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AI के बेकाबू होने की घटनाएं दोगुनी, जुलाई में 300 से अधिक मामले दर्ज: रिपोर्ट

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📍 भोपाल
AI के बेकाबू होने की घटनाएं दोगुनी, जुलाई में 300 से अधिक मामले दर्ज: रिपोर्ट

30 अगस्त 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के व्यवहार को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में AI सिस्टम के इंसानी नियंत्रण से बाहर होने या अपेक्षित निर्देशों के विपरीत काम करने की 300 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं। यह संख्या जून की तुलना में लगभग दोगुनी बताई गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में AI ने यूज़र्स के निर्देशों को नजरअंदाज किया, गलत या भ्रामक जानकारी दी, या अपने तय लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ऐसे तरीके अपनाए जिन्हें संभावित रूप से नुकसानदेह माना गया।

टेस्टिंग से निकलकर असल दुनिया तक पहुंची चिंता
इस गर्मी में OpenAI और Anthropic के कुछ उन्नत AI मॉडल्स के टेस्टिंग के दौरान असामान्य या तथाकथित “रोग बिहेवियर” दिखाने की खबरों के बाद AI सुरक्षा पर बहस और तेज हो गई है। विशेषज्ञों और कुछ नीति निर्माताओं ने AI सिस्टम के विकास पर अधिक निगरानी और सख्त सरकारी नियमों की मांग की है।

द गार्डियन के अनुसार, जुलाई में दर्ज 300 से अधिक घटनाएं केवल लैब या टेस्टिंग एनवायरनमेंट तक सीमित नहीं थीं। इनमें वास्तविक कारोबारी और निजी उपयोग के दौरान सामने आई शिकायतें भी शामिल थीं।

X पर शिकायतों से तैयार किया गया डेटा
यह आंकड़े ‘लॉस ऑफ कंट्रोल ऑब्जर्वेटरी’ से लिए गए हैं। इस मॉनिटरिंग व्यवस्था को सेंटर फॉर लॉन्ग टर्म रेजिलिएंस संचालित करता है और इसमें AI से जुड़ी उन समस्याओं को ट्रैक किया जाता है, जिनकी शिकायतें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की जाती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, चूंकि यह निगरानी मुख्य रूप से एक ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध शिकायतों पर आधारित है, इसलिए AI के बेकाबू व्यवहार की वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।

UK के AI सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में X पर AI से जुड़ी करीब 1,600 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें बड़ी संख्या उन सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की बताई गई, जो अपने कामकाज में AI बॉट्स और एजेंट्स का इस्तेमाल कर रहे थे।

निर्देशों को नजरअंदाज करने के मामले बढ़े
मॉनिटरिंग ग्रुप का कहना है कि वास्तविक दुनिया में दर्ज अधिकांश घटनाओं से अब तक कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि, AI द्वारा गलत जानकारी देने, यूज़र्स से भ्रामक व्यवहार करने और इंसानी निर्देशों को नजरअंदाज करने जैसी घटनाओं की गंभीरता बढ़ी है।

AI सिक्योरिटी से जुड़े अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कुछ यूज़र रिपोर्ट्स में ऐसे संकेत मिले हैं कि AI सिस्टम सीधे निर्देशों की अनदेखी कर सकते हैं, सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने की कोशिश कर सकते हैं और किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए नुकसानदेह रास्ते अपना सकते हैं।

सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग
‘सेंटर फॉर लॉन्ग टर्म रेजिलिएंस’ के सीनियर पॉलिसी मैनेजर टॉमी शैफ़र-शेन ने कहा कि यह मान लेना सही नहीं होगा कि AI का गलत या अनियंत्रित व्यवहार केवल टेस्टिंग के दौरान ही देखने को मिलता है।

उनका कहना है कि वास्तविक दुनिया में भी ऐसे मामलों के संकेत सामने आ रहे हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

मॉनिटरिंग ग्रुप ने ब्रिटिश सरकार से मांग की है कि AI कंपनियों के लिए कंट्रोल खोने या गंभीर सुरक्षा घटनाओं की रिपोर्ट करना अनिवार्य बनाया जाए। साथ ही, गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए सरकार को विशेष आपातकालीन अधिकार देने की भी मांग की गई है, जिसमें जरूरत पड़ने पर कुछ AI सिस्टम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का विकल्प शामिल हो सकता है।

AI की बढ़ती क्षमताओं के बीच यह बहस अब सिर्फ तकनीकी दुनिया तक सीमित नहीं रह गई है। बड़ा सवाल यही है कि AI जितना ज्यादा सक्षम होता जाएगा, उसे नियंत्रित रखने की जिम्मेदारी और चुनौती उतनी ही बड़ी होती जाएगी।

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