वॉशिंगटन 28 सितंबर 2026। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस रुख से असहमति जताई है, जिसमें उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े गंभीर सुरक्षा जोखिमों की चेतावनियों को खारिज किया है। गेट्स का कहना है कि AI से जुड़े खतरे “कोई झूठ या धोखा नहीं” हैं और सरकारों को अत्याधुनिक AI सिस्टम की निगरानी के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपाय लागू करने चाहिए।
NBC News के कार्यक्रम ‘Meet the Press’ में गेट्स ने कहा कि AI कंपनियों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू करने से अमेरिका की चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा कमजोर नहीं होगी। उनके मुताबिक, AI को केवल अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी होड़ के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं है।
‘AI का खतरा कोई झूठ नहीं’
ट्रंप ने AI विकास को धीमा करने या कंपनियों पर अतिरिक्त सरकारी नियंत्रण लगाने की मांगों का विरोध किया है। उनका तर्क है कि ज्यादा प्रतिबंध अमेरिका की तकनीकी बढ़त को नुकसान पहुंचा सकते हैं और चीन को आगे निकलने का मौका मिल सकता है।
ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर लिखा था, “WHOEVER WINS AI, WINS!” और कहा था कि अमेरिका चीन तथा अन्य देशों से आगे है।
जब गेट्स से ट्रंप के इस रुख और AI के अस्तित्वगत खतरे को “hoax” बताने संबंधी टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब दिया, “यह बिल्कुल भी झूठ या धोखा नहीं है।”
गेट्स ने कहा कि अत्यधिक सक्षम AI का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों, धोखाधड़ी, गलत सूचना फैलाने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। उनका जोर इस बात पर है कि सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि AI सिस्टम के कामकाज की निगरानी और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
‘सिर्फ किल स्विच काफी नहीं’
गेट्स ने AI सिस्टम के लिए केवल आपातकालीन ‘किल स्विच’ पर निर्भर रहने को पर्याप्त नहीं माना। उनके मुताबिक, अगर कोई AI सिस्टम खतरनाक व्यवहार करता है तो बाद में उसे बंद करने की क्षमता महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे पहले सिस्टम क्या कर रहा है, इसकी लगातार निगरानी और रिकॉर्डिंग भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी अत्याधुनिक मॉडल की गतिविधियों की निगरानी होनी चाहिए और यह रिकॉर्ड किया जाना चाहिए कि मॉडल वास्तव में क्या कर रहा है। गेट्स के अनुसार, अमेरिका को इसके लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए और उनका मानना है कि चीन की भी ऐसी सुरक्षा व्यवस्था में रुचि होगी।
गेट्स ने सेल्फ-रेगुलेशन पर भी सवाल उठाए
गेट्स का कहना है कि केवल AI कंपनियों के स्व-नियमन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने एडवांस्ड AI मॉडल के लिए कानून और अनिवार्य निगरानी व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
उनका तर्क है कि सरकार के पास निजी कंपनियों द्वारा विकसित अत्याधुनिक AI क्षमताओं की पूरी जानकारी या विशेषज्ञता हमेशा उपलब्ध नहीं हो सकती, लेकिन इसके बावजूद सरकारी निगरानी आवश्यक है।
गेट्स ने यह भी कहा कि AI की निगरानी के लिए बनाए गए नियम अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा को अपने आप कमजोर नहीं करेंगे। उनका अनुमान है कि यदि ट्रंप को यह भरोसा हो जाए कि सुरक्षा उपायों से चीन के मुकाबले अमेरिका की स्थिति प्रभावित नहीं होगी, तो इस मुद्दे पर सहमति बन सकती है।
चीन के साथ सुरक्षा सहयोग पर अलग राय
गेट्स ने इस धारणा से भी असहमति जताई कि चीन AI सुरक्षा उपायों को स्वीकार नहीं करेगा। उनका कहना है कि अत्यधिक सक्षम AI का इस्तेमाल किसी भी देश या संस्था के खिलाफ किया जा सकता है, इसलिए सभी देशों का अपने सिस्टम को सुरक्षित रखने में हित है।
हालांकि, उन्होंने माना कि AI के लिए वैश्विक नियमों पर अमेरिका और चीन के बीच सहमति बनाना बेहद मुश्किल होगा। गेट्स ने यहां तक कहा कि AI पर अंतरराष्ट्रीय समझौता करना शीत युद्ध के दौरान परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के लिए हुई बातचीत से भी ज्यादा कठिन हो सकता है।
अमेरिका-चीन AI बातचीत की शुरुआत
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच AI से जुड़े जोखिमों पर संवाद शुरू करने की कोशिशें सामने आई हैं। गेट्स ने कहा कि AI को केवल राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के मुद्दे के रूप में देखने के बजाय वैश्विक सुरक्षा चुनौती के तौर पर भी देखा जाना चाहिए।
उनके मुताबिक, AI के मामले में दुनिया को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें सरकारें और कंपनियां यह सुनिश्चित कर सकें कि शक्तिशाली AI सिस्टम के विकास के साथ सुरक्षा और निगरानी भी आगे बढ़े।
AI एजेंट्स की बढ़ती स्वायत्तता और हाल के सुरक्षा मामलों के बीच यह बहस अब केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रह गई है। सवाल यह है कि अत्यधिक सक्षम AI सिस्टम को कितना स्वतंत्र बनाया जाए और उनके व्यवहार की निगरानी की जिम्मेदारी कंपनियों और सरकारों के बीच किस तरह बांटी जाए।