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सोशल मीडिया पर बच्चों के यौन शोषण की सामग्री पर सरकार सख्त, प्लेटफॉर्म को 3 घंटे में हटाना होगा गैरकानूनी कंटेंट

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📍 भोपाल
सोशल मीडिया पर बच्चों के यौन शोषण की सामग्री पर सरकार सख्त, प्लेटफॉर्म को 3 घंटे में हटाना होगा गैरकानूनी कंटेंट
22 जुलाई 2026। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) और अन्य गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। सरकार ने संबंधित सोशल मीडिया मध्यस्थ से CSAM से जुड़े विज्ञापनों के प्रसार पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी संबंधित प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों समेत सभी इंटरनेट यूजर्स के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह डिजिटल वातावरण तैयार करना है। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

गैरकानूनी कंटेंट हटाने की समयसीमा घटकर 3 घंटे
आईटी नियमों में हालिया बदलावों के अनुसार, किसी सक्षम अदालत के आदेश या अधिकृत सरकारी एजेंसी से वैध सूचना मिलने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों को गैरकानूनी कंटेंट को तीन घंटे के भीतर हटाना या उसकी पहुंच बंद करनी होगी। इससे पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी।

इसके अलावा, नग्नता, प्रतिरूपण और अन्य संवेदनशील मामलों में शिकायतों के निपटारे की समयसीमा भी घटाई गई है। कुछ श्रेणियों के मामलों में यह अवधि 24 घंटे से घटाकर 2 घंटे तक की गई है।

एआई और डीपफेक कंटेंट पर भी निगरानी
सरकार ने डीपफेक और अन्य एआई-जनरेटेड कंटेंट से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए आईटी नियमों में बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत प्लेटफॉर्म को स्वीकृत एआई-जनरेटेड कंटेंट की स्पष्ट लेबलिंग और उसे ट्रेस करने योग्य मेटाडेटा सुनिश्चित करना होगा।

नियमों में बाल यौन शोषण सामग्री, बिना सहमति साझा की गई अंतरंग तस्वीरें, प्रतिरूपण और अन्य हानिकारक एआई-जनरेटेड कंटेंट को भी शामिल किया गया है। प्लेटफॉर्म को ऐसी सामग्री की पहचान, रोकथाम और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तकनीकी उपाय अपनाने होंगे।

उल्लंघन पर प्लेटफॉर्म की कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई मध्यस्थ आईटी नियमों के तहत अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं करता है, तो वह आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली थर्ड-पार्टी कंटेंट से जुड़ी कानूनी छूट खो सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित प्लेटफॉर्म मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई और मुकदमे के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

सरकार ने सोशल मीडिया और अन्य मध्यस्थों को कई एडवाइजरी और मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) भी जारी की हैं। इनमें गैरकानूनी कंटेंट की रोकथाम, एआई-जनरेटेड भ्रामक सामग्री पर कार्रवाई और बिना सहमति साझा की गई अंतरंग तस्वीरों को हटाने की प्रक्रिया शामिल है।
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