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ब्लैक होल के शक्तिशाली जेट से बदल सकता है आकाशगंगाओं का भविष्य, भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा अहम संकेत

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Digital Desk
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📍 भोपाल
ब्लैक होल के शक्तिशाली जेट से बदल सकता है आकाशगंगाओं का भविष्य, भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा अहम संकेत

25 सितंबर 2026। ब्लैक होल को आमतौर पर ऐसी खगोलीय वस्तु के रूप में देखा जाता है जो अपने आसपास की गैस और धूल को निगल लेती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने अब इसके एक अलग और बेहद प्रभावशाली रूप का संकेत खोजा है। भारतीय और अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक अध्ययन के अनुसार, आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद अतिविशाल ब्लैक होल (Supermassive Black Hole) से निकलने वाले शक्तिशाली जेट उसकी पूरी आकाशगंगा के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का स्वायत्त संस्थान है, और एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी समेत अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया का अध्ययन किया है। शोध में सामने आया है कि ब्लैक होल से निकलने वाले जेट आकाशगंगा के आसपास मौजूद गैस के विशाल भंडार को गर्म और ऊर्जावान कर सकते हैं। इससे गैस ठंडी होकर तारों में बदलने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

आकाशगंगा के बाहर मौजूद है गैस का विशाल भंडार
आकाशगंगा को आमतौर पर चमकते तारों और धूल से बनी एक विशाल संरचना के रूप में देखा जाता है। लेकिन इसकी दिखाई देने वाली डिस्क के काफी बाहर तक गैस का एक बेहद विरल क्षेत्र फैला होता है। इसे सर्कमगैलेक्टिक मीडियम (CGM) कहा जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह गैस आकाशगंगा के लिए भविष्य में नए तारों के निर्माण का महत्वपूर्ण ईंधन उपलब्ध कराती है। CGM आकाशगंगा के आकार से करीब 10 से 20 गुना अधिक दूरी तक फैला हो सकता है।

सवाल यह है कि यदि इस विशाल गैस भंडार का बड़ा हिस्सा ठंडा होकर आकाशगंगा में वापस आए और तारों में बदल जाए, तो कई आकाशगंगाएं आज की तुलना में कहीं अधिक चमकीली और तारों से भरी होनी चाहिए थीं। लेकिन वास्तविकता ऐसी नहीं है।

इसी विरोधाभास ने वैज्ञानिकों को लंबे समय से यह सोचने पर मजबूर किया है कि आखिर कौन-सी प्रक्रिया गैस को ठंडा होकर तारों में बदलने से रोकती है।

ब्लैक होल के जेट पर केंद्रित हुआ अध्ययन
वैज्ञानिकों ने लंबे समय से अनुमान लगाया है कि आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद अतिविशाल ब्लैक होल इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं था कि ब्लैक होल का प्रभाव आकाशगंगा से इतनी दूर मौजूद CGM तक किस तरह पहुंचता है।

नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ब्लैक होल से निकलने वाले अत्यधिक गर्म प्लाज्मा के जेट पर ध्यान केंद्रित किया। ये जेट आवेशित कणों से बने होते हैं और ब्लैक होल के आसपास के क्षेत्र से बहुत तेज गति से बाहर निकल सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जब यह जेट पहली बार CGM में मौजूद गैस से टकराता है, तो वहां एक शक्तिशाली झटका (Shock) पैदा होता है। इस टक्कर से गैस में ऊर्जा पहुंचती है और वह गर्म तथा आयनित हो जाती है।

जेट की दिशा में मिला मजबूत संकेत
अध्ययन की प्रमुख लेखिका और RRI के खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी प्रभाग की सहायक प्रोफेसर नम्रता रॉय के अनुसार, शोधकर्ताओं ने CGM में ऊर्जावान और आयनित गैस से निकलने वाली विशेष चमक की तलाश की।

जब वैज्ञानिकों ने आकाशगंगा के चारों ओर सभी दिशाओं से मिले संकेतों का औसत निकाला, तो कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला। लेकिन जब उन्होंने विशेष रूप से ब्लैक होल के जेट की दिशा में देखा, तो एक मजबूत संकेत सामने आया।

इससे संकेत मिलता है कि ब्लैक होल का जेट पूरे CGM को समान रूप से प्रभावित नहीं करता, बल्कि मुख्य रूप से अपने रास्ते में आने वाली गैस पर ऊर्जा डालता है।

वैज्ञानिकों को यह संकेत दो क्षेत्रों में विशेष रूप से मजबूत मिला। पहला, आकाशगंगा की तारकीय डिस्क के किनारे, जहां जेट पहली बार CGM से टकराता है। दूसरा, CGM की बाहरी सीमा के पास, जहां अपेक्षाकृत धीमा हो चुका जेट फिर गैस के साथ टकराता है।

तारों के निर्माण पर पड़ सकता है असर
तारों के निर्माण के लिए ठंडी गैस का एकत्रित होना जरूरी है। लेकिन यदि गैस अत्यधिक गर्म और ऊर्जावान हो जाए, तो उसका ठंडा होकर घनी अवस्था में पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

ऐसे में ब्लैक होल से निकलने वाला जेट गैस को लगातार गर्म और विक्षुब्ध कर सकता है। परिणामस्वरूप वह गैस तारों के निर्माण के लिए जरूरी परिस्थितियां पैदा नहीं कर पाती।

इस प्रक्रिया को आकाशगंगाओं के विकास को समझने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका अर्थ यह हो सकता है कि आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद अपेक्षाकृत छोटा ब्लैक होल अपने आसपास के तत्काल क्षेत्र से बहुत दूर तक प्रभाव डाल सकता है।

ब्लैक होल का प्रभाव उम्मीद से कहीं बड़ा
अध्ययन की सह-लेखिका और एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर संचयीता बोर्थाकुर ने इस प्रभाव की तुलना एक बेहद छोटे स्रोत द्वारा बहुत दूर तक प्रभाव पैदा करने से की है।

यह अध्ययन इस बात को समझने में एक महत्वपूर्ण संकेत देता है कि कुछ आकाशगंगाओं में नए तारों का निर्माण समय के साथ क्यों कम हो जाता है और वे अपेक्षाकृत शांत या निष्क्रिय अवस्था में क्यों पहुंचती हैं।

शोध The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्लैक होल और उनकी मेजबान आकाशगंगाओं के बीच इस ऊर्जा संबंध को बेहतर ढंग से समझना ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के जन्म, विकास और भविष्य को समझने में मदद कर सकता है।

 

चित्र: केंद्रीय अतिविशाल ब्लैक होल (जिन्हें “सक्रिय गांगेय नाभिक”/एजीएन भी कहा जाता है) से निकलने वाले सापेक्षिक जेट द्वारा आकाशगंगा के आसपास मौजूद गैसीय भंडार को प्रभावित करने का एक चित्रकार द्वारा प्रस्तुत चित्रण

छवि सौजन्य: हेली नेल्सन, एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी (एएसयू)

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