वॉशिंगटन 25 सितंबर 2026। एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और यूरोपीय संघ के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अब अमेरिका और EU के बीच व्यापक टेक्नोलॉजी विवाद का रूप लेती दिख रही है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने X और एलन मस्क की उस कानूनी चुनौती में हस्तक्षेप करने के लिए आवेदन किया है, जिसमें यूरोपीय आयोग के €120 मिलियन के जुर्माने को रद्द करने की मांग की गई है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने 24 सितंबर 2026 को यूरोपीय संघ की जनरल कोर्ट में हस्तक्षेप का आवेदन दाखिल किया। मामला यूरोपीय आयोग के 5 दिसंबर 2025 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें X पर डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत €120 मिलियन का जुर्माना लगाया गया था। यह DSA के तहत यूरोपीय आयोग का पहला गैर-अनुपालन संबंधी जुर्माना था।
अमेरिका ने EU के अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल
अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि यूरोपीय आयोग ने अमेरिकी कंपनियों तक अपने नियामक अधिकार का दायरा बढ़ाने की कोशिश की है। DOJ के मुताबिक, मामले में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि EU का DSA किस हद तक उन अमेरिकी कंपनियों और उनके अलग-अलग कॉरपोरेट संस्थानों पर लागू किया जा सकता है, जिनका यूरोपीय डिजिटल सेवा से सीधा संबंध नहीं है।
DOJ ने यह भी कहा कि आयोग के फैसले में एलन मस्क को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने और उनसे जुड़े अलग अमेरिकी कॉरपोरेट संस्थानों तक कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाने को लेकर अमेरिका को गंभीर चिंताएं हैं। अमेरिकी विभाग ने इसे अपने कानूनी ढांचे में मौजूद कॉरपोरेट संरचना और अधिकार क्षेत्र के सिद्धांतों से जुड़ा मुद्दा बताया है।
अमेरिकी सरकार का मानना है कि इस मामले का फैसला EU में काम कर रहे अन्य बड़े अमेरिकी डिजिटल प्लेटफॉर्मों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
X पर क्यों लगाया गया था €120 मिलियन का जुर्माना?
यूरोपीय आयोग ने दिसंबर 2025 में X पर DSA की पारदर्शिता संबंधी आवश्यकताओं के उल्लंघन के लिए €120 मिलियन का जुर्माना लगाया था। आयोग के अनुसार, मामले में तीन प्रमुख मुद्दे सामने आए थे।
पहला, X का ब्लू चेकमार्क सिस्टम। आयोग का कहना था कि भुगतान करके कोई भी यूजर वेरिफाइड स्टेटस हासिल कर सकता था और यह व्यवस्था यूजर्स को अकाउंट की वास्तविक पहचान को लेकर भ्रमित कर सकती थी।
दूसरा, X के विज्ञापन रिपॉजिटरी में पारदर्शिता की कमी। आयोग ने कहा कि विज्ञापनों से संबंधित जरूरी जानकारी तक सार्वजनिक और शोधकर्ताओं की पहुंच पर्याप्त नहीं थी।
तीसरा, शोधकर्ताओं को X के सार्वजनिक डेटा तक पहुंच देने में कथित बाधाएं। आयोग के अनुसार, X की नीतियां और प्रक्रियाएं शोधकर्ताओं के लिए प्लेटफॉर्म के सार्वजनिक डेटा का स्वतंत्र अध्ययन कठिन बनाती थीं।
EU ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना DSA के तहत कंटेंट की किसी विशेष राजनीतिक राय पर आधारित नहीं था, बल्कि पारदर्शिता और प्लेटफॉर्म के नियामकीय दायित्वों से जुड़े प्रावधानों पर आधारित था।
DSA को लेकर अमेरिका और EU के बीच बढ़ता विवाद
X का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच बड़ी टेक कंपनियों के नियमन को लेकर मतभेद लगातार बढ़े हैं।
अमेरिकी पक्ष ने EU के डिजिटल नियमों के संभावित सीमा-पार प्रभावों पर सवाल उठाए हैं, जबकि यूरोपीय आयोग का कहना है कि DSA यूरोप में उपलब्ध डिजिटल सेवाओं पर लागू होने वाला एक समान नियामकीय ढांचा है।
EU के अनुसार, DSA का उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता बढ़ाना, अवैध सामग्री से निपटना और यूजर्स तथा शोधकर्ताओं के लिए प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। X के मामले में आयोग ने इसी ढांचे के तहत पारदर्शिता संबंधी उल्लंघनों पर कार्रवाई की।
मामला अब यूरोपीय अदालत में
एलन मस्क और X ने यूरोपीय आयोग के फैसले को चुनौती दी है। अमेरिकी न्याय विभाग का हस्तक्षेप आवेदन इसी कानूनी प्रक्रिया में अमेरिका को औपचारिक रूप से अपनी चिंताएं रखने का अवसर दे सकता है।
यह मामला सिर्फ X के €120 मिलियन के जुर्माने तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह बड़ा सवाल है कि किसी क्षेत्रीय नियामक के डिजिटल कानूनों की सीमा कितनी दूर तक जाती है और दूसरे देश में स्थित कंपनियों पर उनका कितना प्रभाव हो सकता है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा है कि वह विशेष रूप से इस बात को लेकर चिंतित है कि यूरोपीय आयोग का दृष्टिकोण अमेरिकी कंपनियों पर विदेशी और संभावित रूप से सीमा-पार नियामकीय कार्रवाई के लिए व्यापक मिसाल बना सकता है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि X पर लगाया गया जुर्माना कायम रहता है या अदालत यूरोपीय आयोग के अधिकार क्षेत्र और DSA की व्याख्या पर अलग निष्कर्ष निकालती है।