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मालवा के 'गराडू' और सैलाना के 'बालम खीरे' को मिला GI टैग, किसानों के लिए खुलेंगे नए बाजार

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📍 भोपाल
मालवा के 'गराडू' और सैलाना के 'बालम खीरे' को मिला GI टैग, किसानों के लिए खुलेंगे नए बाजार
22 जून 2026। मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की दो पारंपरिक और लोकप्रिय फसलें, 'गराडू' और सैलाना के 'बालम खीरे' को प्रतिष्ठित जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल गया है। इस मान्यता के साथ दोनों उत्पादों को उनकी विशिष्ट भौगोलिक पहचान और गुणवत्ता के लिए कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है, जिससे किसानों को बेहतर दाम, बढ़ते बाजार और निर्यात के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

बागवानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रतलाम जिले से भेजे गए विस्तृत आवेदन और आंकड़ों के आधार पर हाल ही में इन दोनों उत्पादों को GI टैग प्रदान किया गया है।

बागवानी विभाग के उप संचालक मंगल सिंह डोडवे ने बताया कि रतलाम जिले में उगाए जाने वाले 'गराडू' और 'बालम खीरे' अपनी अनूठी जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और पारंपरिक खेती पद्धतियों के कारण लंबे समय से लोगों की पसंद बने हुए हैं।

सैलाना का 'बालम खीरा' बना गर्मियों की पहचान
रतलाम जिले के सैलाना क्षेत्र में उगाया जाने वाला 'बालम खीरा' अपने बड़े आकार, विशिष्ट रंग और रसदार स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। गर्मियों में इसे एक ताजगी भरे स्नैक के रूप में बड़े चाव से खाया जाता है। वर्तमान में जिले में करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जा रही है।

सर्दियों की शान है मालवा का 'गराडू'
मालवा क्षेत्र का 'गराडू' एक स्टार्चयुक्त कंद है, जिसे सर्दियों में विशेष रूप से पसंद किया जाता है। इसे आमतौर पर डीप फ्राई कर मसालों और नींबू के रस के साथ परोसा जाता है। प्रदेश में इसकी खेती लगभग 120 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है और यह मालवा के स्ट्रीट फूड की पहचान बन चुका है।

किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
अधिकारियों का कहना है कि GI टैग मिलने से इन दोनों उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और मजबूत होगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने, खेती का दायरा बढ़ाने और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश के अन्य GI टैग प्राप्त उत्पाद
मध्य प्रदेश के कई अन्य उत्पादों को भी पहले GI टैग मिल चुका है। इनमें रतलामी सेव, कड़कनाथ चिकन, रियावन लहसुन, चिन्नौर चावल और सुंदरजा आम शामिल हैं।

जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति और उससे जुड़ी विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा तथा अन्य विशेषताओं को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है, जिससे उसकी विशिष्ट पहचान और बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि होती है।
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