई।

यूएई, वेनेजुएला और सऊदी अरब भी प्रमुख आपूर्तिकर्ता

जून में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत को 6.36 लाख bpd कच्चे तेल की आपूर्ति हुई, जो मई के 6.44 लाख bpd से थोड़ी कम रही। वहीं, वेनेजुएला 2.09 लाख bpd के शिपमेंट के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा। सऊदी अरब से भारत को 3.84 लाख bpd कच्चे तेल की आपूर्ति हुई।

अमेरिकी छूट समाप्त, लेकिन आयात जारी

अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट 17 जून को समाप्त हो गई। वाशिंगटन ने पहली बार 5 मार्च को इस प्रतिबंध में राहत दी थी और बाद में इसे दो बार बढ़ाया गया था। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार अब इस छूट के आगे बढ़ने की संभावना कम है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच किसी प्रकार का शांति समझौता होता है और मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति सामान्य होती है, तो वैश्विक बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध हो सकता है, जिससे इस तरह की छूट की आवश्यकता कम पड़ जाएगी।

गौरतलब है कि अमेरिका ने 2025 में रूस से तेल खरीदने वाले भारतीय आयातकों पर 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ लगाया था, लेकिन इसे इस वर्ष की शुरुआत में वापस ले लिया गया था। इसके बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए रियायती रूसी तेल की खरीद जारी रखे हुए है।
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