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क्वांटम युग की तैयारी: Centre for Development of Telematics ने Synergy Quantum India Private Limited के साथ किया समझौता

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prativad
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📍 भोपाल
क्वांटम युग की तैयारी: Centre for Development of Telematics ने Synergy Quantum India Private Limited के साथ किया समझौता
14 फरवरी 2026। भारत में उभरते क्वांटम कंप्यूटिंग खतरों से निपटने के लिए दूरसंचार विभाग के तहत कार्यरत प्रमुख अनुसंधान संस्था सी-डॉट ने सिनर्जी क्वांटम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य क्वांटम-संवेदनशील क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम की पहचान के लिए एक उन्नत स्वचालित उपकरण विकसित करना है।

यह उपकरण किसी भी लक्षित डिवाइस को स्कैन कर उसमें इस्तेमाल हो रहे क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम और सुरक्षा तंत्र की पहचान करेगा। साथ ही, यह सुरक्षा कमजोरियों का पता लगाकर स्पष्ट रूप से बताएगा कि कौन से एल्गोरिदम क्वांटम-सुरक्षित हैं और कौन से क्वांटम जोखिम के दायरे में आते हैं। अंत में, यह एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें संवेदनशील एल्गोरिदम का उद्देश्य और डिवाइस में उनकी सटीक स्थिति भी दर्ज होगी, ताकि क्वांटम-सुरक्षित तकनीक की ओर संक्रमण की योजना बनाई जा सके।

तीन मॉड्यूल पर आधारित होगा समाधान
प्रस्तावित समाधान तीन प्रमुख हिस्सों में विकसित किया जाएगा:
वेब एप्लिकेशन: नेटवर्क ट्रैफिक की निगरानी, जोखिम मूल्यांकन और क्वांटम खतरों के लिए बाहरी स्कैनिंग।
सिक्योरिटी स्कैनर एजेंट: एंडपॉइंट और कंटेनर स्तर पर डिवाइस की आंतरिक लाइब्रेरी की जांच।
कंट्रोल सॉफ्टवेयर: एजेंट की स्थापना, स्कैन संचालन और जोखिम संबंधी डेटा को एकीकृत रिपोर्ट में संकलित करना।

यह पूर्णतः एकीकृत समाधान रक्षा, दूरसंचार, बैंकिंग और सरकारी क्षेत्रों सहित महत्वपूर्ण अवसंरचना में क्रिप्टोग्राफिक कमजोरियों की शीघ्र पहचान में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संगठनों को पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की दिशा में व्यवस्थित कदम उठाने में सहायता मिलेगी।

नेतृत्व के बयान
सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग की प्रगति पारंपरिक एन्क्रिप्शन प्रणालियों के लिए चुनौती बन रही है। ऐसे में स्वदेशी समाधान विकसित करना डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

सिनर्जी क्वांटम इंडिया के सह-संस्थापक एवं सीईओ जय ओबेराय ने इस सहयोग को क्वांटम-सुरक्षित सुरक्षा की दिशा में भारत के लिए निर्णायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह उपकरण सरकारी और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को क्वांटम-संबंधित जोखिमों का आकलन और समाधान करने में सक्षम बनाएगा।

‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा बल
यह पहल आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगी। क्वांटम-सुरक्षित नेटवर्क संक्रमण के लिए क्रिप्टोग्राफिक इन्वेंट्री का आकलन पहला अहम कदम माना जाता है, और यह परियोजना उसी दिशा में ठोस आधार तैयार करेगी।

समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में दोनों संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही। यह साझेदारी भारत को अगली पीढ़ी की साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकियों में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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