मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए AI का इस्तेमाल बढ़ा, 5.28 करोड़ किसानों तक पहुंची मानसून सलाह
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📍 भोपाल
नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026। भारत मौसम पूर्वानुमान और चरम मौसम घटनाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और बिग डेटा तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार, इन तकनीकों को पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के साथ जोड़कर पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने और लोगों को समय रहते मौसम संबंधी चेतावनी देने की कोशिश की जा रही है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) AI/ML आधारित प्रणालियों को पारंपरिक संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, पृथ्वी प्रणाली मॉडलिंग और समूह पूर्वानुमान प्रणालियों के साथ एकीकृत कर रहा है। AI/ML से तैयार डेटा को GIS आधारित बहु-खतरा पूर्व चेतावनी प्रणाली में भी शामिल किया जा रहा है।
300 मीटर तक की बारिश की भविष्यवाणी
दिल्ली-एनसीआर के लिए 'मेटिओगैन' नामक डीप लर्निंग मॉडल विकसित किया गया है। इसका परीक्षण 300 मीटर के स्थानिक रिजॉल्यूशन पर वर्षा की भविष्यवाणी को अधिक स्थानीय स्तर तक लाने के लिए किया गया है। इसके अलावा, ERA5 डेटा का इस्तेमाल कर सात दिनों तक के दैनिक पूर्वानुमान तैयार करने वाला AI आधारित मध्यम-अवधि मौसम मॉडल भी विकसित किया गया है।
सरकार के मुताबिक, AI का इस्तेमाल बारिश के पूर्वानुमान में पूर्वाग्रह सुधारने, बिजली गिरने की भविष्यवाणी बेहतर करने और चरम मौसम की संभावित स्थिति का अधिक सटीक आकलन करने में किया जा रहा है।
क्षेत्रीय भाषाओं में मौसम की जानकारी
मौसम संबंधी जानकारी को आम लोगों तक उनकी भाषा में पहुंचाने के लिए 'मौसमवाणी' एप्लिकेशन विकसित किया जा रहा है। इसमें जनरेटिव AI और बड़े भाषा मॉडल (LLM) का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सिस्टम वास्तविक समय के मौसम पूर्वानुमानों को क्षेत्रीय भाषाओं में स्थानीय मौसम सलाह में बदलने की दिशा में काम कर रहा है।
इसके अलावा, 'मौसमजीपीटी' जैसे LLM आधारित अनुप्रयोगों पर भी काम चल रहा है, जिनका उद्देश्य मौसम पूर्वानुमान, प्रभाव आधारित चेतावनी और जलवायु संबंधी जानकारी के आसान और बहुभाषी सारांश तैयार करना है।
5.28 करोड़ किसानों को SMS से सलाह
AI का इस्तेमाल किसानों तक मौसम आधारित कृषि सलाह पहुंचाने में भी किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान AI/ML आधारित हाइब्रिड मॉडल से तैयार स्थानीय मानसून सलाह 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के करीब 5.28 करोड़ किसानों को SMS के जरिए भेजी गई।
मौसम विभाग मौसम संबंधी चेतावनियां मोबाइल ऐप, SMS, टीवी, रेडियो, वेबसाइट और सोशल मीडिया सहित कई माध्यमों से प्रसारित करता है। क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी पहुंचाने के लिए AI आधारित बहुभाषी तकनीकों और भाषिणी जैसे उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
राष्ट्रीय AI आधारित चेतावनी प्लेटफॉर्म की तैयारी
मिशन मौसम के तहत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे में एक समर्पित AI/ML केंद्र स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य वास्तविक समय के मौसम प्रेक्षणों और पूर्वानुमानों को एकीकृत कर मौसम पूर्वानुमान तथा आपदा तैयारियों को बेहतर बनाना है।
सरकार उपग्रहों, डॉप्लर मौसम रडार, स्वचालित मौसम केंद्रों, जमीन, महासागर और नदी से मिलने वाले आंकड़ों तथा AI आधारित पूर्वानुमान प्रणालियों को एक साथ जोड़कर राष्ट्रीय AI आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अधिकांश AI/ML आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियां अभी प्रयोग और मूल्यांकन के चरण में हैं। इसलिए जीवन, संपत्ति और आजीविका के नुकसान को कम करने में इनका स्वतंत्र योगदान अभी अलग से मात्रात्मक रूप से निर्धारित नहीं किया गया है।
यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।